Subhash Chandra Bose Jayanti 2021: आजादी के लिए झारखंड की महिलाओं ने नेताजी को दिए थे जेवर, जयपाल सिंह मुंडा ने भेंट की थी लाठी

Updated at : 23 Jan 2021 2:38 PM (IST)
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Subhash Chandra Bose Jayanti 2021: आजादी के लिए झारखंड की महिलाओं ने नेताजी को दिए थे जेवर, जयपाल सिंह मुंडा ने भेंट की थी लाठी

Subhash Chandra Bose Jayanti 2021, Jharkhand News, रांची न्यूज (अभिषेक रॉय) : नेताजी सुभाष चंद्र बोस का झारखंड की राजधानी रांची से गहरा लगाव था. रांची के लालपुर स्थित फनींद्रनाथ आयकत के पोते विष्णु आयकत ने अपने घर में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की यादों को आज भी सहेजकर रखा है. थड़पखना की महिला लीलावती (जगन्माता) ने नेताजी का स्वागत किया था. देश की आजादी के लिए सहयोग के रूप में महिलाओं ने अपने जेवर समर्पित किये थे, वहीं जयपाल सिंह मुंडा ने सुभाष चंद्र बोस को प्रतीक के रूप में लाठी भेंट की थी.

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Subhash Chandra Bose Jayanti 2021, Jharkhand News, रांची न्यूज (अभिषेक रॉय) : नेताजी सुभाष चंद्र बोस का झारखंड की राजधानी रांची से गहरा लगाव था. रांची के लालपुर स्थित फनींद्रनाथ आयकत के पोते विष्णु आयकत ने अपने घर में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की यादों को आज भी सहेजकर रखा है. थड़पखना की महिला लीलावती (जगन्माता) ने नेताजी का स्वागत किया था. देश की आजादी के लिए सहयोग के रूप में महिलाओं ने अपने जेवर समर्पित किये थे, वहीं जयपाल सिंह मुंडा ने सुभाष चंद्र बोस को प्रतीक के रूप में लाठी भेंट की थी.

रांची के लालपुर स्थित फनींद्रनाथ आयकत के पोते विष्णु आयकत ने अपने घर में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की यादों को अब भी सहेजकर रखा है. उन्होंने बताया कि कांग्रेस अधिवेशन के दौरान जब नेताजी घर आये थे, तब दादा फनींद्रनाथ आयकत ने उन्हें रिलैक्सिंग चेयर पर बैठाया था. आंगन में उसी कुर्सी पर बैठकर नेताजी घंटों विचार-विमर्श करते थे. घर में लोग उनसे मिलने आते थे. ऐसे में कई फोटो सेशन भी हुए. नेताजी का व्यक्तित्व उनके बैठने के अंदाज से झलकता था. लोग उनकी बातों का सम्मान करते थे. विष्णु ने कहा कि घर में रखी कुर्सी परिवार के लिए मंदिर के समान है.

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रांची यूनिवर्सिटी के बांग्ला विभाग के प्रो डॉ रामरंजन सेन ने नेताजी की रांची से रामगढ़ यात्रा पर पुस्तक ‘अनिर्वाण प्रेरणा’ लिखा है. इस पुस्तक में बताया गया है कि रामगढ़ में आयोजित 53वें कांग्रेस अधिवेशन से नेताजी कैसे बाहर आकर गरम दल की स्थापना की का व्याख्यान है. डॉ राम ने बताया कि 20 मार्च 1940 में गांधीजी के निर्देश पर अबुल कलाम आजाद ने रामगढ़ में राष्ट्रीय अधिवेशन का आह्वान किया था. अधिवेशन शाम 5:30 बजे की जगह 3:30 बजे हुई. ‘समझौता विरोधी आंदोलन अधिवेशन’ में हजारों शामिल हुए.

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आजाद हिंद फौज के चिकित्सक डॉ वीरेंद्र नाथ रॉय रांची के निवासी थे. 53वें कांग्रेस अधिवेशन के दौरान उनका रांची आगमन कई नौजवानों को प्रेरित करने के लिए काफी था. डॉ सेन ने अपनी पुस्तक में नेताजी की रांची में की गयी सभा का भी वर्णन है. नेताजी ने कचहरी रोड स्थित अब्दुल बारी पार्क (वर्तमान में समाहरणालय ब्लॉक ए के समीप) में सभा को संबोधित किया था. यहां उन्हें ‘नागरिक सम्मान’ से सम्मानित किया गया था.

नेताजी ने एचबी रोड स्थित लोहरदगा लॉज में भी बिहार-बंगाल की तत्कालीन राजनीतिक गतिविधियों पर चर्चा की थी. इसके बाद ही नेताजी ने गरम दल की स्थापना की घोषणा की. उस दौरान थड़पखना की महिला लीलावती (जगन्माता) ने नेताजी का स्वागत किया था. देश की आजादी के लिए सहयोग के रूप में महिलाओं ने अपने जेवर समर्पित किये थे. रांची भ्रमण के दूसरे दिन छोटानागपुर के समाजसेवी व जननेता जयपाल सिंह मुंडा के नेतृत्व में नेताजी ने मोरहाबादी मैदान में भी जनसभा को संबोधित किया था. जयपाल सिंह मुंडा ने सुभाषचंद्र बोस को प्रतीक के रूप में लाठी भेंट की थी. नेताजी ने सभा में मौजूद आदिवासी युवाओं और महिलाओं को स्वतंत्रता आंदोलन में आगे आने का आह्वान किया था.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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