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शिक्षकों का गृह जिला स्थानांतरण बना सिरदर्द

Updated at : 31 Dec 2025 11:12 PM (IST)
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sahibganj

साहिबगंज (फाइल फोटो)

तीसरी बार मेडिकल जांच के बाद भी संशय बरकरार

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तीनपहाड़ जिले में कार्यरत शिक्षकों का गृह जिला स्थानांतरण का मामला लगातार उलझता जा रहा है. विभागीय स्तर पर कई चरणों में प्रक्रिया अपनाई जा रही है, लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है. राज्य के 22 अन्य जिलों में जहां गृह जिला स्थानांतरण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, वहीं साहिबगंज जिले के शिक्षक आज भी सूची जारी होने और स्थानांतरण आदेश का इंतजार कर रहे हैं. शिक्षकों के अनुसार, कुछ मामलों में स्थानांतरण पहले ही हो चुका है, लेकिन अधिकांश शिक्षक अब भी प्रतीक्षा सूची में हैं. बार-बार स्वास्थ्य जांच कराए जाने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि अंतिम निर्णय कब लिया जाएगा. इससे शिक्षकों में असमंजस और नाराजगी बढ़ती जा रही है. मेडिकल जांच के बाद जगी थी उम्मीद पूर्व में कई शिक्षकों का मेडिकल परीक्षण कराया गया था, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि गृह जिला स्थानांतरण प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गयी है. उपायुक्त के निर्देश पर जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा 36 शिक्षकों की सूची जारी कर 12 दिसंबर को दूसरी बार स्वास्थ्य जांच कराई गयी थी. यह जांच संयुक्त स्वास्थ्य भवन के सभागार में हुई थी. कौन-कौन हैं मेडिकल बोर्ड में दूसरी बार की जांच में चार सदस्यीय मेडिकल बोर्ड में महमूद आलम, केशव कृष्णा, मोहन मुर्मू, श्रीजा कृष्णा शामिल थे. तीसरी बार हुई जांच, फिर भी विवाद : विभागीय आदेश के बाद तीसरी बार स्वास्थ्य जांच कराई गई. शिक्षा विभाग द्वारा सात शिक्षकों को मौखिक सूचना देकर जांच के लिए बुलाया गया. इस बार मेडिकल टीम में महमूद आलम, आशुतोष कुमार, केशव कृष्णा, श्रीजा कृष्णा शामिल थे, लेकिन जांच के दौरान केवल पांच शिक्षकों का ही परीक्षण किया गया. दो शिक्षकों की जांच यह कहकर नहीं की गई कि उनका नाम मेडिकल टीम को उपलब्ध कराई गई सूची में शामिल नहीं था. सूची को लेकर भ्रम और नाराजगी : शिक्षकों का आरोप है कि रविवार की शाम शिक्षा विभाग के कर्मचारी द्वारा फोन कर जांच की सूचना दी गई थी. सभी शिक्षक निर्धारित समय पर पहुंचे, लेकिन दो शिक्षकों का नाम सूची में नहीं होने की बात कहकर उन्हें वापस लौटा दिया गया. इस संबंध में जिला शिक्षा अधीक्षक से संपर्क किया गया तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला. वहीं सिविल सर्जन कार्यालय ने भी कहा कि जितने नाम सूची में थे, उतने का ही परीक्षण किया गया. शिक्षकों का आरोप : शिक्षकों का कहना है कि बार-बार बुलाकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है. मेडिकल जांच के नाम पर उनकी छुट्टियां भी बर्बाद हो रही है. न तो जांच पूरी हो रही है और न ही स्थानांतरण की स्थिति स्पष्ट की जा रही है. स्थापना समिति की बैठक पर टिकी निगाहें : सूत्रों के अनुसार दो या तीन जनवरी को राज्य स्तर पर स्थापना समिति की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें गृह जिला स्थानांतरण से संबंधित सूची पर चर्चा की जाएगी, लेकिन जिले में अब भी मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर किस आधार पर रिपोर्ट भेजी जायेगी. डीसी से लगाई गुहार : मेडिकल जांच से वंचित रहे दो शिक्षकों ने डीसी कार्यालय में आवेदन देकर न्याय की मांग की है. आवेदन में कहा गया है कि पूर्व में दो बार उनकी पत्नी का मेडिकल परीक्षण कराया गया, लेकिन उसका कोई परिणाम साझा नहीं किया गया. तीसरी बार फिर बुलाकर जांच नहीं की गयी, जिससे वे स्वयं को परेशान महसूस कर रहे हैं. शिक्षकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाए. गृह जिला स्थानांतरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए. कहते हैं अधिकारी साहिबगंज डीएसइ ने कहा कि गृह जिला स्थानांतरण मामले में जो सूची मिली उसे भेज दी गयी. बाकी जांच टीम की ओर से जांच रिपोर्ट उपायुक्त को सौंप दी जाती है. – कुमार हर्ष, डीएसइ, साहिबगंज

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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