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आदिवासी समुदायों की परंपरागत संस्कृति व धार्मिक अनुष्ठान को दर्शाता है सरहुल पर्व

Updated at : 30 Mar 2025 8:50 PM (IST)
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आदिवासी समुदायों की परंपरागत संस्कृति व धार्मिक अनुष्ठान को दर्शाता है सरहुल पर्व

अतिथियों ने वीर शहीद सिदो-कान्हू की तस्वीर पर माल्यार्पण किया

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साहिबगंज. साहिबगंज महाविद्यालय के नंदन भवन में आदिवासी कल्याण छात्रावास द्वारा रविवार को प्राकृतिक का त्योहार बाहा व सरहुल पर्व पारंपरिक तरीके से मनाया गया. इसके साथ ही संथाली साहित्य दिवस का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया. इसमें मुख्य अतिथि के रूप में जिला खनन पदाधिकारी कृष्णा किस्कू, एसडीओ अमर जॉन आइन्ड, एसडीपीओ किशोर तिर्की पहुंचे, जिन्हें मुख्य गेट पर छात्रा नायिका मिली मुर्मू, छात्रा सचिव कोमोली मुर्मू ने पारंपरिक गीत गाकर की. कार्यक्रम स्थल पर दीप जला कर व अतिथियों ने वीर शहीद सिदो-कान्हू की तस्वीर पर माल्यार्पण किया. जिला खनन पदाधिकारी कृष्णा किस्कू ने कहा कि बाहा व सरहुल पर्व आदिवासी समुदायों के बीच विशेष रूप से मनाया जाता है. एसडीओ अमर जॉन आइन्ड ने कहा कि इस त्योहार के दौरान आदिवासी समाज के लोग धार्मिक रीति-रिवाज के साथ नृत्य-संगीत का आयोजन किया जाता है. एसडीपीओ किशोर तिर्की ने कहा कि सरहुल त्योहार आदिवासी समुदायों के लिए उत्साह समरसता और सामाजिक एकता का प्रतीक है. प्राचार्य प्रो एसआरआइ रिजवी ने कहा कि सरहुल बसंत ऋतु में पतझड़ के बाद पेड़-पौधे की टहनियों पर हरी-भरी पत्तियां निकलने लगती है, तो आम में मंजर व सखुआ के साथ ही महुआ के फूल से पूरा वातावरण सुगंधित हो जाता है, तब यह त्योहार मनाया जाता है. मांदर की थाप पर छात्र-छात्राओं ने नृत्य-संगीत प्रस्तुत सरहुल त्योहार आदिवासियों के प्राकृतिक प्रेम को दर्शाता है. मौके पर अध्यक्ष पौलुस मुर्मू, सचिव अजय टुडू, पूर्व छात्र नायक विनोद मुर्मू, सुनील मरांडी, लक्ष्मी टुडू, अजय हेंब्रम माइकल, चंदन, प्रदीप, मनोज सहित छात्रावास के सैकड़ों छात्र मौजूद थे. साहिबगंज कॉलेज में मनाया गया सरहुल पर्व साहिबगंज कॉलेज के प्रांगण में रविवार को आदिवासी रीति-रिवाज के साथ आदिवासी कल्याण छात्रावास के छात्रों ने पूजा-अर्चना कर बाहा व सरहुल पर्व मनाया. नाइकी बाबा कुडुम नाइकी गुडैत ने आदिवासी वेशभूषा में विशेष तरह के फूलों को कानों में लगाकर पूजा की. वहीं नाइकी बाबा संदीप मुर्मू ने बताया कि बसंत ऋतु के दौरान प्राकृतिक से लगाव को जोड़ने व नयी फसलों के आने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है, जिसमें पेड़ों और प्रकृति के अन्य तत्वों की पूजा की जाती है. मौके पर अध्यक्ष पौलुस मुर्मू, पूर्व छात्र नायक सहित कई सदस्य मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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