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रांची में हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में बोले प्रियदर्शन, राजनीतिक हैसियत से तय होती है भाषाओं की ताकत

Updated at : 14 Sep 2022 9:50 AM (IST)
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रांची में हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में बोले प्रियदर्शन, राजनीतिक हैसियत से तय होती है भाषाओं की ताकत

रांची प्रेस क्लब में हिंदी दिवस (Hindi Diwas) पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस दौरान प्रख्यात पत्रकार व लेखक प्रियदर्शन ने ‘पत्रकारिता और हिंदी’ पर बोले. उन्होंने कहा कि भाषाओं की ताकत राजनीतिक हैसियत से तय होती है.

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Hindi Diwas 2022: भाषाओं की ताकत व्याकरण या शब्द संपदा से नहीं, बल्कि उनकी राजनैतिक हैसियत से तय होती है. जो भाषा रोटी, रोजगार और सत्ता में हिस्सेदारी देती है, वह भाषा अपनायी जाती है. यदि हिंदी को मजबूत देखना चाहते हैं, तो यह इसकी आर्थिक, राजनीतिक हैसियत और प्रशासकीय भागीदारी बढ़ानी होगी. एनडीटीवी के संपादक व लेखक प्रियदर्शन ने मंगलवार को रांची प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित संगोष्ठी के दौरान ये बातें कही. ‘हिंदी दिवस’ के उपलक्ष्य में आयोजित इस संगोष्ठी का विषय ‘पत्रकारिता और हिंदी’ रखा गया था.

प्रियदर्शन ने क्या कहा

रांची प्रेस क्लब में आयोजित संगोष्ठी में प्रियदर्शन ने कहा कि आज हम घर में हिंदी बोलते हैं, लेकिन स्कूल में हिंदी को अंग्रेजी ने विस्थापित कर दिया है. हिंदी बोली में बदल रही है. भाषा के रूप में यह लगातार में मार खा रही है. यह बाजार की भाषा रह गयी है, क्योंकि उत्पादों को 45 करोड़ हिंदी भाषियों को बेचना है. उन्होंने कहा : भाषा हमारे सरोकार से बनती है. शुद्धतावाद भाषाओं का शत्रु होता है. शब्दों के अर्थ वह नहीं होते, जो शब्दकोश बताते हैं. शब्दों की छवियां होती हैं, जो हमारे दिमाग में बनती रहती हैं. शब्दों में स्मृतियां होती हैं. जैसे- जब हम मां बोलते हैं, तो मां की स्मृति चली आती है. जब शब्दों से छवि बनती है, तब हम ठीक से लिख सकते हैं.

हिंदी में लिखना चाहते हैं, तो हिंदी टाइपिंग सीखें

सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड के देवव्रत ने कहा कि हिंदी का बाजार ज्यादा बड़ा है. यह अब पिछड़ेपन की निशानी नहीं रही. हिंदी में लिखना चाहते हैं, तो हिंदी टाइपिंग सीखें. पत्रकार शंभुनाथ चौधरी ने कहा कि भाषा के विकास के क्रम में इसका स्वरूप बदलता है. अच्छी भाषा वह है, जो हर दिन बोले जानेवाले शब्दों को साथ लेकर चलती है. अध्यक्षीय भाषण में प्रेस क्लब के अध्यक्ष संजय मिश्रा ने हिंदी की बढ़ती ताकत और बाजार में इसकी उपादेयता की बात कही. डॉ आकांक्षा चौधरी, यासमीन लाल, अनुराधा सिंह आदि ने भी अपने विचार साझा किये. निलय कुमार सिंह ने प्रतिभागियों का स्वागत किया. सैयद शहरोज कमर ने आलेख पाठ किया. संगोष्ठी में अखिलेश सिंह, सुधीर पाल, राजेश कुमार सिंह व अन्य मौजूद थे.

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देश को एक सूत्र में पिरोती है हिंदी : डॉ महुआ माजी

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद व साहित्यकार डॉ महुआ माजी ने शिरकत की. उन्होंने कहा कि हिंदी लगभग 48 उपभाषाओं और बोलियों से बनी है. इसलिए कोई भी नहीं कह सकता कि हिंदी मेरी भाषा नहीं है. हिंदी हमारे देश को एक सूत्र में पिरोती है. हिंदी के साथ हमारी संस्कृति, परंपराएं और मूल्य जुड़े हैं. यदि कोई हिंदी पढ़ता है, तो इस देश की परंपराएं, रीति रिवाज, मूल्य जैसी तमाम चीजें उस तक पहुंच जाती हैं. उन्होंने कहा कि लिखनेवाले व्याकरण से समझौता न करें. उनमें शब्दों से खेलने की क्षमता होनी चाहिए. हमेशा मौलिक लिखें. अपनी भाषा का सम्मान करें, इससे आत्मसम्मान बढ़ता है.

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