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प्रवचन :: मनुष्य चेतन अवस्था में सो जाता हैस्वप्रेरित चिकित्सा पर छ: खंडों के अपने ग्रंथ में शुल्ज ने विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त अनेक रोगियों का उदाहरण देते हुए अपने अनुभव लिखें हैं. उपर्युक्त ग्रंथ में स्वप्रेरित प्रशिक्षण का प्रयोग ऐसे व्यक्तियों पर भी किया जाने का उल्लेख है जो बीमार तो नहीं थे परंतु खेल-कूद, अंतरिक्ष यात्रा तथा सार्वजनिक सभाओं में भाषण देने के कार्यों में लगे थे. ऐसे लोगों के लिए शरीर और मन का तनावरहित होना अत्यंत महत्वपूर्ण है.सम्माेहन, आत्मसम्मोहन तथा ध्यान की तकनीकों की तरह स्वप्रेरित प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रत्याहार, हल्की मूर्च्छावस्था प्राप्त करना तथा इंद्रियों को विषयों से हटाना है. व्यक्ति अपने अचेतन में गहरी छलांग लगाकर उसकी गतिविधियों को देख सकता है. इस अवस्था में स्वयं की चेतना, सामान्य चेतना से भिन्न हो है. यहां व्यक्ति अपने भीतर होने वाले परिवर्तनों के प्रति सचेत रहता है. जबकि चेतन अवस्था में वह सो जाता है. इसमें व्यक्ति शारीरिक प्रक्रियाओं तथा भावनाओं के प्रति कहीं अधिक सावधान रहता है.
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