पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह सहित चार को गलत तरीके से दिया गया पेरोल, जानें किस जेल से हैं ऐसे कितने मामले

Updated at : 30 Nov 2021 8:16 AM (IST)
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पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह सहित चार को गलत तरीके से दिया गया पेरोल, जानें किस जेल से हैं ऐसे कितने मामले

पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह सहित चार कैदियों को गलत तरीके से पेरोल दिया गया. इस मामले की जांच रिपोर्ट समिति ने सरकार को सौंप दी है. साथ ही साथ इस मामले के दोषी अफसर को चिह्नित कर कार्रवाई की अनुशंसा की गयी है.

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रांची : हजारीबाग सेंट्रल जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह सहित चार कैदियों को गलत तरीके से पेरोल दिया गया. मामले की जांच कर रही समिति ने सरकार को सौंपी गयी रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया है. साथ ही दोषी डीसी, एसपी, तत्कालीन कारा महानिरीक्षक व जेल अधीक्षक को चिह्नित कर कार्रवाई की अनुशंसा की है. वहीं दूसरी ओर खूंटी जेल से तीन दिन के पेरोल पर गया कैदी अब तक नहीं लौटा है.

प्रभात खबर ने उठाया था मुद्दा :

प्रभात खबर में प्रभावशाली कैदियों को गलत तरीके से पेरोल देने से संबंधित खबरें प्रकाशित होने के बाद राज्य सरकार ने गृह विभाग के अपर सचिव की अध्यक्षता में जांच समिति बनायी थी. इसमें कारा महानिरीक्षक मनोज कुमार और संयुक्त सचिव शेखर जमुआर को सदस्य बनाया गया था.

समिति की जांच रिपोर्ट में पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह, दीनानाथ सिंह, दीपक नाग और नीतीश कुमार को नियमावली का उल्लंघन कर पेरोल देने की बात कही गयी है. पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह और उनके भाई दीनानाथ सिंह को मशरख के तत्कालीन विधायक अशोक सिंह को उनके पटना स्थित आवास में घुसकर हत्या करने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में मामले को सुनवाई के लिए हजारीबाग सत्र न्यायालय में भेजा गया था. सुनवाई के बाद हजारीबाग के सत्र न्यायालय ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा दी है. इन दोनों को ही न्यायालय ने आइपीसी की धारा 302, 307, 324, 34, 120 बी और एक्सप्लोसिव एक्ट की धारा 3, 4, 5 के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनायी है.

दोनों कैदियों को राज्य में लागू पेरोल नियमावली की धारा 7(1)(च) का उल्लंघन कर पेरोल दिया गया है. पेरोल नियमावली की इस धारा में कहा गया है कि एक्सप्लोसिव एक्ट के कैदी को पेरोल का अधिकार नहीं होगा. इसके बाद भी प्रभुनाथ सिंह को भतीजे की शादी और दीनानाथ सिंह को बेटे की शादी के नाम पर पहले 30 दिनों का पेरोल दिया गया. बाद में इसे बढ़ाकर तीन महीना किया गया. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया गया, जिसमें कोर्ट में कोविड-19 से बचाव के लिए कैदियों को पेरोल देने का निर्देश दिया गया था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दीपक नाग के खिलाफ कुल 13 मामले हैं. इसमें एसटी-337/13, एसटी-02/14, एसटी-109/14, एसटी-141/13, एसटी-348/14, एसटी-321/15, एसटी-124/12 सहित अन्य मामले हैं. खूंटी जेल में सजा काट रहे कैदी नीतीश कुमार के खिलाफ भी एसटी-196/13, जीआर-4881/11 मामले हैं. इन दोनों कैदियों को पेरोल देने में पेरोल नियमावली के नियम 7(1)(ख)(1) का उल्लंघन किया गया है. इस धारा में निहित प्रावधानों के तहत आदतन श्रेणी के अपराधी को पेरोल का अधिकार नहीं है. दोनों ही आदतन श्रेणी के अपराधी प्रतीत होते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे राज्य में पिछले एक साल में 293 कैदियों को पेरोल दिया गया है. पेरोल के लिए दिये गये 20 कैदियों के आवेदन को अस्वीकृत किया गया. मंडल कारा चास से किसी कैदी को पेरोल नहीं दिया गया है.

कहां कितने को पेरोल

जेल मिला रद्द

बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा 38 09

केंद्रीय कारा घाघीडीह 22 00

जयप्रकाश केंद्रीय कारा 115 00

केंद्रीय कारा पलामू 30 00

केंद्रीय कारा देवघर 10 00

मंडल कारा चाईबासा 04 00

मंडल कारा चास 00 11

मंडल कारा धनबाद 21 00

Posted By : Sameer Oraon

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