कोयलांचल की जीवन रेखा दामोदर नद के प्रदूषित होने से ग्रामीणो में बेचैनी

Updated at : 11 Jan 2026 8:22 PM (IST)
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कोयलांचल की जीवन रेखा दामोदर नद के प्रदूषित होने से ग्रामीणो में बेचैनी

बड़ी आबादी के समक्ष पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है.

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पिपरवार. जिस प्रकार किसी भी देश की अर्थव्यवस्था, सभ्यता व संस्कृति के विकास में वहां की नदियों का अहम योगदान होता है. उसी प्रकार दामोदर व गरही नदियों का पिपरवार कोयलांचल के विकास में योगदान को नकारा नहीं जा सकता है. ये दोनों नदियां यहां के औद्योगिक व कृषि कार्य में काफी सहायक रही हैं. पेयजल, कृषि, मत्सय पालन से लेकर कोयला उत्पादन तक दामोदर नद की घाटी में ही संभव हुआ है. दामोदर नद व उसकी सहायक नदी गरही यहां की जीवन रेखा है. इसी दामोदर नद की घाटी ने देश को आर्थिक गति देने में अहम भूमिका अदा की है. अब इसी कोयले की राख दामोदर के लिए अभिशप्त हो गया है. एनटीपीसी द्वारा इसमें छाई बहाये जाने से प्रारंभिक दौर में गरही नदी व दामोदर नद के निकटवर्ती गांव किरिगड़ा, बुंडू, हफुआ, कोले, पताल के लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इससे ग्रामीणों की बेचैनी साफ देखी जा सकती है. जबकि आनेवाले दिनो में हेंदेगीर, उरीमारी, सयाल, पोड़ा, सौंदा, दत्तो, गिद्दी, भुरकुंडा, सिरका, लपंगा, घुटूआ, रामगढ़ आदि क्षेत्रों में निवास करने वाली बड़ी आबादी के समक्ष पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है. क्योंकि उक्त क्षेत्र में सीसीएल की कई परियोजनाएं हैं. यहां निवास करने वाली एक बड़ी आबादी को दामोदर नद से ही पेयजल उपलब्ध कराया जाता है. इस संबंध में गरही व दामोदर नद किनारे रहनेवाले ग्रामीणो से प्रभात खबर ने प्रदूषण के प्रभाव को जानने का प्रयास किया है.

क्या कहते हैं ग्रामीण

रमेश महतो :

एनटीपीसी प्रबंधन मनमानी ढंग से छाई को नदी में बहा रहा है. इससे आनेवाले दिनाे में किरिगड़ा व हफुआ गांव के लोगों का जीवन काफी कठिन हो जायेगा.

काशीनाथ महतो :

किरिगड़ा गांव तीन ओर दामोदर नद से घिरा है. इसकी वजह से यहां का अंडरग्राउंड वाटर लेवल नदी के बराबर है. गर्मियों में गांव के कुएं व बोरिंग सूख जाने पर पूरा गांव के लोग पानी के लिए दामोदर पर निर्भर होते हैं. ऐसे में ग्रामीणो की परेशानी बढ़ना तय है.

हीरा महतो :

गरही व दामोदर में केमिकल युक्त फ्लाई ऐश होने से मछलियां गायब हो चुकी हैं. नद में मछली नहीं मिल रही है. बीमारी के भय से ग्रामीण पशुओं को नद में जाने नहीं दे रहे हैं.

श्रवण कुमार महतो :

गरही-दामोदर संगम स्थल से कोले तक राख पसरा है. कभी बालू के बीच कल-कल बहता दामोदर का पानी अब सफेद केमिकल से पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है.

भुनेश्वर महतो :

किरिगड़ा के गरीब हो या अमीर, प्रकृति गर्मियों में किसी के साथ भेदभाव नहीं करती. लोगों की दिनचर्या की शुरुआत ही नदी से होती है. गर्मियों के दिनो में हमारी परेशानी बढ़नेवाली है.

नीतेश कुमार :

एनटीपीसी प्रबंधन को नदी में राख बहाना तुरंत बंद कर देना चाहिए. साथ ही ग्रामीणों की गर्मियों में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए पेयजल की व्यवस्था करनी चाहिए.

संगीता देवी, मुखिया किचटो पंचायत:

सरकार तुरंत एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करे. साथ ही आगे दामोदर और अधिक प्रदूषित नहीं हो, इसके लिए सरकार को पर्यावरण अधिकारियों व एनजीटी की जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहिए.

एनटीपीसी के छाई बहाये जाने से गरही नदी व दामोदर नद प्रदूषित हो रहे हैं

नदी से लगे गांव किरिगड़ा, बुंडू, हफुआ, कोले, पताल के लोग बुरी तरह प्रभावितB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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