Ranchi News : मोटरवाहन अधिनियम आमलोग व सरकारी अधिकारी दोनों के लिए बराबर

Published by :RAJIV KUMAR
Published at :22 Mar 2025 8:17 PM (IST)
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Ranchi News : मोटरवाहन अधिनियम आमलोग व सरकारी अधिकारी दोनों के लिए बराबर

प्रभात खबर की लीगल काउंसेलिंग में झारखंड हाइकोर्ट के अधिवक्ता अरविंद कुमार लाल ने दी कानूनी सलाह.

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रांची.

आमलोग हों या सरकारी अधिकारी, दोनों के लिए मोटरवाहन अधिनियम बराबर है. लेकिन, सरकार के अधिकारियों व उनके वाहनों के मामले में स्थिति दूसरी है. पुलिस, थाना, सचिवालय व विभागों में बिना नंबर प्लेट की गाड़ियां चलायी जाती हैं. किसी सरकारी गाड़ी, विशेष कर थाना पुलिस की गाड़ी में यदि नंबर प्लेट लगा भी हो, तो स्पष्ट रूप से दिखता नहीं है. सरकार की गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन और बीमा भी नहीं रहता है. आम लोगों की तरह ऐसे सरकारी वाहनों पर भी जुर्माना लगना चाहिए. इसमें किसी को छूट नहीं मिलनी चाहिए. बिना रजिस्ट्रेशन के सड़क पर गाड़ी चलाना अपराध है. यह सरकार के अधिकारियों पर भी लागू होता है. उक्त बातें झारखंड हाइकोर्ट के अधिवक्ता अरविंद कुमार लाल ने कही. गढ़वा के एक व्यक्ति ने उनसे यह सवाल पूछा था. वे शनिवार को प्रभात खबर की ऑनलाइन लीगल काउंसेलिंग में लोगों के सवालों पर कानूनी सलाह दे रहे थे. उन्होंने लोगों को अनावश्यक मुकदमा से बचने की भी सलाह दी. उनसे बीमा और अपराध से जुड़े अधिक सवाल पूछे गये.

सिमडेगा के मनमोहन साहू का सवाल :

केनरा बैंक से उन्होंने ऑटो के लिए लोन लिया था. वर्ष 2019 में गाड़ी चोरी हो गयी. बैंक एनओसी नहीं दे रहा है. हम क्या करें?

अधिवक्ता की सलाह :

यदि आपने सारी प्रक्रिया पूरी कर दी है, तो उसके बाद बैंक को एनओसी दे देना चाहिए. आरबीआइ के लोकपाल के पास आप लिखित आवेदन दें. यदि समाधान नहीं होता है, तब आप हाइकोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकते हैं.

सतबरवा निवासी संत कुमार मेहता का सवाल :

एनएच-75 के तहत उनकी जमीन का अधिग्रहण हो रहा है. एक जमीन पर एलपीसी नहीं मिल रहा है.

अधिवक्ता की सलाह :

एलपीसी के लिए आप संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन दें. उपायुक्त के पास लिखित शिकायत दर्ज करायें. यदि समाधान नहीं होता है, तो आप हाइकोर्ट भी जा सकते हैं.

गढ़वा के श्री प्रसाद गुप्ता का सवाल:

जमीन का म्यूटेशन नहीं हो रहा है. हाइकोर्ट का भी आदेश है. इसके बावजूद उन्हें दाैड़ाया जा रहा है. क्या करें?

अधिवक्ता की सलाह :

इसके लिए घबरायें नहीं. आप एसडीओ, एलआरडीसी, उपायुक्त व आयुक्त के पास लिखित आवेदन दें. समाधान नहीं होता है, तो हाइकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर सकते हैं.

कपड़ा व्यवसायी ओपी अग्रवाल का सवाल :

उधार में कपड़ा दिया था, लेकिन बकाया का भुगतान नहीं मिल रहा है. वह क्या करें.

अधिवक्ता की सलाह :

देखिए, इसके लिए आप कपड़ा लेनेवाले व्यक्ति से आग्रह करें कि बकाया का भुगतान कर दे. यदि आपकी बात नहीं मानी जाती है, तो आप मनी सूट दायर कर सकते हैं. इसके लिए कुल दावे का 10 प्रतिशत कोर्ट फीस जमा करना होता है.

गढ़वा के राजेंद्र कुमार ओझा का सवाल :

हमारी जमीन की लगान रसीद नहीं कट रही है. छह साल से दाैड़ रहे हैं. क्या करें?

अधिवक्ता की सलाह :

सीओ, एलआरडीसी, उपायुक्त को दस्तावेजों के साथ लिखित में आवेदन दें. समाधान नहीं होने पर हाइकोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकते हैं.

रांची की मधुरंजन का सवाल :

मेडिकल इंश्योरेंस के दावे का क्लेम बीमा कंपनी नहीं दे रही है. क्लेम को रद्द कर दिया है. उन्हें क्या करना चाहिए?

अधिवक्ता के सवाल :

देखिये, आप इस मामले में उपभोक्ता आयोग की शरण में जा सकती हैं.

रांची के विनोद सिंह का सवाल

: दुर्घटना हुई थी, जिसमें पैर काटना पड़ा था. क्लेम में मुआवजा कम तय किया गया है. क्या करें?

अधिवक्ता की सलाह :

आप मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए अपील में जा सकते हैं.

इन लोगों ने भी सलाह ली : रामगढ़ के सीएन राय, जामताड़ा के राहुल कुमार, मेदिनीनगर के नवल किशोर दुबे, गुमला के गणपति सिंह, हजारीबाग के ब्रजकिशोर प्रसाद, गढ़वा के वाल्मीकि चाैबे, हजारीबाग के अशोक कुमार मिश्रा, विभूति व एम हक भारती, पलामू के उपेंद्र नाथ तिवारी आदि ने भी कानूनी सलाह ली.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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