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राज्य में कम हुए जंगल और वन्य जीव, विलुप्ति के कगार पर पहुंचा बाघ

Updated at : 26 Aug 2025 1:02 AM (IST)
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राज्य में कम हुए जंगल और वन्य जीव, विलुप्ति के कगार पर पहुंचा बाघ

राज्य के वृक्षों वाले वन क्षेत्र (फॉरेस्ट लैंड) और वन्य जीव (वाइल्ड एनिमल) की संख्या में कमी दर्ज की गई है.

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रांची. राज्य के वृक्षों वाले वन क्षेत्र (फॉरेस्ट लैंड) और वन्य जीव (वाइल्ड एनिमल) की संख्या में कमी दर्ज की गई है. विधानसभा में पेश की गयी महालेखाकार की रिपोर्ट में वर्ष 2017 से 2021 के बीच फॉरेस्ट लैंड में कमी होने के तथ्यों को उजागर किया है. कहा है कि झारखंड में वन और वन्य जीव संरक्षण की योजनाओं में गंभीर लापरवाही हुई है. यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाये गये, तो वन्य जीवन और विशेषकर बाघों की प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर पहुंच जायेगी.

खाली पड़ी वन भूमि में हुई वृद्धि

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2017 के मुकाबले वर्ष 2021 में वृक्षों वाले वन क्षेत्र में 2.60 प्रतिशत की कमी पायी गयी है. जबकि खाली पड़े फॉरेस्ट लैंड में 13.51 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. वन क्षेत्र में कमी की वजह फॉरेस्ट लैंड जैसे पारिस्थितिकी व संवेदनशील क्षेत्रों में क्षेत्रीय मास्टर प्लान के तहत काम ना होना, सुरक्षा की अपर्याप्त व्यवस्था और संरक्षण के उपायों पर काम नहीं करना है. इसके साथ ही विभाग में कर्मचारियों की कमी, फंड का उचित खर्च नहीं होना, समय पर काम पूरा नहीं किये जाने समेत अन्य वजहों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है.

पीटीआर में पाया गया केवल केवल एक बाघ

सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक पीटीआर में बाघों की आबादी विलुप्त होने के कगार पर हैं. वर्ष 2000 से 2005 के बीच पलामू टाइगर प्रक्षेत्र (पीटीआर) में 34 से 46 बाघ थे. जो लगातार कम होते चले गये. वर्ष 2022 में पीटीआर में केवल एक बाघ पाया गया. बताया गया है कि बाघों की संख्या में कमी का अनुमान शिकार के आधार पर लगाया गया है. वर्ष वर्ष 2012-13 के दौरान पीटीआर में अनुमानित शिकार की संख्या 85,666 थी. जो वर्ष 2022-23 में कम होकर केवल 4,411 हो गयी. रिपोर्ट में बाघों की संख्या में आयी कमी की मुख्य वजह इसे ही बताया गया है.

जानवरों की गिनती करने में लापरवाह है वन विभाग

महालेखाकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्य जीवों की आबादी में कोई सुधार नहीं हुआ है. राज्य में जंगली जानवरों के लिए सुरक्षित स्थान का निर्माण नहीं किया गया. मांसहारी जानवरों के शिकार में कमी और शाकाहारी जानवरों के लिए पर्याप्त चारागाह की व्यवस्था नहीं होने की वजह से भी वन्य जीवों की संख्या में कमी आयी है. आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2017-18 में राज्य के अंदर वन्य जीवों की कुल संख्या 20,028 थी. जो वर्ष 2020-21 में घटकर 19,882 हो गई. वर्ष 2018-19 में जंगली जानवरों की संख्या में 7,660 की कमी पायी गयी थी. यह कमी कुल जंगली जानवरों का 38 प्रतिशत थी. हालांकि, वर्ष 2020-21 में जंगली जानवरों की संख्या में 64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी. यानी, राज्य के जंगली जानवरों की संख्या 7,778 बढ़ गयी. सीएजी ने कहा है कि आंकड़ों में बड़े पैमाने का यह अंतर बताता है कि जानवरों की गिनती करने में विभाग लापरवाह है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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