Ranchi News : 97 लाख खर्च के बाद नौ साल में खंडहर

Published by : MUNNA KUMAR SINGH Updated At : 19 Aug 2025 12:53 AM

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ओरमांझी के एसएस प्लस टू स्कूल के पास वर्ष 2016 में करीब 97 लाख रुपये की लागत से बना खेल स्टेडियम आज खंडहर में तब्दील हो चुका है.

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ओरमांझी का स्टेडियम खंडहर में तब्दील, बास्केटबॉल कोर्ट का रिंग उल्टा, गैलरी टूटी, चारों ओर जंगल

गैलरी जर्जर, शेड टूटा, गेट पर भी सुरक्षा नहीं

रांची(राजेश तिवारी). ओरमांझी के एसएस प्लस टू स्कूल के पास वर्ष 2016 में करीब 97 लाख रुपये की लागत से बना खेल स्टेडियम आज खंडहर में तब्दील हो चुका है. जिला परिषद की ओर से बनाये गये इस स्टेडियम का हाल देखकर साफ लगता है कि निर्माण कार्य महज औपचारिकता निभाने के लिए किया गया था. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्टेडियम में बने बास्केटबॉल कोर्ट का रिंग उल्टा लगाया गया है. अब उस पर जंग भी लग चुका है. कोर्ट जगह-जगह से टूटा हुआ है और गड्ढों में तब्दील हो चुका है. वहीं, वॉलीबॉल और बैडमिंटन कोर्ट का भी हाल बुरा है. वॉलीबॉल कोर्ट अब मिट्टी के ढेर में बदल गया है, जिसका इस्तेमाल लोग गोबर रखने के लिए कर रहे हैं. चारों ओर जंगली घास और झाड़ियां उग आई हैं. दर्शकों के लिए बनायी गयी गैलरी की हालत बदतर है. स्लैब उखड़ गये हैं और कई जगह टूटकर बिखर चुके हैं. गैलरी में अब जंगली पौधे उग आये हैं. स्टेडियम के मुख्य गेट पर ताला तो लगा है, लेकिन लोहे की सिकड़ ढीली होने के कारण अंदर-बाहर लोगों का आना-जाना लगा रहता है. गेट की चाबी बाहरी लोगों के पास है. मुख्य प्रवेश द्वार के पास बने चार कमरों वाले भवन का शेड भी टूट चुका है. टिन की चादरें हवा के झोंकों में उखड़ गयी हैं और कभी भी गिर सकती हैं.

हैंडओवर को लेकर विवाद, मेंटेनेंस पर कोई जवाबदेही नहीं

करीब ढाई एकड़ में फैले इस स्टेडियम के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी किसकी है, यह अब तक तय नहीं है. स्कूल और जिला परिषद दोनों ने पल्ला झाड़ लिया है. जानकारी के अनुसार एक बार स्टेडियम स्कूल को हैंडओवर किया गया था, लेकिन मेंटेनेंस की बात कहकर वह प्रक्रिया वापस ले ली गयी. उसके बाद से यह स्टेडियम लावारिस स्थिति में पड़ा है.

जांच के बाद भी नहीं हुआ सुधार

निर्माण कार्य में गड़बड़ी को लेकर पूर्व में जिला प्रशासन ने एक जांच टीम गठित की थी. मनमोहन प्रसाद की अगुवाई वाली टीम ने निरीक्षण कर कई खामियां दूर करने का निर्देश दिया था. लेकिन, नौ साल बाद भी हालात जस के तस हैं. स्थानीय लोग नाराज हैं. उनका कहना है कि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी यह स्टेडियम किसी काम का नहीं रहा. सरकार और प्रशासन की लापरवाही से यह खेल मैदान अब बेकार और खतरनाक ढांचे में बदल चुका है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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