राजमहल/मंगलहाट
राजमहल की पहाड़ियां और उनके आसपास का क्षेत्र, उत्तरवाहिनी गंगा नदी के किनारे स्थित, इन दिनों पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन चुका है. मंगलहाट स्थित मुगलकालीन जामी मस्जिद और बारादरी विशेष रूप से देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (रांची सर्किल) के अनुसार, यह जामी मस्जिद 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सम्राट अकबर के राज्यपाल, राजा मानसिंह द्वारा बनवाई गई थी. इस ऐतिहासिक इमारत की भव्यता और वास्तुकला पर्यटकों को अतीत की याद दिलाती है. नव वर्ष के आगमन के साथ, इस क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या हर वर्ष और हर महीने में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. केवल दिसंबर महीने के 20 तारीख तक लगभग 5000 से अधिक सैलानी प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक धरोहरों का आनंद लेने के लिए यहां आ चुके हैं. इसका मतलब है कि प्रत्येक दिन 200 से 300 सैलानी भ्रमण कर रहे हैं. प्राकृतिक छाँव में स्थित मंगलहाट की जामी मस्जिद एवं बारादरी तथा कन्हैयास्थान जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं. बंगाल, बिहार और झारखंड से हजारों सैलानी यहां आकर इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व का आनंद ले रहे हैं. अनुमान है कि जनवरी महीने तक पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होगी. प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए इन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर पुलिस बल तैनात किया है. इसके अलावा, क्षेत्र में लगातार पुलिस गश्ती भी हो रही है ताकि पर्यटक बिना किसी परेशानी के यहां का भ्रमण कर सकें. राजमहल की पहाड़ियां इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का एक अनूठा संगम हैं. यहां की ऐतिहासिक इमारतें, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक नजारें पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. यदि आप इतिहास और प्रकृति के प्रेमी हैं, तो राजमहल की पहाड़ियों की यात्रा आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित हो सकती है. साल भर में चार बार सबसे अधिक सैलानियों की भीड़ उमड़ती है—ईद, बकरी ईद, दुर्गा पूजा और नव वर्ष के जनवरी महीने में. प्रत्येक वर्ष लाखों से अधिक सैलानियों की उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है.
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