रांची के ग्रामीण इलाकों की सरकारी दर 10% तक बढ़ी, जमीन-फ्लैट खरीदना हुआ महंगा

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स्टांप पेपर.

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रांची के ग्रामीण इलाकों में जमीन और घर खरीदना अब महंगा हो गया है. 1 अगस्त से सरकारी दरों में 10% की वृद्धि लागू होगी. इसका सीधा असर खरीदारों पर पड़ेगा, जिन्हें अधिक स्टाम्प शुल्क और कोर्ट फीस चुकानी होगी.

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रांची से राजीव पांडेय की रिपोर्ट

Ranchi Land Prices: रांची के ग्रामीण इलाकों जमीन और घर खरीदना महंगा होगा, क्योंकि इनकी कीमत एक अगस्त से बढ़ जायेगी. इस नयी दर पर जिला निबंधक सह उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने अपनी मुहर लगा दी है. आदेश के अनुसार दर में 10 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी की गयी है.यानी ग्रामीण क्षेत्र में भवन, फ्लैट और कच्चा और पक्का मकान खरीदना महंगा हो गया है. नयी दर के लागू होने के बाद गांवों में जमीन या घर की रजिस्ट्री कराने के लिए खरीदारों को अधिक स्टांप शुल्क और कोर्ट फीस देनी होगी. वहीं, कई मौजा में व्यावसायिक दरों में बढ़ोत्तरी नहीं की गयी है. नामकुम क्षेत्र में प्रति डिसमिल 27,000, कांके में 22,000, रातू में 24,000 की कीमतें बढ़ी है.

खरीदारों पर बढ़ेगा बोझ

हालांकि, सरकारी कीमत बढ़ने से एक तरफ सरकार का राजस्व तो बढ़ेगा लेकिन दूसरी तरफ खरीदारों की जेब पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा. नया वैल्यूएशन लागू होने के बाद रिंग रोड के आसपास और राष्ट्रीय राजमार्गों के अगल-बगल की जमीनों की कीमतें सबसे अधिक बढ़ रही है. ये सभी आरआरडीए क्षेत्र में आते है. इसमें कांके, ओरमांझी, नामकुम, नगड़ी, खिजरी, सिमलिया, झिरी, मेसरा, पिर्रा और अनगड़ा के दर्जनों गांव है.

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2024 में बढ़ी थीं ग्रामीण क्षेत्र के जमीन की कीमत

जमीन और फ्लैट की सरकारी कीमत को बाजार मूल्य के समतुल्य करने के लिए हर दो साल पर दोबारा से मूल्यांकन किया जाता है. ऐसे में एक साल ग्रामीण तो दूसरे साल शहरी क्षेत्र की जमीनों का मूल्यांकन होता है. रांची में इससे पहले वर्ष 2024 में ग्रामीण क्षेत्र की जमीन की कीमतें बढ़ायी गयी थी, इसलिए वर्ष 2026 में नये सिरे से वैल्यूएशन किया गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में डीलक्स अपार्टमेंट, आरसीसी छत और एस्बेस्टस वाले घरों की सरकारी कीमतों में भी बढ़ोतरी की गयी है.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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