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रांची में उर्दू सम्मेलन, सुभाषिनी बोलीं- उर्दू की तरक्की के लिए विचार करने की जरूरत

Updated at : 16 Feb 2025 9:58 PM (IST)
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urdu conference in ranchi jharkhand

उर्दू सम्मेलन को संबोधित करते डॉ इरफान अंसारी. फोटो : कौशिक

Urdu Conference Ranchi: रांची में आयोजित उर्दू सम्मेलन में पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा है कि उर्दू की तरक्की के लिए विचार करने की जरूरत है.

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Urdu Conference Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में उर्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस अवसर पर पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि उर्दू को किस तरह उसके मुकाम तक पहुंचाया जाये, इस पर विचार करने की जरूरत है. उर्दू को मुसलमानों की जुबान समझना बड़ी गलतफहमी है. इसे मुसलमानों ने जन्म नहीं दिया. जुबान की तरक्की के लिए इसे आर्थिक व्यवस्था से जोड़ने की जरूरत है. उर्दू भाषा को जनप्रिय बनाना होगा. वह रविवार को पुरानी विधानसभा के सभागार में अंजुमन तरक्की उर्दू द्वारा आयोजित प्रथम उर्दू राज्य सम्मेलन में अतिथि के रूप में बोल रहीं थीं. उन्होंने कहा कि उर्दू साहित्य का अन्य भाषाओं में अनुवाद जरूरी है. इसे जन-जन तक पहुंचाना होगा.

झारखंड में सभी भाषाओं की पढ़ाई हो : इरफान अंसारी

इस अवसर पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि उर्दू के प्रति आप लोगों ने जो एकता दिखायी है, उससे सरकार को सोचने पर मजबूर होना होगा. वह सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे. उन्होंने कहा कि उर्दू सबकी जुबान है. यह किसी धर्म विशेष की भाषा नहीं है. राज्य में सभी भाषाओं की पढ़ाई हो और इसके लिए उनका विद्यालय हो. उन्होंने कहा कि जो भी मांगें हैं, उसे पूरा कराने में वह हरसंभव सहयोग करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि सत्र के दौरान प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से मिलवाकर उनकी मांगों से अवगत करायेंगे.

जालिब वती की पुस्तक ‘उड़ान’ का विमोचन

पहले सत्र की अध्यक्षता अंजुमन तरक्की उर्दू के राष्ट्रीय सचिव अतहर फारूकी ने की. इस सत्र में संयोजक रिपोर्ट सम्मेलन के संयोजक एमजेड खान ने प्रस्तुत की. इस रिपोर्ट में अंजुमन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी. इस सत्र में जालिब वतनी की पुस्तक ‘उड़ान’ का विमोचन किया गया. कार्यक्रम में सुशील साहिल-गोड्डा, मुफ्ती सईद आलम-गिरिडीह, हसन निजामी-धनबाद, जफरुल्लाह सादिक-हजारीबाग और जमशेद कमर ने भी अपनी बातें रखीं.

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रेहाना अली ने उर्दू में पढ़ी भारतीय संविधान की प्रस्तावना

भारतीय संविधान की प्रस्तावना उर्दू भाषा में डॉ रेहाना अली ने प्रस्तुत की. दूसरे सत्र में सांसद महुआ माजी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि उर्दू और हिंदी का रिश्ता मां और मौसी का है.

उर्दू से संबंधित 13 प्रस्ताव पारित

दूसरे सत्र की अध्यक्षता डॉ यासीन अंसारी ने की और संचालन एमजेड खान ने किया. इस कॉन्फ्रेंस में 22 जिले के प्रतिनिधि शामिल हुए. मौके पर उर्दू से संबंधित 13 प्रस्ताव पारित किये गये. इसमें साहित्य एवं उर्दू अकादमी का गठन, उर्दू सेल, उर्दू निदेशालय का गठन, उर्दू शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति सहित अन्य मुद्दे शामिल थे. कॉन्फ्रेंस में पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला, उर्दू और हिंदी के लेखक वीना श्रीवास्तव, अपराजिता, एमएल सिंह, केके सिंह, सुशील साहिल, रेहाना, नजमा नाहिद, आलम आरा, फरहत जहां, शाजिया शबनम, डॉ अंजार, शकील, शोएब और कनक चौधरी सहित अन्य उपस्थित थे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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