24 घंटे में क्लीन चिट देने वाले डीएसपी ही पीएमएलए कोर्ट से मंत्री आलमगीर को ले गये जेल

RANCHI-JHARKHAND STATE—16 MAY 2024-Jharkhand Cabinet Minister Alamgir Alam is being escorted out after PMLA court announced 6 Days judicial remand after arrested by Enforcement Directorate (ED) in connection of seizure of unaccounted Cash recovered from his personal assistant Sanjeev Lal's residence during ED raid in Ranchi on Thursday, May 16, 2024. Photo By-Rajesh Kumar PD1000208 Photojournalist C/O Sen Studio 15 Purulia Road Ranchi 834001, Jharkhand Mobile +91 9939889897 Mail-rajeshkumar.ranchi1@gmail.com
साहिबगंज के बरहरवा में टोल प्लाजा टेंडर से जुड़े केस में दिया था क्लीन चिट
रांची (वरीय संवाददाता). साहिबगंज के बरहरवा में टोल प्लाजा टेंडर से जुड़े केस में 24 घंटे के अंदर मंत्री आलमगीर आलम और विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को तत्कालीन डीएसपी पीके मिश्रा ने क्लीन चिट दिया था. वह अभी रांची के हटिया डीएसपी हैं. गिरफ्तारी के बाद इडी ने जब आलमगीर आलम को पीएमएलए कोर्ट में पेशी के लिए लाया, उस समय रांची पुलिस के वरीय पदाधिकारी के रूप में पीके मिश्रा वहां मौजूद थे. पीएमएलए कोर्ट द्वारा मंत्री को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश के बाद पीके मिश्रा कोर्ट से मंत्री को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार तक पहुंचाने गये. कोर्ट परिसर में भी डीएसपी की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई थी. हालांकि इससे पहले हटिया डीएसपी पीएमएलए कोर्ट में कभी नहीं दिखे. कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोय दिखते थे. लेकिन गुरुवार को वह चुनाव संबंधी किसी बैठक में रांची में शामिल हुए थे. शायद यही वजह रही कि हटिया डीएसपी को कोर्ट में तैनात किया गया. टोल प्लाजा का टेंडर लेने वाले ने करायी थी प्राथमिकी : साहिबगंज के बरहरवा में टोल प्लाजा का टेंडर लेने वाले शंभू नंदन नामक व्यक्ति ने बरहरवा थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा और मंत्री आलमगीर आलम के इशारे पर उनके साथ मारपीट की गयी थी. बावजूद इसके 24 घंटे में मामले का सुपरविजन कर तत्कालीन डीएसपी पीके मिश्रा ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया था. बाद में मामले के अनुसंधानकर्ता सरफुद्दीन खान ने भी इडी की पूछताछ में इसका खुलासा किया था. आरोप है कि नगर पंचायत बरहरवा में वाहन शुल्क की वसूली के लिए टेंडर निकाला गया था. टेंडर लेने में आलमगीर आलम के भाई की कंपनी भी शामिल हुई थी. कंपनी द्वारा एक फर्जी कंपनी बनाकर पांच करोड़ रुपये की बोली लगायी गयी थी. लेकिन फर्जी कंपनी द्वारा बोली का पैसा विभाग में जमा नहीं किया गया. बाद में आलमगीर के भाई ने दूसरी बोली लगाकर 1.46 करोड़ में टेंडर लेने का प्रयास किया. लेकिन शंभु नाथ ने 1.8 करोड़ की बोली लगाकर टेंडर हासिल कर लिया था. शंभु का आरोप था कि इसके बाद से ही कुछ लोग उनके पीछे पड़ गये थे. वे पंकज मिश्रा और आलमगीर आलम के लोग थे.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




