नियोजन नीति के विरोध में 19 अप्रैल को झारखंड बंद, 17 को सीएम आवास के घेराव से शुरू होगा तीन दिवसीय आंदोलन

Jharkhand Mein Niyojan Niti Ka Virodh|देवेंद्र महतो ने कहा कि इस आंदोलन को राज्य के सभी 24 जिलों के छात्र संगठनों का समर्थन प्राप्त है. उन्होंने बताया कि आंदोलन ऐतिहासिक होगा. सभी 24 जिलों में बंद बुलाया गया है. सीएम आवास का घेराव करने के लिए सभी 24 जिलों के विद्यार्थी रांची आयेंगे.
रांची, राजलक्ष्मी. झारखंड में नियोजन नीति के खिलाफ झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन ने एक बार फिर आंदोलन का ऐलान कर दिया है. यूनियन के अध्यक्ष देवेंद्र महतो ने गुरुवार को कहा कि 17 अप्रैल से छात्र संगठनों का आंदोलन शुरू हो जायेगा. 17 अप्रैल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव किया जायेगा. 18 अप्रैल को रांची में मशाल जुलूस निकाला जायेगा और 19 अप्रैल को झारखंड बंद किया जायेगा.
देवेंद्र महतो ने कहा कि इस आंदोलन को झारखंड के सभी 24 जिलों के छात्र संगठनों का समर्थन प्राप्त है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके संवाददाताओं को बताया कि इस बार का आंदोलन ऐतिहासिक होगा. सभी 24 जिलों में बंद बुलाया गया है. सीएम आवास का घेराव करने के लिए सभी 24 जिलों के विद्यार्थी रांची आयेंगे.
देवेंद्र महतो ने बताया कि त्रिदिवसीय 72 घंटे का महा आंदोलन होगा. उन्होंने कहा कि 60/40 वाली नियोजन नीति के खिलाफ तथा झारखंड में झारखंडियों का नौकरी देने की मांग को लेकर झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन चार महीने से लगातार आंदोलन कर रहा है. झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र से ही लगातार डिजिटल तथा फिजिकल आंदोलन कर रहा है.
देवेंद्र महतो ने कहा कि छात्रों की बार-बार की मांग के बावजूद वर्तमान सरकार ने हमारी मांगों पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है. इसलिए मजबूरन छात्रों को 72 घंटे का महाआंदोलन करना पड़ रहा है. कहा कि 17 अप्रैल 2023 को सुबह 10 बजे संपूर्ण झारखंड के छात्र मोरहाबादी मैदान में एकत्र होंगे और यहां से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव करने के लिए रवाना होंगे.न्य छात्र शामिल थे l
छात्र नेता ने कहा कि 18 अप्रैल 2023 को शाम 5 बजे झारखंड के सभी प्रखंडों सह जिला मुख्यालयों में मशाल जुलूस निकाला जायेगा. इसके बाद 19 अप्रैल 2023 को संपूर्ण झारखंड बंद किया जायेगा. हालांकि, इस दौरान इमरजेंसी सेवाओं को बाधित नहीं किया जायेगा.
झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन (जेएसएसयू) ने दावा किया कि आंदोलन को आदिवासी छात्र संघ, आइसा छात्र संघ, आदिवासी सेंगेल अभियान, आदिवासी जन परिषद, आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के साथ-साथ कई अन्य संगठनों का भी समर्थन प्राप्त है.
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