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झारखंड: टाटा मोटर्स के बाइसिक्स कर्मचारियों को स्थायीकरण का तोहफा, 900 कर्मचारी होंगे स्थायी

Updated at : 25 Jan 2024 12:24 PM (IST)
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झारखंड: टाटा मोटर्स के बाइसिक्स कर्मचारियों को स्थायीकरण का तोहफा, 900 कर्मचारी होंगे स्थायी

जमशेदपुर के टाटा मोटर्स प्लांट के 900 बाइसिक्स कर्मचारियों को गुरुवार को स्थायीकरण का तोहफा मिला. श्रमायुक्त कार्यालय रांची में बाइसिक्स कर्मचारियों के स्थायीकरण और वार्ड रजिस्ट्रेशन जारी रखने पर टाटा मोटर्स प्रबंधन और टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के बीच ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुआ.

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जमशेदपुर, अशोक झा: जमशेदपुर के टाटा मोटर्स प्लांट के बाइ सिक्स कर्मचारियों को गुरुवार को स्थायीकरण का तोहफा मिला. 900 कर्मचारी स्थायी होंगे. श्रमायुक्त कार्यालय रांची में बाइसिक्स कर्मचारियों के स्थायीकरण और वार्ड रजिस्ट्रेशन जारी रखने पर टाटा मोटर्स प्रबंधन और टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के बीच ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुआ. श्रमायुक्त संजीव कुमार बेसरा, उप श्रमायुक्त राकेश प्रसाद की मौजूदगी में त्रिपक्षीय समझौते पर टाटा मोटर्स के वाइस प्रेसिडेंट विशाल बादशाह, प्लांट हेड रवींद्र कुलकर्णी, एचआर हेड मोहन गंटा सहित कंपनी के अन्य आला अधिकारियों और टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन की ओर से अध्यक्ष गुरमीत सिंह तोते और महामंत्री आरके सिंह सहित अन्य ऑफिस बियररों ने समझौते पर हस्ताक्षर किया.

900 बाइसिक्स कर्मचारी किए जाएंगे स्थायी

रांची में हुए समझौते के बाद टाटा मोटर्स के 900 बाइसिक्स कर्मचारी स्थायी किए जाएंगे. अब कर्मचारी पुत्र तीन साल का फुल टर्म अप्रेंटिस (एफटीए) की ट्रेनिंग करेंगे. इसके बाद दो साल डिप्लोमा कर कंपनी में स्थायी तौर पर बहाल होंगे. कर्मचारी पुत्रों की बहाली अफसर ग्रेड भी होगी. प्रबंधन और यूनियन के बीच बाइ सिक्स कर्मचारियों के स्थायीकरण के बाद आगे भी कर्मचारी पुत्र-पुत्रियों की बहाली के लिए बातचीत कर रास्ता निकलने में टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के नेता सफल रहे. अब कर्मचारी पुत्रों को रजिस्ट्रेशन के समय ही पता चल जायेगा कि वे कंपनी में कब स्थायी होंगे. पहले उन्हें सीधे बाइ सिक्स में नियोजित किया जाता था, बाद में प्रबंधन और यूनियन ने मिलकर डायरेक्ट अस्थायी कर्मियों की जगह टीएमएसटी (टाटा मोटर्स स्किल ट्रेंनग) के जरिए नियोजन देने लगी.

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पहली बार 1972 में हुआ था त्रिपक्षीय समझौता

संयुक्त बिहार के समय टेल्को ( अब टाटा मोटर्स ) के कर्मचारियों के बच्चों की बहाली को लेकर वर्ष 1972 में त्रिपक्षीय समझौता हुआ था. समझौते में तय हुआ था कि कंपनी प्रतिवर्ष कर्मचारी पुत्रों को प्रशिक्षण देकर नियोजित करेगी. इसके बाद से कंपनी में कर्मचारियों के बच्चों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हुई.

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समझौते पर हुआ था 2005-2006 में संशोधन

2005-2006 में तत्कालीन श्रमायुक्त निधि खरे की अध्यक्षता में संशोधन हुआ. तय हुआ कि टीएमएसटी पुल के माध्यम से कंपनी प्रबंधन प्रतिवर्ष 200 कर्मचारी पुत्रों को कंपनी में नियोजित करेगी.

टाटा मोटर्स में दुर्गापूजा में बोनस के साथ स्थायीकरण की चली आ रही परंपरा

जमशेदपुर टेल्को वर्कर्स यूनियन के पूर्व महामंत्री गोपेश्वर (स्वर्गीय) ने दुर्गापूजा (बोनस के साथ) से पूर्व बाइ सिक्स कर्मचारियों के स्थायीकरण की परंपरा शुरू करायी थी. उस परंपरा को गोपेश्वर के बाद चंद्रभान सिंह और प्रकाश कुमार और टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के महामंत्री आरके सिंह के कार्यकाल में भी ने आगे जारी रहा. कोरोना संक्रमण और आर्थिक मंदी के दौर में भी यह परंपरा जारी रही. जब पूरे देश में छंटनी का दौर चल रहा था. कोरोना काल में भी जमशेदपुर प्लांट में 221 बाई सिक्स स्थायी हुए थे.

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रांची जाने के लिए कमेटी मेंबर रिलीज

टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन, आरके सिंह फैंस क्लब के सदस्य भी गुरुवार को रांची में होने वाले समझौते में भाग लिया. सुबह 7 बजे सभी अपने-अपने वाहन से रांची रवाना हुए. कई बाइ सिक्स कर्मचारी भी रांची गए हुए थे.

16 जून 2023 को हाईकोर्ट ने सुनाया था फैसला

झारखंड हाईकोर्ट में टाटा मोटर्स के बाइ सिक्स कर्मी अफसर जावेद ने याचिका दाखिल की थी. 16 जून 2023 को झारखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने सुनवाई करते हुए जमशेदपुर उप श्रमायुक्त राकेश प्रसाद को आदेश दिया था कि वे दोनों पक्षों (टाटा मोटर्स) और याचिकाकर्ता को सुने. हाइकोर्ट के आदेश के बाद उप श्रमायुक्त राकेश कुमार ने दोनों पक्षों (टाटा मोटर्स) और याचिकाकर्ता को अपना-अपना पक्ष रखने को कहा. 5 सितंबर 2023 को टाटा मोटर्स प्रबंधन ने बॉम्बे उच्च न्यायालय की 252 पृष्ठों की आदेश की प्रति लेकर अपना पक्ष रखने के लिए समय लेकर सभी बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा. साथ ही अफसर जावेद ने भी 26 सितंबर 2023 को विस्तार से अपना पक्ष रखा.

31 दिसंबर तक डीएलसी ने मांगा था प्रस्ताव

उप श्रमायुक्त राकेश कुमार ने दोनों पक्षों से जवाब मिलने के बाद विश्लेषण के आधार पर फैसला सुनाया था कि ऑटोमोबाइल उद्योग की प्रकृति, रिक्तियों की संख्या और प्रबंधन की ओर से प्रतिवर्ष स्थायीकरण की दिशा में किये जा रहे प्रयासों को देखते हुए प्रबंधन तीन माह के अंदर बचे हुए सभी अस्थायी कर्मचारियों को यथाशीघ्र स्थायी करने के संबंध में एक योजना, पैकेज प्रस्तुत करें. ताकि अस्थायी कामगार शीघ्र स्थायी हो सकें. यह समय अवधि 31 दिसंबर 2023 तक थी.

2 जनवरी को कंपनी ने दिया था प्रस्ताव

उपश्रमायुक्त राकेश कुमार टाटा मोटर्स के लगभग 2700 बाइ सिक्स (अस्थायी) कर्मचारियों के स्थायीकरण को लेकर कंपनी प्रबंधन से प्रस्ताव ( योजना/ पैकेज) 31 दिसंबर तक मांगा था. 2 जनवरी को रांची में टाटा मोटर्स के वाइस प्रेसिडेंट विशाल बादशाह, टाटा मोटर्स के प्लांट हेड रवींद्र कुलकर्णी और एचआर हेड मोहन गंटा सहित अन्य वरीय अधिकारियों ने रांची जाकर झारखंड के श्रमायुक्त संजीव कुमार बेसरा को प्रस्ताव सौंपा.

जानें अब तक कितने हुए स्थायी

वित्तीय वर्ष : स्थायीकरण

2015-16 : 250

2016-17 : 301

2017-18 : 305

2018-19 : 306

2019-20 : 221

2020- 21 : 281

2021 – 22 : 201

2022 – 23 : 355

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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