Ranchi News : आदेश को हल्के में नहीं लें, कोई अधिकारी कोर्ट से ऊपर नहीं
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 07 Jan 2025 12:15 AM
सुनवाई में डीजीपी के नहीं आने पर हाइकोर्ट नाराज
रांची. झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत ने होमगार्ड जवानों को समान काम के बदले समान वेतन देने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान गृह विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल अदालत में सशरीर उपस्थित रहीं, जबकि अदालत के आदेश के बावजूद डीजीपी उपस्थित नहीं हुए. इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए माैखिक रूप से कहा कि आदेश को हल्के में नहीं लिया जाये. कोई अधिकारी कोर्ट से ऊपर नहीं है. अदालत ने कहा कि 18 अक्तूबर 2024 को गृह विभाग की प्रधान सचिव व डीजीपी झारखंड को अगली सुनवाई की तिथि पर शारीरिक रूप से उपस्थित रहने का विशेष निर्देश दिया गया था. इसके अनुपालन में यद्यपि गृह विभाग की प्रधान सचिव उपस्थित हैं, लेकिन डीजीपी झारखंड इस अदालत के समक्ष उपस्थित होने में विफल रहे. राज्य सरकार द्वारा यह दलील दी गयी है कि डीजीपी के बजाय महानिदेशक (होमगार्ड) को निर्देश दिया जाना चाहिए था. सरकार की दलील को देखते हुए अदालत ने अपने पूर्व के आदेश को इस सीमा तक संशोधित करते हुए कहा कि डीजीपी के स्थान पर डीजी (होमगार्ड) अगली सुनवाई की तिथि पर न्यायालय में शारीरिक रूप से उपस्थित रहेंगे. साथ ही गृह विभाग की प्रधान सचिव को अगली सुनवाई में सशरीर उपस्थिति से छूट प्रदान की. मामले की अगली सुनवाई सात जनवरी को होगी. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी झारखंड होमगोर्ड वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष अजय प्रसाद ने अवमानना याचिका दायर की है. प्रार्थी ने एकल पीठ के आदेश का अनुपालन कराने की मांग की है. एकल पीठ ने होमगार्ड जवानों को समान काम के बदले समान वेतन देने का आदेश दिया है. इस मामले में राज्य सरकार की एसएलपी सुप्रीम कोर्ट से पहले ही खारिज हो चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाइकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था तथा एसएलपी खारिज कर दी थी. पूर्व में कोर्ट ने राज्य सरकार को 25 अगस्त 2017 के प्रभाव से होमगार्ड जवानों को लाभ देने का निर्देश दिया था. कहा था कि आदेश की तिथि से पुलिसकर्मियों के समकक्ष होमगार्ड जवानों को समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ देना होगा. दो माह में एरियर का भुगतान करने का निर्देश दिया था. आदेश का अनुपालन नहीं होने पर राज्य के गृह सचिव व डीजीपी को सशरीर हाजिर होने का निर्देश दिया था.
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