पिता की प्रेरणा से बना टॉपर

Updated at : 21 May 2016 5:41 AM (IST)
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पिता की प्रेरणा से बना टॉपर

सफलता . संत जॉन बर्कमंस विद्यालय के नीतीश ने किया कमाल राजमहल : संत जॉन बर्कमंस उच्च विद्यालय के छात्र नीतीश कुमार ने मैट्रिक की परीक्षा में 479 अंक लाकर पूरे झारखंड में टॉपर रहा है. नीतीश बेहद गरीब परिवार से है. उसके पिता राजमहल प्रखंड के छोटा खुटहरी निवासी काजल साहा मजदूरी करते हैं. […]

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सफलता . संत जॉन बर्कमंस विद्यालय के नीतीश ने किया कमाल

राजमहल : संत जॉन बर्कमंस उच्च विद्यालय के छात्र नीतीश कुमार ने मैट्रिक की परीक्षा में 479 अंक लाकर पूरे झारखंड में टॉपर रहा है. नीतीश बेहद गरीब परिवार से है. उसके पिता राजमहल प्रखंड के छोटा खुटहरी निवासी काजल साहा मजदूरी करते हैं. परिवार के भरण पोषण के साथ बच्चों की पढ़ाई में उन्हें क्या क्या आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. वे कहते हैं जो भी कमाते हैं कमाई की 70 फीसदी राशि बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग कर देते हैं.
कभी क्रशर, कभी मनरेगा तो कभी सामान ढो कर जो भी पारिश्रमिक मिलता है वही उनका आधार होता है. काजल कहते हैं आगे भी जितना होगा अपने बच्चों को पढ़ाने की पूरी कोशिश करेंगे. नीतीश भी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व दादा को देता है. कहता है पापा ने हमेशा टॉप करने को प्रेरित किया. उसने भी पूरी कोशिश की. जिसका परिणाम आज सामने है. यदि विद्यार्थी ठान ले कि उसे टॉप करना है तो उसे कोई ताकत नहीं रोक सकती.
गुदड़ी का लाल बना नीतीश
नहीं मिली मदद, सरकार से करेंगे मांग
नीतीश के पिता काजल साहा का कहना है कि अब तक नीतीश की पढ़ाई उन्होंने काफी आर्थिक परेशानी झेल कर की है. स्थानीय शिक्षक प्रवीर कुमार ने उनकी काफी मदद की है. अपने बच्चे को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते हैं. उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार उन्हें बच्चों की पढ़ाई में आर्थिक मदद करे.
मां कहतीं हैं अपने बच्चे पर नाज है
मैट्रिक में स्टेट टॉपर नीतीश कुमार की मां माया देवी कहतीं हैं उन्होंने पेट काट कर बच्चे को पढ़ाया है. कभी कोई शिकायत नहीं होने दी. हमेशा पढ़ने को प्रेरित किया और आगे भी करेंगे. उनके कलेजे के टुकड़े ने जो सफलता हासिल की है इसपर उन्हें नाज है. बता दें कि नीतीश की बड़ी बहन ने इंटरमीडिएट कला संकाय की परीक्षा दी है. छोटी बहन भी पढ़ रही है. मां कहतीं हैं माली हालत खराब रहने के बावजूद बच्चों को पढ़ाने लिखाने में कोई कमी नहीं होने देती है. दो वक्त कम खाये मंजूर है लेकिन बच्चों की फीस जरूर भरते हैं.
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