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Monsoon in Jharkhand: झारखंड में 65 फीसदी कम बरसा मानसून, जानें आपके जिले में कितनी हुई वर्षा

Updated at : 24 Jun 2024 1:15 PM (IST)
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झारखंड में अब तक कितना बरसा मानसून.

Monsoon in Jharkhand: मान झारखंड में प्रवेश कर चुका है. बारिश भी हुई, लेकिन इस मानसून सीजन अब तक 65 फीसदी कम वर्षा हुई है. आपके जिले का क्या है हाल.

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Monsoon in Jharkhand: झारखंड में इस मानसून सीजन 65 फीसदी कम बारिश हुई है. 17 जिले ऐसे हैं, जहां 60 फीसदी से कम वर्षा हुई है. वहीं, 7 जिले ऐसे हैं, जहां 20 फीसदी से 59 फीसदी तक कम वर्षा हुई है.

रांची समेत 7 जिलों को मौसम विभाग ने रेड जोन में रखा

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के रांची स्थित मौसम केंद्र ने यह जानकारी दी है. मौसम केंद्र के वैज्ञानिक ने बताया है कि राजधानी रांची समेत 7 जिले ऐसे हैं, जिन्हें रेड जोन में रखा गया है. यानी यहां 1 जून से 23 जून के बीच सामान्य से कम बारिश हुई है. कम बारिश वाले जिलों में सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रांची, बोकारो, धनबाद और जामताड़ा शामिल हैं.

गढ़वा जिले में हुई सबसे कम 8.2 मिलीमीटर वर्षा

सबसे कम 8.2 मिलीमीटर वर्षा गढ़वा जिले में हुई है. यहां मानसून के सीजन में सामान्य की तुलना में 91 फीसदी कम वर्षा हुई है. पाकुड़ में सामान्य से 88 फीसदी कम, साहिबगंज में 84 फीसदी कम, गोड्डा में 73 फीसदी कम, देवघर में 74 फीसदी कम, दुमका में 66 फीसदी कम, गिरिडीह में 70 फीसदी कम बारिश हुई है.

कोडरमा में अब तक 81 फीसदी कम बरसा मानसून

कोडरमा में सामान्य से 81 फीसदी कम वर्षा हुई है, जबकि हजारीबाग में 66 फीसदी, रामगढ़ में 76 फीसदी, खूंटी में 60 फीसदी, पूर्वी सिंहभूम में 86 फीसदी, गुमला में 73 फीसदी, लोहरदगा में 72 फीसदी, लातेहार में 78 फीसदी, चतरा में 61 फीसदी और पलामू में 80 फीसदी कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है.

23 दिन में होनी चाहिए 132.2 मिमी वर्षा, हुई मात्र 46.4 फीसदी

मौसम विभाग से मिले आंकड़े बताते हैं कि 1 जून से 23 जून के बीच झारखंड में आमतौर पर 132.2 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए. लेकिन, इस अवधि में मात्र 46.4 मिलीमीटर वर्षा हुई है. यह सामान्य वर्षापात से 65 फीसदी कम है. पिछले 24 घंटे के दौरान झारखंड के कुमारडुंगी में सबसे ज्यादा 45.2 मिलीमीटर वर्षा हुई. इसके बाद रांची बुढ़मू में 12 मिमी, साहिबगंज के बोरियो में 5.8 मिमी, पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी में 3.8 मिमी वर्षा हुई.

24 घंटे में किस जगह, कितनी बारिश हुई

बोकारो में 3 मिलीमीटर, गुमला के पालकोट में 2.8 मिलीमीटर, पापुनकी में 2.2 मिलीमीटर, कोनेर डीवीसी में 2 मिलीमीटर वर्षा हुई. गढ़वा में 2 मिलीमीटर, तेुनघाट में 1.2 मिलीमीटर, बोराम में 1 मिलीमीटर, लोहरदगा में 1 मिलीमीटर, गिरिडीह के बेंगाबाद, साहिबगंज और हजारीबाग में 0.5 मिलीमीटर वर्षा हुई. कोनेर में 0.4 मिलीमीटर और जमशेदपुर में 0.2 मिलीमटर वर्षा रिकॉर्ड की गई.

गोड्डा का तापमान एक बार फिर 40 डिग्री के पार

मौसम केंद्र के वैज्ञानिक ने बताया कि पिछले 24 घंटे के दौरान झारखंड में गोड्डा का तापमान सबसे अधिक रिकॉर्ड किया गया. यहां का उच्चतम तापमान एक बार फिर 40 डिग्री को पार करके 40.3 डिग्री सेंटीग्रेड हो गया. वहीं, रांची का न्यूनतम तापमान सबसे कम 24.8 डिग्री सेंटीग्रेड रहा. इस दौरान कुछ जगहों पर हल्के दर्जे की वर्षा हुई.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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