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Paddy Rate In Jharkhand 2020 : धान खरीद की सरकारी प्रक्रिया में फंसे किसान, बिचौलिये ले रहे लाभ

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
बर्बाद होने के डर से औने-पौने दाम में धान बेच रहे किसान
बर्बाद होने के डर से औने-पौने दाम में धान बेच रहे किसान
सांकेतिक तस्वीर

धान की कटाई के बाद से ही राज्य के किसान इसकी बिक्री के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाये बैठे हैं. ज्यादातर किसानों का धान खलिहान में ही पड़ा हुआ है. वहीं, सरकार धान के सूखने का इंतजार कर रही है. कहा जा रहा है कि किसान फरवरी के बाद तक धान बेच सकते हैं.

लेकिन, किसानों के पास न तो धान रखने की जगह है और न ही समय कि वे सरकार द्वारा धान खरीदने की जटिल प्रक्रिया को पूरा कर पायें. इन सबकी बची धान बर्बाद न हो जाये, इस डर से बहुत से किसान बिचौलियों के जरिये व्यापरियों को औने-पौने दाम में धान बेचने के लिए मजबूर हैं.

सरकार ने सामान्य धान की कीमत बोनस सहित 2050 रुपये प्रति क्विंटल तय की है, लेकिन किसान 1000 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल दर पर धान व्यापारियों को बेच रहे हैं. कुल मिला कर बिचौलिये चांदी काट रहे हैं.

बिचौलिये और व्यापारी किसानों की मजबूरी का पूरा फायदा उठा रहे हैं.

इधर, एक दिसंबर से ही राज्य में धान खरीद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. संबंधित विभाग के अधिकारी बताते हैं कि इस वित्तीय वर्ष में पूरे राज्य में 4.50 लाख क्विंटल धान की खरीद का लक्ष्य रखा गया है. अधिकारी दावा कर रहे हैं कि शुरुआती 19 दिनों में ही 98814 क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है, जो तय लक्ष्य का 21.95 प्रतिशत है.

बीते एक सप्ताह के दौरान धान अधिप्राप्ति में तेजी आयी है. अब तक कुल 153978 किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है. इनमें से 25142 किसानों ने धान बेचने के लिए एसएमएस भेजा है, जबकि 1888 किसान धान देने के लिए आये हैं.

राज्य में दो एजेंसियां कर रहीं धान का उठाव

राज्य में दो एजेंसियां धान का उठाव कर रही हैं. ‘भारतीय खाद्य निगम’ पलामू, गढ़वा और चतरा में धान अधिप्राप्ति का काम कर रहा है. वहीं, शेष 21 जिलों में धान उठाव का जिम्मा ‘झारखंड राज्य खाद्य निगम’ को दिया गया है. अब तक राज्य में 418 धान अधिप्राप्ति केंद्र खोल दिये गये हैं.

वहीं, 76 मिलों में धान कुटाई की व्यवस्था की गयी है. विभागीय आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में राज्य में 3.79 लाख क्विंटल धान की खरीद हुई थी, जो लक्ष्य की तुलना में कम था. पिछले साल 52000 किसानों ने सरकार को धान बेचा था. उस दौरान राज्य भर में 327 धान क्रय केंद्र खोले गये थे.

182 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दे रही सरकार

सरकार ने सामान्य श्रेणी के धान पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए धान पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 1888 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. साथ ही 182 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जा रहा है. ऐसे में किसानों को सामान्य धान के लिए 2050 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए धान के लिए 2070 रुपये प्रति क्विंटल रेट दिया जा रहा है.

झारखंड राज्य खाद्य निगम के अधिकारियों ने बताया कि धान अधिप्राप्ति के बाद 48 घंटे के अंदर किसानों के धान की 50 प्रतिशत राशि का भुगतान डीबीटी के जरिये उनके बैंक खाते में कर दिया जा रहा है. वहीं, शेष राशि का भुगतान धान के मिल में चले जाने के बाद किया जायेगा. उन्होंने बताया कि अब तक किये गये भुगतान की राशि का आकलन कराया जा रहा है.

किसानों की सहूलियत के लिए क्रय केंद्रों की संख्या बढ़ायी गयी है. जैसे-जैसे धान सूख रहा है, उसकी खरीद की जा रही है. किसानों को एसएमएस के जरिये बुलाया जा रहा है, ताकि क्रय केंद्रों पर भीड़ न हो. धान

विक्रय के लिए किसानों के पास पर्याप्त समय है. निबंधित किसानों से ही धान खरीद की जायेगी. -रामेश्वर उरांव, मंत्री, खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले

राज्य में धान खरीद की जिम्मेवारी

1. राज्य खाद्य निगम (एसएफसी)

के जिम्मे 03 जिले

2. भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) के जिम्मे 21 जिले

यह गढ़वा बाजार समिति में खुला धान खरीद केंद्र है. इसका उदघाटन मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने 12 दिसंबर को किया था. तब से अब तक आठ दिनों में यहां मात्र छह किसानों से ही धान की खरीदारी हुई है.

418 धान खरीद केंद्र खोले गये

76 मिलों में होगी धान की कुटाई

57 गोदाम बनाये गये धान रखने को

153978 किसानों ने कराया है निबंधन

25142 किसानों ने एसएमएस किया

1888 किसान धान देने आये

सरकार ने " 2050 प्रति क्विंटल तय की है धान की कीमत, बिचौलिये "1300 दे रहे

posted by : sameer oraon

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