मंईयां सम्मान योजना में गड़बड़ी की जांच करेगी कमेटी

Updated at : 05 Feb 2025 5:30 PM (IST)
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मंईयां सम्मान योजना में गड़बड़ी की जांच करेगी कमेटी

रांगलिया व बिलकांदी पंचायत में बीडीओ के निरीक्षण में आया था मामला

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रांगलिया व बिलकांदी पंचायत में बीडीओ के निरीक्षण में आया था मामला प्रतिनिधि, रानीश्वर मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना में अनियमितताओं के प्रकाश में आने के बाद रांगालिया एवं बिलकांदी पंचायतों में गहन जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है. यह समिति संपूर्ण प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा संभावित अनियमितताओं की गहराई से पड़ताल करने के उद्देश्य से गठित की गयी है. रांगालिया पंचायत के लिए गठित जांच समिति में प्रभारी बीपीआरओ कुमार सत्येंद्र, बाल विकास परियोजना की महिला पर्यवेक्षिका बुलु रानी घोष, धानभाषा पंचायत के सचिव हरिसाधन दत्त, कंप्यूटर ऑपरेटर सुखेंदु हाजरा तथा रांगालिया पंचायत सचिव हरिनारायण सिंह को शामिल किया गया है. वहीं, बिलकांदी पंचायत के लिए गठित समिति में प्रभारी बीपीआरओ कुमार सत्येंद्र, बुलु रानी घोष, गोबिंदपुर पंचायत सचिव दीप्ति दास, कंप्यूटर ऑपरेटर सुखेंदु हाजरा एवं बिलकांदी पंचायत सचिव पुष्पेन मिश्रा को जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है. ज्ञात हो कि, बीडीओ राजेश कुमार सिन्हा ने 31 जनवरी को रांगालिया एवं बिलकांदी पंचायतों के प्रज्ञा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया था. इस दौरान रांगालिया प्रज्ञा केंद्र में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत 25 आवेदन पत्र पाये गये, जिनमें से 24 के पास प्राप्ति रसीद उपलब्ध थी. इसके अलावा, दो ऐसे आवेदन भी पाये गये जिनके आवेदकों की उम्र 18 वर्ष से कम थी, जिससे आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर ऑनलाइन प्रविष्टि करने की संभावना व्यक्त की गयी है. इसके अतिरिक्त, एक महिला के दस्तावेज का उपयोग कर किसी अन्य व्यक्ति के नाम से आवेदन किये जाने का संदेह भी सामने आया. बिलकांदी पंचायत में भी निरीक्षण के दौरान इसी तरह की अनियमितताएं दर्ज की गयीं. वहां कुल 24 आवेदन पत्र पाये गये, जिनमें से एक ही आवेदक के दो आवेदन प्रस्तुत किये गये थे. इतनी बड़ी संख्या में प्रज्ञा केंद्र में आवेदन पत्रों का संकलन संदेहास्पद प्रतीत हुआ, जिससे मामले की जांच आवश्यक हो गयी. समिति को विशेष रूप से पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच करने के निर्देश दिये गये हैं जिनमें प्रज्ञा केंद्र संचालक द्वारा आवेदन पत्रों को केंद्र में रखने की मंशा क्या थी. केंद्र में पाये गये आवेदक पात्रता की कसौटी पर खरे उतरते हैं या नहीं. आवेदन पत्र ऑनलाइन किए गए थे अथवा नहीं. यदि ऑनलाइन आवेदन किया गया था, तो पंचायत सचिव के पास इन्हें जमा क्यों नहीं किया गया. 18 वर्ष से कम उम्र वाले आवेदकों के आधार में बदलाव क्यों और किस उद्देश्य से किया गया. जांच समिति को निर्देश दिया गया है कि वे एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट संबंधित प्रखंड प्रशासन को सौंपें ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.

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