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तीन-चार से वर्षों से नहीं मिला पैसा, दो हजार पंचायत स्वयंसेवकों ने छोड़ा काम

Updated at : 29 May 2024 6:41 PM (IST)
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तीन-चार से वर्षों से नहीं मिला पैसा, दो हजार पंचायत स्वयंसेवकों ने छोड़ा काम

राज्य की सभी पंचायतों में कार्यरत पंचायत सचिवालय स्तरीय स्वयंसेवकों को चार वर्षों से मानदेय नहीं मिला है. न ही उनकी किसी तरह की मांगें पूरी हो रही है. ऐसे में दो हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने काम छोड़ दिया है.

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रांची. राज्य की सभी पंचायतों में कार्यरत पंचायत सचिवालय स्तरीय स्वयंसेवकों को चार वर्षों से मानदेय नहीं मिला है. न ही उनकी किसी तरह की मांगें पूरी हो रही है. ऐसे में दो हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने काम छोड़ दिया है. काम छोड़ कर वे दूसरे कार्यों में लग गये हैं. इस तरह राज्य में कुल 17380 स्वयंसेवकों में से करीब 15 हजार स्वयंसेवक ही बचे हैं, हालांकि करीब 4500 स्वयंसेवकों ने काम छोड़ा था, लेकिन हाल में सरकार ने 2500 प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी. इसे बाद से इसमें से करीब 2500 स्वयंसेवक काम पर लौट गये, लेकिन करीब दो हजार स्वयंसेवक दूसरे कार्यों में चले गये. जानकारी के मुताबिक स्वयंसेवकों को तीन से चार वर्षों से पैसा नहीं मिल रहा है. सरकार ने उन्हें काम के एवज में प्रोत्साहन राशि दे रही थी. यह राशि तय नहीं थी. अब जाकर सरकार ने मासिक राशि तय कर दी है. वहीं स्वयंसेवकों का पदनाम सहायक कर दिया है. इन दोनों कारणों की वजह से 2500 काम पर लौटे हैं.

क्या काम है स्वयंसेवकों का

स्वयंसेवकों ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना का कार्य देखते हैं. आवास योजना की मॉनिटरिंग उनके जिम्मे हैं. आवास के कार्यों को लेकर वे इसकी रिपोर्ट ऊपर देते हैं. वहीं, जियो टैगिंग का कार्य भी उनके माध्यम से होता है. ग्रामीण इलाकों में सभी तरह की पेंशन की भी जिम्मेवारी स्वयंसेवकों की है. वृद्धावस्था पेंशन, निशक्तों की पेंशन, विधवा पेंशन के लिए फॉर्म भरवाने की जिम्मेवारी उनकी है. मनरेगा के तहत बकरी शेड और डोभा आदि के निर्माण में भी उनकी भूमिका है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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