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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने किया टेंडर की शर्तों में बदलाव, झारखंड हाईकोर्ट में दी गयी चुनौती

Updated at : 12 Jun 2023 8:46 AM (IST)
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने किया टेंडर की शर्तों में बदलाव, झारखंड हाईकोर्ट में दी गयी चुनौती

झारखंड में मरीजों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कुल 337 इमरजेंसी मेडिकल एंबुलेंस चलायी जा रही है. इसमें से 287 एंबुलेंस बुनियादी चिकित्सा सुविधा से और 50 एंबुलेंस उन्नत चिकित्सा सुविधा से लैस हैं

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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा टेंडर की शर्तों में बड़े पैमाने पर बदलाव किया गया है. राज्य में इमरजेंसी मेडिकल एंबुलेंस सर्विस (इएमएएस) के लिए टेंडर में कुछ अनोखी शर्तें जोड़ी गयी हैं. इस वजह से एंबुलेंस चला रही कंपनी को दंडित किया जा सकेगा. साथ ही ज्यादा टर्नओवरवाली कंपनी को नये सर्विस प्रोवाइडर के रूप में चुना जा सकेगा.टेंडर में लगायी गयी इन शर्तों को हाइकोर्ट में चुनौती दी गयी है. साथ ही इन शर्तों को किसी खास कंपनी को लाभ पहुंचानेवाला बताया गया है.

राज्य में मरीजों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कुल 337 इमरजेंसी मेडिकल एंबुलेंस चलायी जा रही है. इसमें से 287 एंबुलेंस बुनियादी चिकित्सा सुविधा से और 50 एंबुलेंस उन्नत चिकित्सा सुविधा से लैस हैं. वर्ष 2015 से राज्य में चलायी जा रही बुनियाद सुविधा से लैस एंबुलेंस सेवा पर 39 करोड़ रुपये सालाना खर्च हो रहे हैं. एंबुलेंस पर सालाना करीब सात करोड़ की दर से खर्च हो रही है.

वर्ष 2015 में टेंडर प्रक्रिया के सहारे एंबुलेंस सेवा चलाने के लिए मुंबई की मेसर्स जिकित्जा हेल्थ केयर नामक कंपनी का चयन हुआ था. इस कंपनी को पांच साल के लिए एंबुलेंस सेवा चलाने के लिए एकरारनामा किया गया था. इस कंपनी को बुनियादी सुविधा से लैस एंबुलेंस को चलाने के लिए प्रति माह 1.11 लाख और उन्नत चिकित्सा सेवा से लैस एंबुलेंस के लिए प्रति माह 1.13 लाख रुपये की दर से भुगतान किया जाता है.

कंपनी के साथ किये गये करार की अवधि 15 नवंबर 2022 को समाप्त हो गयी. इसके बाद इस कंपनी को लगातार अवधि विस्तार दिया गया. 24 अप्रैल 2023 को नये टेंडर के निपटारे तक मुंबई की कंपनी को एंबुलेंस सेवा जारी रखने का निर्देश दिया गया. सरकार ने चिकित्सा सुविधा और बेहतर करने के उद्देश्य से एंबुलेंस की संख्या 337 से बढ़ा कर 543 करने का फैसला किया. नया सर्विस प्रोवाइडर चुनने के लिए तीन मई 2023 को इ-टेंडर जारी किया गया.इसमें एक एंबुलेंस चलाने के लिए बेस प्राइस 1.35 लाख रुपये तय किया गया.

साथ ही टेंडर में हिस्सा लेनेवालों के लिए बोली की अधिकतम और न्यूनतम सीमा तय कर दी गयी. इसके तहत यह प्रावधान किया गया कि बिडर बेस प्राइस से पांच प्रतिशत अधिक या पांच प्रतिशत तक ही रेट कोट कर सकते हैं. इसके अलावा टेंडर में हिस्सा लेनेवालों को 28 करोड़ के टर्नओवर से अधिक के प्रति चार करोड़ के टर्नओवर पर एक अतिरिक्त अंक देने की शर्त लगा दी गयी.

इन दोनों शर्तों की वजह से टेंडर में प्रतियोगिता का मूल उद्देश्य समाप्त हो जायेगा. क्योंकि कोई भी बिडर पांच प्रतिशत से कम रेट नहीं कोट कर सकता है. इस शर्त की वजह से टेंडर में वही बिडर सफल होगा, जिसका टर्नओवर सबसे ज्यादा होगा. टेंडर में जोड़ी गयी तीसरी शर्त से एंबुलेंस सेवा चला रही कंपनी को दंडित किया जा सकेगा.

इस कंपनी के साथ किये गये इकरारनामे के अनुसार, पांच साल अधिक के एंबुलेंस के बदलने की जिम्मेवारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की होगी. हालांकि नये टेंडर की शर्तों के अनुसार ,पुराने सर्विस प्रोवाइडर से नये सर्विस प्रोवाइडर को एंबुलेंस सौंपने के क्रम में एंबुलेंस में खराबी व अन्य की मरम्मत पर होनेवाले खर्च की वसूली पुराने सर्विस प्रोवाइडर से होगी

इएमएएस के टेंडर में कुछ अनोखी शर्तें जोड़ी गयी

टेंडर में हिस्सा लेनेवालों के लिए बोली की अधिकतम और न्यूनतम सीमा तय कर दी गयी.

बिडर बेस प्राइस से पांच प्रतिशत अधिक या पांच प्रतिशत तक ही रेट कोट कर सकते हैं.

टेंडर में हिस्सा लेनेवालों को 28 करोड़ के टर्नओवर से अधिक के प्रति चार करोड़ के टर्नओवर पर एक अतिरिक्त अंक देने की शर्त लगा दी गयी

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