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Published at :07 Dec 2015 7:12 PM (IST)
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मैसा की मौत के बाद भी नहीं जागा प्रशासन सवाल- मैसा की मौत का जिम्मेदार कौन फोटो नं 7 एसबीजी 25 हैं. कैप्सन: सोमवार को मृतक का फाइल फोटो नगर प्रतिनिधि, साहिबगंजबोरियो प्रखंड के बिरबल कांदर निवासी मैसा पहाड़िया की मौत के बाद भी स्थानीय प्रशासन संवेदनशील नहीं दिख रहा. प्रशासनिक लापरवाही के कारण वृद्धावस्था […]

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मैसा की मौत के बाद भी नहीं जागा प्रशासन सवाल- मैसा की मौत का जिम्मेदार कौन फोटो नं 7 एसबीजी 25 हैं. कैप्सन: सोमवार को मृतक का फाइल फोटो नगर प्रतिनिधि, साहिबगंजबोरियो प्रखंड के बिरबल कांदर निवासी मैसा पहाड़िया की मौत के बाद भी स्थानीय प्रशासन संवेदनशील नहीं दिख रहा. प्रशासनिक लापरवाही के कारण वृद्धावस्था पेंशन से वंचित होने के बाद मैसा दाने-दाने के लिए मोहताज हो गये थे और आखिरकार बुधवार को उसकी मौत हो गयी थी. प्रभात खबर में खबर प्रकाशित होने के बाद सोमवार को दिन भर लोगों के बीच इसकी चर्चा होती रही. लोग मैसा की मौत से आहत रहे, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की. इस मामले में पूछने पर बोरियो प्रखंड के बीडीओ गौतम कुमार भगत ने रटे-रटाये अंदाज में कहा कि मामले की जांच की जा रही है. जांच रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई की जायेगी. गौरतलब है कि स्थानीय प्रशासन ने अपनी अनुशंसा सूची में मैसा को मृत घोषित कर दिया था जिसके कारण उसकी आजीविका का एक मात्र आधार वृद्धा पेंशन अप्रैल 2013 से बंद हो गया था. अब सवाल है कि क्या मैसा को जिंदा रहते हुए मृत घोषित करने वाले सरकारी बाबुओं पर कार्रवाई होगी ? आखिर यह तय हो पायेगा कि मैसा की मौत का जिम्मेवार कौन है ? क्या मैसा टीबी का मरीज थामैसा के गांव के लोगों का कहना है कि वह लंबे समय समय से बीमार था. कभी-कभार लोगों ने उसे दवा का सेवन करते भी देखा. लेकिन इस बारे में जब स्थानीय सीएचसी में पता किया गया तो कोई जानकारी नहीं मिली. अप्रैल 2015 में लगायी थी पेंशन चालू करने की गुहार मृतक मैसा पहाड़िया ने अपने पेंशन बंद हो जाने के एक वर्ष बाद सदर एसडीओ जितेन्द्र कुमार देव को आवेदन देकर बंद पेंशन को चालू कराने की गुहार लगायी थी. मैसा ने एसडीओ को दिये आवेदन में लिखा था कि मैं पहाड़ि जनजाति का अत्यंत गरीब आदमी हूं. मुझे नियमित रूप से वृद्धा पेंशन मिलता था लेकिन 2013 से मेरा पेंशन बंद हो गया. इस कारण मुझे काफी परेशानी हो रही है. बचपन में अकेले गांव आया था मैसाबोरियो प्रखंड के बिरबल कांदर देव पहाड़ के केशव पहाडि़या ने बताया कि पुराने लोग कहते थे कि मैसा पहाडि़या बचपन में ही अकेले देव पहाड़ गांव आया था. उसका ना तो कोई परिवार था ना ही उसने शादी की थी. वह काफी शांत स्वभाव का व्यक्ति था. सभी के साथ मिलजुल कर रहता था. कहते हैं ग्रामीणफोटो नं 7 एसबीजी 24 हैं.कैप्सन: गोगो पहाड़िनमैसा पहाड़िया भोजन मांगकर अपना जीवन यापन करता था. कई दिनों से वह बीमार था. बुधवार की सुबह मुझ से पीने का पानी मांगकर पिया. उसी दिन उसकी मृत्यु हो गई. फोटो नं 7 एसबीजी 21 हैं.कैप्सन: छोटा गुलीबेसहारा होने के कारण मैसा पहाड़िया भीख मांग कर गुजारा करता था.फोटो नं 7 एसबीजी 22 हैं.कैप्सन: पूसा पहाड़िया उसका कोई नहीं था तो केशव के यहां रहकर गांव के लोगों से भोजन एवं अन्य चीजें मांग कर जीवन यापन करता था. फोटो नं 7 एसबीजी 23 हैं.कैप्सन: मदिया पहाड़िया मैसा को गांव के लोग चिपडो के निाम से जानते थे उसका कोई वशंज नहीं था. कई दिनों से वह बीमार था. क्या कहते है बीडीओ बोरियो बीडीओ सह अंचलाधिकारी गौतम भगत ने कहा कि कर्मचारी को बिरबल कांदर के देव पहाड़ भेज कर यह पता कराया जा रहा है कि मैसा की मौत कैसे हुई. कहते हैं बोरियो विधायकइस मामले की विस्तृत जानकारी के लिए पार्टी स्तर पर एक टीम का गठन करेंगे. टीम पूरे मामले की जांच करेगी. जहां तक प्रशासनिक लापरवाही की बात है तो यह जांच का विषय है.

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