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Scholarship Scam in jharkhand : झारखंड सरकार ने दिया अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की निगरानी जांच का आदेश

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
सरकार ने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति  घोटाले की निगरानी जांच का दिया आदेश
सरकार ने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की निगरानी जांच का दिया आदेश
प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची- सरकार ने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की निगरानी जांच का आदेश दिया है. इस आदेश के आलोक में वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2020-21 की अवधि में हुए प्री-मैट्रिक,पोस्ट-मैट्रिक और मेरिट कम मिंस स्कॉलरशिप में हुई गड़बड़ी की जांच निगरानी करेगी. इसके अलावा उपायुक्तों को वित्तीय वर्ष 2020-21 में हुई गड़बड़ी से संबंधित जांच कर फर्जी तरीके से ली गयी छात्रवृत्ति की वसूली करने और गड़बड़ी करनेवाले स्कूलों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का आदेश दिया गया है.

इस पूरे प्रकरण में राज्य सरकार की ओर से दो अगल-अलग आदेश जारी किये गये हैं. निगरानी महानिदेशक को भेजे गये पत्र में कहा गया है राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में हुई गड़बड़ी के सिलसिले में निगरानी जांच का फैसला किया है. गड़बड़ी के सिलसिले में विभिन्न समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित हुई हैं.

यह मामला सरकारी राशि के गबन से संबंधित है. विभाग की ओर निगरानी को छात्रवृत्ति के सिलसिले में प्रकाशित खबरों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता व अर्थशास्त्री ज्यांद्रेज द्वारा उपलब्ध करायी गयी सामग्री भी भेजी गयी है. इसमें विभिन्न जिलों में छात्रवृत्ति में हुई गड़बड़ी से संबंधित केस स्टडी और छात्रवृत्ति पानेवालों से हुई बातचीत की वीडियो रिकार्डिंग भी शामिल है.

ज्यां द्रेज द्वारा उपलब्ध करायी गयी सामग्रियों के आधार पर निगरानी को वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2020-21 तक की अवधि में प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और मेरिट कम मिंस स्कॉलरशिप की जांच का आदेश दिया गया है.

उपायुक्तों को फर्जी तरीके से ली गयी छात्रवृत्ति की वसूली करने व गड़बड़ी करनेवाले स्कूलों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का आदेश

15 दिसंबर तक जांच पूरी करने के निर्देश

कल्याण विभाग की ओर से सभी उपायुक्तों को वित्तीय वर्ष 2020-21 में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति भुगतान के मामलें में भौतिक सत्यापन करने का निर्देश दिया गया. उपायुक्तों को यह काम 15 दिसंबर तक पूरा करने के निर्देश दिये गये है, ताकि इस मामले में भारत सरकार द्वारा दिये गये निर्देश का पालन हो सके. भारत सरकार ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया है कि वह मामले की जांच करा कर यह सुनिश्चित करे कि वित्तीय वर्ष 2021-22 की छात्रवृत्ति में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो. सरकार के आदेश के आलोक में उपायुक्तों को 2020-21 में छात्रवृत्ति के सभी आवेदनों का भौतिक सत्यापन करना है. जिला शिक्षा अधीक्षक और जिला शिक्षा अधिकारी के दस्तावेज के आधार पर स्कूलों के आवेदन पर लिखे गये कोड (यूडीआइएसइ) का मिलान करना है.

रजिस्ट्रेशन रद्द होगा और वसूली होगी

स्कूलों की भौतिक स्थिति और आवेदन में वर्णित स्थिति का मिलान कर यह देखना है कि स्कूल में हॉस्टल और छात्रों की संख्या के मुकाबले क्लास रूम है या नहीं. कोविड-19 की अवधि में होस्टल बंद थे या नहीं. जिन स्कूलों या शिक्षण संस्थानों की ओर से अपनी भौतिक स्थिति का गलत ब्योरा दिया गया हो, उन स्कूलों और संस्थानों द्वारा नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर कराया गया रिजस्ट्रेशन रद्द करने की कार्रवाई होगी. जिन आवेदकों ने गलत ब्योरा देकर स्कॉलरशिप लिया हो उनसे राशि की वसूली की कार्रवाई होगी. अगर जांच के दौरान कोई स्कूल या संस्था ही फर्जी मिले तो उसके माध्यम से स्कॉलरशिप के लिए आवेदन देनेवालों की जांच नहीं की जायेगी. ऐसे सभी आवेदकों को फर्जी माना जायेगा. आवेदकों और संस्थानों की जांच के बाद संबंधित रिपोर्ट स्पष्ट अनुशंसा के साथ जिला कल्याण पदाधिकारी को भेजा जायेगा. जिला कल्याण पदाधिकारी इस रिपोर्ट के आधार पर नेशनल स्कॉलरशिक पोर्टल पर छात्रवृत्ति के आवेदकों का सत्यापन करेंगे. इस सत्यापन की समीक्षा जिले के कोई वरीय पदाधिकारी करेंगे.

posted by : sameer oraon

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