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सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स का हाल : 12 से 15 साल पुरानी मशीनों के भरोसे न्यूरो सर्जरी विभाग का ओटी

Updated at : 01 Jul 2024 12:11 PM (IST)
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रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग का हाल. फोटो : प्रभात खबर

Ranchi News: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स का न्यूरो सर्जरी विभाग 12 से 15 साल पुरानी मशीनों के भरोसे चल रहा है. डॉक्टर व नर्सों का भी घोर अभाव है.

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Ranchi News|रांची, राजीव पांडेय : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) के न्यूरो सर्जरी विभाग में एक साल में लगभग 1800 मरीजों की सर्जरी हुई है. इसमें 250 ब्रेन ट्यूमर और 300 स्पाइन की सर्जरी शामिल हैं.

ओपीडी में हर दिन 150-200 मरीजों को परामर्श देते हैं डॉक्टर

रिम्स की ओपीडी में हर दिन 150 से 200 मरीजों को परामर्श दिया जाता है. डॉक्टरों की कमी के कारण सर्जरी और मरीजों को परामर्श देने में काफी परेशानी हो रही है. इसके अलावा विभाग के ओटी में जरूरी मशीनें 12 से 15 साल पुरानी हैं, जो बीच-बीच में खराब होती रहतीं हैं. ऐसे में इन मशीनों को तत्काल बदलने की जरूरत है.

3 डॉक्टरों के कारण इमरजेंसी सर्जरी को प्राथमिकता

विभाग में फिलहाल सिर्फ 3 डॉक्टर हैं. ऐसे में इमरजेंसी सर्जरी को प्राथमिकता देनी पड़ती है. वहीं, रूटीन सर्जरी के लिए मरीजों को रिम्स में 30 से 45 दिनों तक इंतजार करना पड़ता है. वर्तमान में इस विभाग के वार्डों में 140 बेड हैं, जबकि 225 मरीज भर्ती हैं. कई मरीज कॉरिडोर और दूसरे विभागों के वार्ड में भर्ती हैं.

ओपीडी में 4 दिन परामर्श देते हैं डॉक्टर, एक दिन बैठते हैं डायरेक्टर

विभाग में 4 दिन ओपीडी में मरीजों को परामर्श दिया जाता है. शनिवार को निदेशक सह न्यूरो सर्जन डॉ राजकुमार परामर्श देते हैं. विभाग में एक सीनियर चिकित्सक डॉ आनंद की यूनिट है, जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ गौतम दत्ता और डॉ सौरभ कुमार मिलकर मरीजों का इलाज और सर्जरी करते हैं. वहीं, 13 एकेडमिक सीनियर रेजीडेंट (पीजी स्टूडेंट) और दो नन एकेडमिक सीनियर रेजीडेंट हैं.

न्यूरो सर्जरी विभाग की ओटी के लिए नयी मशीन खरीदने लिए निविदा की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. आधारभूत संरचना को दुरुस्त करने के लिए संपदा विभाग की बैठक हो चुकी है. शीघ्र बाथरूम आदि की मरम्मत की जायेगी. फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए आवेदन निकाला गया है, जो प्रक्रिया में है.

डॉ राजीव कुमार, पीआरओ, रिम्स

नर्सिंग स्टाफ की कमी ने बढ़ायी परेशानी

आइसीयू में मरीजों की देखभाल के लिए जरूरत से कम नर्सिंग स्टाफ हैं. यहां 40 मरीजों की देखभाल का जिम्मा दो से तीन नर्सों पर है. इसके अलावा सिर्फ 2 ड्रेसर हैं. इस कारण कई मरीजों की समय पर ड्रेसिंग नहीं हो पाती है. अगर इस विभाग में एनएमसी का निरीक्षण हो जाये, यहां पीजी की सीटें घट सकती हैं.

वार्ड के बाथरूम में दरवाजा तक नहीं

न्यूरो सर्जरी विभाग के वार्ड में मामूली सुविधाओं का भी अभाव है. वार्ड में मरीजों की भीड़ की वजह से बेड को भी बेतरतीब तरीके से रखना पड़ रहा है. बाथरूम में दरवाजा तक नहीं है, जिससे मरीज और परिजनों को परेशानी होती है. कई वार्डों का बाथरूम जाम रहता है, जिससे परिजनों को दूसरे वार्ड में जाना पड़ता है.

विभाग में और दो ओटी की है जरूरत

न्यूरो सर्जरी विभाग में 2 ऑपरेशन थियेटर (ओटी) हैं. मरीजों की भीड़ को देखते हुए यहां और 2 ओटी की जरूरत है. इसका प्रस्ताव प्रबंधन को भेजा गया है. ओटी में जरूरी मशीनें काफी पुरानी हैं, जिन्हें बदलने की जरूरत है. माइक्रोस्कोप, बाइपोलर डायथर्मी मशीन और एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन की नयी मशीनें खरीदने की प्रक्रिया चल रही है. सी-आर्म मशीन के लिए निविदा निकाली गयी है, लेकिन सिर्फ एक कंपनी रुचि दिखा रही है. इसकी वजह से निविदा नहीं हो पा रही है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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