अभियंताओं पर कार्रवाई के लिए लिखा पत्र
Updated at : 07 Jan 2017 6:27 AM (IST)
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डीसी शैलेश कुमार ने सरकार को लिखा पत्र साहिबगंज : राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी महाविद्यालय में समतलीकरण व झाड़ी कटाई के काम में हुई अनियमितता के खिलाफ डीसी शैलेश कुमार ने कार्रवाई की है. डीसी ने अपने पत्र में लिखा है कि जांच में योजना में अनियमितता व लापरवाही बरते जाने की बात सामने आयी है. […]
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डीसी शैलेश कुमार ने सरकार को लिखा पत्र
साहिबगंज : राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी महाविद्यालय में समतलीकरण व झाड़ी कटाई के काम में हुई अनियमितता के खिलाफ डीसी शैलेश कुमार ने कार्रवाई की है. डीसी ने अपने पत्र में लिखा है कि जांच में योजना में अनियमितता व लापरवाही बरते जाने की बात सामने आयी है.
इस मामले में तत्कालीन एनआरईपी कार्यपालक अभियंता हीरा प्रसाद रजक, तत्कालीन सहायक अभियंता हरिनारायण गुप्ता, तत्कालीन जेई रामाकांत तिवारी , तत्कालीन जेई अरूणोदय कुमार व सेवानिवृत जेई शंभूनाथ पोद्दार के खिलाफ साक्ष्य मिला है. डीसी ने इनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है. गौरतलब है कि गोपनीय कार्यालय के पत्रांक 2178 के तहत सरकार के प्रधान सचिव पंचायत राज एवं एनआरईपी को पत्र लिखकर योजना में अनियमितता की शिकायत समाजिक कार्यकर्ता सिंधेश्वर मंडल ने की थी. इस पर डीडीसी से डीसी ने जांच-मंतव्य मांगा था. 26 दिसंबर को योजना का स्थल निरीक्षण किया गया था.
डीडीसी की जांच रिपोर्ट
डीडीसी राजकुमार ने पूर्व डीडीसी प्रेमकांत झा के द्वारा जांच रिपोर्ट का अवलोकन कर डीसी को जो रिपोर्ट दी है उसमें कहा गया है इसमें सिंघेश्वर मंडल, समाजिक कार्यकर्ता, आजाद नगर विकास भवन रोड साहिबगंज के परिवाद पत्र में अंकित तथ्यों से संबंधित जांच प्रतिवेदन की मांग की गयी. कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, साहिबगंज के साथ योजना का स्थलीय निरीक्षण एवं जांच की गयी. जांच प्रतिवेदन में योजना की प्राक्कलित राशि 14,82,300 है.
अभिलेखों एवं उपलब्ध कागजाताओ के अवलोकन में पाया गया कि उक्त दोनों योजनाओं को किस परिस्थिति में एकरारनामा के पूर्व योजना का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया, इसका उल्लेख अभिलेख में वर्णित नही है. चाहरदिवारी का निर्माण जिस भूमि पर हुई है.
उस भूमि का प्रकार अंचलाधिकारी, तालझारी से संपुष्ट किया जा सकता है. कहा है कि योजना संख्या : 5/2007/08 की प्रक्कलित राशि 12,32,800 थी. स्थलीय निरीक्षण में कार्य स्थल पर जंगली झाड़ी पायी गयी. योजना का अभिश्रव एवं मास्टर रॉल किसी अभियंता द्वारा पारित नहीं है. योजना अभिलेख में एक भी फोटोग्राफ संधारित नही है. प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि योजना निर्माण में अनियमितता एवं लापरवाही बरती गयी है.
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