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कैंसर और डायबिटीज में भी कारगर है योग, रांची में बोले पद्मश्री डॉ नागेंद्र

Updated at : 24 Jul 2023 7:24 PM (IST)
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कैंसर और डायबिटीज में भी कारगर है योग, रांची में बोले पद्मश्री डॉ नागेंद्र

कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों में भी योग कारगर है. लोगों को योग को अपनी जीवनशैली में शामिल करना चाहिए. निरंतर योग करने से हम अंदर से मजबूत होंगे और कभी बीमार नहीं पड़ेंगे. पढ़िए, क्या कहते हैं योगश्री और पद्मश्री डॉ नागेंद्र.

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स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान (एस-व्यासा) के संस्थापक और मौजूदा समय में इसके कुलाधिपति डॉ एचआर नागेंद्र किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग सलाहकार के रूप में भी जाना जाता है. देश-विदेश में योग पर हुए अनुसंधानों में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार ने योगश्री और पद्मश्री से नवाजा है. डॉ नागेंद्र इंडियन योगा एसोसिएशन (आइवाइए) के ‘झारखंड चैप्टर’ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रांची पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने लोगों के जीवन में योग और आनवोले समय में इसके महत्व पर प्रभात खबर के दुष्यंत तिवारी से विशेष बातचीत की. आप भी पढ़ें उनका पूरा इंटरव्यू.

  • हमारी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पश्चिमी देशों से प्रेरित, सारी समस्याएं इसी की वजह से, सभी योग को अपनायें

  • लोग योग को गंभीरता से लें, इसको ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए इसका व्यवसायीकरण जरूरी

  • आइवाइए के ‘झारखंड चैप्टर’ के कार्यक्रम में शामिल रांची पहुंचे थे एस-व्यासा के संस्थापक डॉ नागेंद्र

मेकेनिकल इंजीनियर होते हुए अचानक योग की तरफ मुड़ जाना क्या यह महज संयोग है?

वर्ष 1965-66 में मैं मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट कर रहा था. तब मैंने खुद से सवाल किया कि मैं जो कर रहा हूं, क्या वह मुझे सही दिशा में लेकर जायेगा? उस समय हमारे प्रोफेसर सत्यनारायण शास्त्री मेरे मार्गदर्शक बने. उन्होंने योग के वैज्ञानिक पहलू से मेरा परिचय कराया. मैकेनिकल इंजीनियरिंग के शोध को जारी रखते हुए मैंने संस्कृत की शिक्षा ली, उपनिषदों का ज्ञान अर्जित किया और योग की साधना कराने लगा. समय के साथ आभास हो गया कि जीवन जीने का यही सही मार्ग है.

आप एस-व्यासा के संस्थापक हैं. योगश्री और पद्मश्री से सम्मानित हैं. इसके आगे की यात्रा के बारे में बतायें?

योग को पूरी दुनिया में फैलाना मेरा एक मात्र लक्ष्य है. विशेष कर स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में योग का विस्तार करना है. हमारी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पश्चिमी देशों से प्रेरित है. नतीजतन आतंकवाद, गन कल्चर, तनाव, अशांति, नशापान, बीमारियां बढ़ रही हैं. अमेरिका इसका उदाहरण है. योग को जब तक हम अपनी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनायेंगे, ये समस्याएं बनी रहेंगी.

प्रधानमंत्री को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का सुझाव आपने दिया था या उन्होंने आपसे लिया था?

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 से हुई. जबकि, पुर्तगाल के अमृत सूर्यानंद जी इससे भी पहले से पुर्तगाल में हर वर्ष 21 जून को ‘योग दिवस’ मनाया करते थे. अमृत सूर्यानंद जी ने ही सबसे पहले मुझसे कहा था कि मैं प्रधानमंत्री से इस विषय पर बात करूं. मेरे आग्रह पर प्रधानमंत्री ने जब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव यूएनओ में रखा, तो आश्चर्यजनक रूप से 178 देशों ने इसका समर्थन किया. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री को ही जाता है. मोदी जी ने खुद भी योग को पूरी तरह से आत्मसात कर लिया है. वे चार घंटे ही सोते हैं. रोजाना सुबह एक घंटे 6:00 बजे से 7:00 बजे तक योग करते हैं.

योग के जरिये मधुमेह को नियंत्रित करने को लेकर केंद्र सरकार के साथ आप किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं?

बेहतर हो कि हम बीमार ही न पड़ें. मैंने नीति आयोग को सुझाव दिया है कि ऐसी स्वास्थ्य योजना बनाएं, जिससे लोगों को बीमार होने से बचने के लिए जागरूक किया जाये. स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन जी ने मेरे सुझाव का समर्थन किया और पूरे देश में आज 1.5 लाख से ज्यादा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर शुरू किये जा चुके हैं. यहां लोगों को योग के माध्यम से स्वस्थ और निरोग रहने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

योग के जरिये कैंसर के इलाज पर शोध चल रहा है. क्या यह आधुनिक इम्यूनोपैथी से ज्यादा कारगर साबित होगा?

अमेरिका के टेक्सास स्थित ह्यूस्टन स्थित कैंसर रिसर्च सेंटर के साथ हम पिछले 25 वर्षों से इस विषय पर काम कर रहे हैं. इसमें दोनों विषय शामिल हैं. पहला- कैंसर होने नहीं देना है. दूसरा- जिसे कैंसर हो गया, उसकी पीड़ा कैसे कम हो और वह कैसे जल्दी स्वस्थ हो. इसमें सफलता भी मिली है. जैसे ही वह संस्थान इस शोध के परिणाम की प्रामाणिकता पर मुहर लगा देगा, यह सार्वजनिक हो जायेगा.

योग का व्यवसायीकरण कितना उचित है?

लोग योग की विधा को गंभीरता से लें और प्रशिक्षित लोगों के जरिये यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे, इसके लिए इसका व्यवसायीकरण भी होना जरूरी है.

क्या बाबा रामदेव ने योग को सरल और सर्वग्राह्य बनाया?

बिल्कुल सही, बाबा रामदेव ने योग के माध्यम से पूरे देश को जागृत किया है. उनके योग शिविर में हजारों लोग तड़के पांच बजे पहुंच जाया करते थे.

योग की गुणवत्तापूर्ण योग की शिक्षा के लिए एस-व्यासा क्या कर रहा है?

एस-व्यासा की 300 शाखाएं पूरे देश में कार्यरत हैं. इसके अलावा हमारे प्रशिक्षित विद्यार्थी देश के विभिन्न हिस्सों में योग का प्रशिक्षण दे रहे हैं. रांची में वर्ष 1978 से आइआइसीएम में हमारे प्रशिक्षक लोगों को योग सिखा रहे हैं. इसके अलावा मेरी सलाह पर आयुष मंत्रालय ने ‘योगा सर्टिफिकेशन बोर्ड’ का गठन किया है. इसके तहत कहीं से भी योग प्रशिक्षण लेने वाले लेवल -1 से लेकर लेवल -8 तक की परीक्षा देकर सर्टिफिकेट हासिल कर सकते हैं. इसके लिए उम्र और शिक्षा की बाध्यता नहीं है.

मौजूदा समय में आप किस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं?

हमने मधुमेह की रोकथाम पर काम किया. उसके बाद कैंसर को लेकर प्रोजेक्ट शुरू करने वाले थे, लेकिन प्रधानमंत्री जी ने निर्देश दिया कि इस बार हाइपरटेंशन पर काम करना है. इसलिए फिलहाल हम इसी को लेकर जगरूकता और प्रशिक्षण अभियान चला रहे हैं.

रांची के बारे में क्या कहना चाहेंगे?

रांची मुझे बहुत पसंद है. इस शहर से मेरा पुराना नाता है. बेंगलुरु और रांची का मौसम एक जैसा है. पहली बार मैं यहां वर्ष 1977 में आया था. तब से लगातार यहां आ रहा हूं. इंडियन योगा एसोसिएशन का झारखंड चैप्टर और इससे जुड़े सदस्य बेहद प्रभावी ढंग से योग के प्रचार प्रसार में जुटे हुए हैं. यहां की टीम बेहतर काम कर रही है. उम्मीद है कि इसकी वजह से यहां फिर आने का मौका मिलेगा.

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