सऊदी से 3.5 महीने बाद रांची पहुंचा विजय का पार्थिव शरीर, परिजनों का शव लेने से इनकार

मृतक प्रवासी मजदूर विजय कुमार महतो की पत्नी (बाएं से दूसरी) के साथ परिजन. फोटो: प्रभात खबर
Ranchi News: सऊदी अरब में गोली लगने से मृत प्रवासी मजदूर विजय कुमार महतो का पार्थिव शरीर साढ़े तीन माह बाद रांची पहुंचा. रिम्स में शव रखा गया है, परिजनों ने मुआवजा नहीं मिलने पर शव लेने से इनकार किया. परिवार सरकार से आर्थिक सहायता की मांग कर रहा है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.
Ranchi News: गिरिडीह जिले में डुमरी के दूधपनिया गांव के रहने वाले प्रवासी मजदूर विजय कुमार महतो का पार्थिव शरीर साढ़े तीन माह बाद वतन (भारत) पहुंचा. 23 अक्टूबर 2025 को सऊदी अरब में पुलिस की गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी. सऊदी पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ दौरान वह चपेट में आ गये. रविवार की देर शाम विजय का शव रांची पहुंचा. रिम्स के शवगृह में उनका शव रखा गया था. पहले तो विजय के परिजनों ने रविवारको शव लेने से इनकार कर दिया है.
परिजनों की सहमति से आगे होगा काम: एसडीपीओ
डु्मरी के सीडीपीओ सुमित कुमार ने कहा कि परिवार के सदस्यों ने संबंधित दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़ा है. परिवार की सहमति के आधार पर ही पुलिस-प्रशासन काम करेगा. उन्होंने कहा कि इस विषय पर वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर निर्णय लिया जा रहा है. सब दस्तावेज रांची भेजा जा चुका है.
हुंडई में काम करते थे विजय
विजय हुंडई इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने सऊदी अरब गये थे. एशिया पावर नामक मैन पावर सप्लाई कंपनी के माध्यम से वह दुबई गये थे. घटना के बाद विजय के परिजन ने शव भारत लाने और कंपनी से मुआवजा को लेकर लगातार गुहार लगा रहे थे. राज्यपाल से भी मिलकर अपनी व्यथा सुनायी थी. मुख्यमंत्री, विदेश मंत्रालय और श्रमायुक्त को पत्र लिखकर मुआवजा की मांग की थी. विजय की पत्नी बसंती देवी गुहार लगा रही है.
मुआवजा दिलाने की पहल करे सरकार: परिजन
विजय के रिश्तेदार राम प्रसाद महतो ने प्रभात खबर के साथ बातचीत में कहा कि हमारे परिवार के साथ अन्याय हो रहा है. विजय के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं. इनका कोई सहारा नहीं बचा. घर में दूसरा कोई कमाने वाला नहीं है. अबतक मुआवजा को लेकर कंपनी के स्तर पर कोई प्रयास नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि तीन महीने तक हम शव को भारत लाने के लिए गिड़गिड़ाते रहे. लंबे इंतजार के बाद शव आया, लेकिन परिवार के सदस्यों को एक पैसा नहीं मिला है. सरकार मुआवजा दिलाने के लिए पहल करे.
पत्नी से जिंदगी के लिए गिड़गिड़ा रहा था विजय
गोली लगने के बाद विजय महतो ने आखिरी बार पत्नी बसंती से बात की थी. वाट्सऐप कॉल कर वह जिंदगी के लिए गिड़गिडा रहा था. विजय ने पत्नी को बताया था कि उसे कोई इलाज कराने नहीं ले जा रहा है. पूरी घटना की जानकारी पत्नी को दी थी. परिवार वालों का कहना है कि कंपनी विजय से अवैध काम करा रही थी.
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जयराम-अरूप ने विधानसभा में उठाया था मामला
विधानसभा में भी प्रवासी मजदूर विजय की मौत का मामला उठा था. डुमरी विधायक जयराम महतो और माले विधायक अरूप चटर्जी ने मामला उठाते हुए विजय महतो का शव भारत लाने की व्यवस्था करने और मुआवजा की मांग की थी. विधायकों का कहना था कि विजय के परिजनों को सरकार मुआवजा दिलाये.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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