झारखंड में मैकेनिकल विंग को कर दिया गया बंद, इंजीनियरों को बैठा दिया, सड़ रहा करोड़ों का प्लांट
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 26 Dec 2022 8:28 AM
पथ निर्माण विभाग को सड़क पर एक छोटे से गड्ढे को भरने के लिए भी ठेकेदार के भरोसे बैठना पड़ रहा है. ठेकेदार अक्सर लागत से अधिक दर पर काम कर रहे हैं. विभाग के पास अपना कोई विंग नहीं है
पथ निर्माण विभाग के मैकेनिकल विंग को पांच साल पहले बंद कर दिया गया. इसके इंजीनियरों को बैठा दिया गया. सभी को अकार्य (नन वर्क्स) में पोस्टिंग कर दी गयी. नामकुम स्थित हॉट मिक्स प्लांट भी सड़ गया है. रख-रखाव और इस्तेमाल के बिना सड़क निर्माण के उपकरण तथा अन्य मशीनें बर्बाद हो गयी हैं. सड़क बनाने के उपयोग में आनेवाली कई महत्वपूर्ण गाड़ियां भी खराब हो चुकी हैं. ऐसे में सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ है.
हालात यह है कि पथ निर्माण विभाग को सड़क पर एक छोटे से गड्ढे को भरने के लिए भी ठेकेदार के भरोसे बैठना पड़ रहा है. ठेकेदार अक्सर लागत से अधिक दर पर काम कर रहे हैं. विभाग के पास अपना कोई विंग नहीं है, जिससे सड़क का गड्ढा भरा जा सके, जबकि पहले मैकेनिकल विंग के प्लांट व उपकरणों तथा इंजीनियरों की मदद से कई महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण हर साल होता था.
जब विंग बंद किया गया, तो इसके एक साल बाद हॉट मिक्स प्लांट और उपकरणों की नीलामी की बात हुई, इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ. ऐसे में सारे उपकरण बर्बाद होते गये. रोड रोलर, पेवर, कंट्रोल पैनल सहित अन्य गाड़ियां और उपकरण बर्बाद हो गये. एक आकलन के मुताबिक, 10 करोड़ से अधिक के उपकरण सड़ गये. इसे नीलाम करने से सरकारी खजाने में राशि आती और मशीन बर्बाद नहीं होती.
मैकेनिकल विंग की ओर से पूर्व में कांके रोड, दीनदयाल नगर रोड, राजभवन के अंदर का पथ, धुर्वा गोल चक्कर से धुर्वा डैम पथ, बिरसा चौक-हिनू पथ, ओवरब्रिज पथ का निर्माण कराया गया था. तब विंग के इंजीनियरों ने इन सड़कों का निर्माण कराया था. इतना ही नहीं विंग द्वारा करीब 10 प्रतिशत कम रेट पर काम कराया गया. विंग बंद होने के बाद इन इंजीनियरों के अनुभव का लाभ तक विभाग को नहीं मिल पा रहा है.
इंजीनियरों ने बताया कि अभी इस तरह के प्लांट को स्थापित करने में कम से कम आठ करोड़ रुपये से अधिक लगेंगे. प्लांट के सारी मशीनों से लेकर गाड़ियों की लागत अभी के मुताबिक करीब 10 करोड़ रुपये आंकी जा रही है. बड़ी संख्या में कई गाड़ियां भी थीं. जिस तरह का रोलर इस विंग का था, उसकी लागत करीब 30 लाख होगी. वहीं, फिनिशर पेवर की कीमत 45 लाख, जेएसबी की कीमत 35 लाख होगी.
जब विंग बंद हुआ, उस समय हर माह मैकेनिकल विंग के इंजीनियरों, कर्मियों व ऑपरेटरों के वेतन मद में करीब 35 लाख रुपये खर्च होते थे. बाद में उन्हें ढंग से समायोजित नहीं किया गया. उनसे पूर्व की तरह काम लिया जाता तो, सरकार की राशि का सदुपयोग होता.
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