समस्याओं का निराकरण : झारखंड में अब गैरमजरूआ मालिक जमीन की कटेगी रसीद

Updated at : 17 Jul 2020 9:38 AM (IST)
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समस्याओं का निराकरण : झारखंड में अब गैरमजरूआ मालिक जमीन की कटेगी रसीद

गैरमजरूआ मालिक जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और लगान रसीद जारी करने में आ रही समस्याओं का निराकरण कर दिया गया है. अब एक जनवरी 1946 के पूर्व विक्रय पत्र, पट्टा, हुकुमनामा के आधार पर निबंधित वैसी जमीन, जो पंजी टू में गैरमजरूआ भूमि दर्ज है

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रांची : गैरमजरूआ मालिक जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और लगान रसीद जारी करने में आ रही समस्याओं का निराकरण कर दिया गया है. अब एक जनवरी 1946 के पूर्व विक्रय पत्र, पट्टा, हुकुमनामा के आधार पर निबंधित वैसी जमीन, जो पंजी टू में गैरमजरूआ भूमि दर्ज है, उसकी रसीद जारी हो सकेगी. इस तरह की जमाबंदीवाली जमीन पर निर्णय लेकर रसीद जारी करने का अधिकार अंचल कार्यालयों को दे दिया गया है. इसके लिए अभिलेख भूमि सुधार उपसमाहर्ता तथा अनुमंडल पदाधिकारियों के पास भेजने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि अंचल अधिकारी अपने स्तर से अभिलेखों व स्थल के भौतिक सत्यापन से संतुष्ट होकर अंतिम आदेश पारित कर सकेंगे.

पूर्व में जारी मैनुअल लगान रसीद के आधार पर अब गैरमजरूआ मालिक जमीन की ऑनलाइन लगान रसीद जारी करने की व्यवस्था की जायेगी. इस तरह अब अवैध या संदेहास्पद जमाबंदी के रूप में चिह्नित सारी जमीन की रसीद निर्गत होगी. अगर किसी मामले में सक्षम न्यायालय का आदेश हो या भविष्य में आदेश पारित हो, तो यह प्रभावित होगा. राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव केके सोन ने इससे संबंधित संकल्प जारी किया है.उन्होंने सारे उपायुक्तों को इससे अवगत करा दिया है.

ऑनलाइन रसीद जारी करने की व्यवस्था की जाये : सचिव

सचिव ने लिखा है कि ऐसे सारे मामले जिसमें किसी प्रकार की कार्यवाही के बिना भी लगान रसीद निर्गत करना रुका हुआ है, उन सभी मामलों में ऑनलाइन रसीद जारी करने की व्यवस्था की जाये. पूर्व में यह निर्देश दिया गया था कि अवैध या संदेहास्पद जमाबंदी की जांच के लिये खोले गये अभिलेखों पर अभियान चला कर निर्णय लिया जाये, लेकिन सरकार की अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं मिला. ऐसे में इस पर तेजी से निर्णय लेकर भूमि नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का भी निर्देश दिया. यदि नियमितीकरण संभव नहीं है, तभी जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई की जाये. यह स्पष्ट कर दिया गया है कि चिह्नित अवैध या संदेहास्पद जमाबंदी से संबंधित भूमि का रसीद काटने पर कोई रोक नहीं है.

सचिव ने लिखा है कि जिन मामलों में सक्षम प्राधिकार द्वारा भूमिहीन एवं सुयोग्य व्यक्तियों को नियमतः गैरमजरूआ खास भूमि की बंदोबस्ती या गृह स्थल बंदोबस्ती की गयी है, तो उन मामलों में बंदोबस्ती, पंजी, पट्टा एवं अन्य संबंधित अभिलेखों का सत्यापन तथा भौतिक सत्यापन अंचल अधिकारी करेंगे. अंचल अधिकारी पूर्णता संतुष्ट होकर आदेश पारित करेंगे और पंजी टू के मुताबिक ऑनलाइन इंट्री करेंगे. अगर ऐसे मामलों में जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई चल रही है, तो उसका निष्पादन भी उपरोक्त निर्देश के आलोक में किया जायेगा.

अभियान चला कर निर्देशों का अनुपालन करें अंचल अधिकारी

सचिव ने निर्देश दिया है कि जिन मामलों में बिहार भूमि सुधार अधिनियम की धारा 4, 5 व 6 के अंतर्गत बेलगाम भूमि का सक्षम प्राधिकार द्वारा लगान निर्धारण किया गया है, उन मामलों में बिहार भूमि सुधार अधिनियम की धारा-4 एच के अंतर्गत जमाबंदी रद्द करने के अभिलेख पर संतुष्ट होकर आदेश पारित किया जाये. सचिव ने सारे अंचल अधिकारियों से कहा है कि उक्त निर्देशों का अनुपालन अभियान चला कर किया जाये, ताकि प्रभावित लोगों को त्वरित गति से इसका लाभ मिल सके.

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावितों को तत्काल लाभ पहुंचाने और अनावश्यक रूप से परेशानियों से मुक्ति दिलाने के लिए यह निर्णय लिया गया है. सचिव ने लिखा है कि समय-समय पर इस तरह के मामलों में आ रही परेशानियों को लेकर सरकार और आला अधिकारियों को शिकायतें मिल रही थीं, इससे सरकार व विभाग की छवि खराब होती है. ऐसे में यह निर्णय लिया गया है कि सारे मामलों को सरलीकरण करते हुए तत्काल प्रभावितों को राहत पहुंचायी जाये.

भू राजस्व विभाग ने दी बड़ी राहत

राजस्व, निबंधन व भूमि सुधार विभाग के सचिव केके सोन ने संबंधित संकल्प जारी किया

अंचल अधिकारी अभिलेखों और स्थल के भौतिक सत्यापन से संतुष्ट हो पारित कर सकेंगे आदेश

निर्णय नहीं होने से लंबे समय से लोग थे परेशान

इस निर्णय से राज्य के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. सरकार के आदेश से अधिकतर गैरमजरूआ मालिक जमीन को अवैध या संदेहास्पद जमाबंदी की सूची में डाल दिया गया था. रसीद जारी होनी बंद हो गयी थी. सत्यापन भी धीमा था. ऐसे में लोग फंसे हुए थे. बिना रसीद के नक्शा पास कराने से लेकर लोन लेना, विक्रय करना सबकुछ बाधित था.

क्या है गैरमजरूआ मालिक जमीन

वैसी जमीन, जो विगत सर्वे में किसी भी रैयत को तत्कालीन जमींदार द्वारा बंदोबस्त नहीं की जा सकी, उसे ही गैरमजरूआ मालिक जमीन कहा जाता है.

Post by : Pritish sahay

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