विकास कार्यों से आदिवासी संस्कृति और पर्यावरण प्रभावित न हो

Updated at : 24 May 2024 11:41 PM (IST)
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विकास कार्यों से आदिवासी संस्कृति और पर्यावरण प्रभावित न हो

एडीबी की बैठक में शामिल हुए आदिवासी प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया है कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों से स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण प्रभावित नहीं होना चाहिए.

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रांची़ एडीबी की बैठक में शामिल हुए आदिवासी प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया है कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों से स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण प्रभावित नहीं होना चाहिए. हाल ही में रांची के गुंजल इकिर मुंडा और विनीत मुंडू थाईलैंड में एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की दो दिवसीय बैठक में शामिल होकर वापस लौटे. थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में 16-17 मई को बैठक हुई. जिसमें एशिया के कई देशों के आदिवासी प्रतिनिधि मौजूद थे. एडीबी की ओर से आयोजित बैठक का उद्देश्य था कि जिन देशों में बैंक की ओर से आदिवासी क्षेत्रों में विकास योजनाओं के लिए राशि दी जा रही है, उसका सही क्रियान्वयन हो. साथ ही विकास योजनाओं के लिए बैंक की नीतियों को ऐसा बनाया जाये, जिससे कि उसका अधिकतम लाभ आदिवासी क्षेत्रों को मिले. इस मुद्दे पर उपस्थित आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों से सुझाव मांगा गया था.

रैयत को जमीन लिये जाने की पूर्व सूचना मिले

गुंजल इकिर मुंडा ने बताया कि प्रतिनिधियों की ओर से कई सुझाव दिये गये. जैसे विकास कार्य के कारण किसी रैयत की जमीन जाती है, तो उसको इसके बारे में पूर्व सूचना देनी होगी और वह भी स्थानीय भाषा में. आदिवासी प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि अगर बैंक की ओर से योजना में निवेश किया जा रहा है और उससे स्थानीय लोग खुश नहीं हैं, तो लोगों के पास इसकी शिकायत या विरोध करने का हक होना चाहिए.

पैसे के स्रोत के बारे में जानकारी हो

इसके अलावा लोगों को पैसे के स्रोत के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए कि विकास पर पैसा सरकार खर्च कर रही है या फिर उसे कहीं और से फंडिंग हो रही है. एक अहम सुझाव यह भी था कि विकास योजनाओं के बारे में असेसमेंट में स्थानीय लोग भी शामिल हों. गुंजल ने कहा कि हम लोगों ने इस पर भी जोर दिया कि विकास योजनाओं में अनुमति वास्तविक और पारंपरिक ग्राम सभा से ही मिले. कई बार फर्जी ग्राम सभा बनाकर योजनाओं को हरी झंडी दिला दी जाती है.

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