प्रतिनिधि, डकरा. राज्य सरकार की ओर से पर्यटन क्षेत्र घोषित मैक्लुस्कीगंज अब अवैध कोयला खनन का अड्डा बन गया है. क्षेत्र के घने जंगलों में करीब 25 से 30 अवैध खदानें सक्रिय हैं. स्थानीय सूत्रों की मानें तो इन खदानों पर अब बड़े कोयला तस्करों की नजर है, जो प्रशासनिक, वन, पर्यावरण, अंचल, पुलिस और सीसीएल के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से एक संगठित सिंडिकेट बनाकर अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं. अवैध खनन से जंगलों का तेजी से क्षरण हो रहा है और पूरे क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है. जिससे आम लोगों का जीवन असुरक्षित हो गया है. क्षेत्रवासियों के अनुसार, अब सड़क पर चलना तक मुश्किल हो गया है.
प्रभात खबर में खुलासे के बाद गतिविधियों पर असर :
बुधवार को स्थानीय अखबार प्रभात खबर में अवैध खनन का पर्दाफाश हुआ, तो इलाके में ट्रैक्टरों से कोयला ढुलाई अस्थायी रूप से बंद कर दी गयी. पिकअप, ट्रक और टर्बो वाहनों से कोयला बाहर भेजा जाता था. वह भी बुधवार को नजर नहीं आये. एक ट्रक की तस्वीर लिए जाने के बाद उसे तत्काल क्षेत्र से हटा दिया गया और रात में किसी भी साइड पर लोडिंग की गतिविधि नहीं देखी गयी. मीडिया कवरेज पर अंकुश लगाने की कोशिश : प्रत्येक साइट पर नये लोगों और खासतौर पर मीडिया कर्मियों की सघन निगरानी की जा रही है. किसी भी साइट, वाहन, रास्ता या कोयला भंडारण की कोई तस्वीर या वीडियो नहीं ले पाये, यह सुनिश्चित किया जा रहा है. लोडिंग यदि दिन में भी हो, तो कोयला सिर्फ अंधेरा होने के बाद ही सड़क पर निकलेगा.खदानें बंद करने की सूचना सीसीएल ने दी :
खलारी अंचल कार्यालय को सीसीएल ने लिखित रूप से सूचित किया है कि क्षेत्र की अवैध खदानें बंद कर दी गयी हैं. इसकी पुष्टि करते हुए सीओ प्रणव अंबष्ट ने बताया कि उन्होंने सीसीएल को पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था. जिसके जवाब में उन्हें यह सूचना प्राप्त हुई है.कोयले का भंडारण, भेजने की तैयारी :
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर अवैध उत्खनन कर निकाला गया कोयला बड़ी मात्रा में जमा किया गया है. जैसे ही माहौल अनुकूल होगा, उसे बाहर भेजा जाना तय है. इसके लिए कई वाहन पहले से रिजर्व रखे गये हैं.धमधमियां शिव मंदिर के पीछे बड़ा अड्डा :
धमधमियां शिव मंदिर नौ नंबर के पीछे अवैध उत्खनन का सबसे बड़ा अड्डा है. मंदिर के पीछे एक जगह पर छह और रोड के दूसरी तरफ बिरसानगर जानेवाले रास्ते में 25 जगहों पर खदान बनाये गये हैं. इसके अलावा दामोदर नद के दूसरी तरफ जो बालुमाथ थाना क्षेत्र अंतर्गत आता है, वहां भी दर्जनों जगहों पर ऐसे अवैध उत्खनन केंद्र बने हुए हैं. कई जगहों पर कोयला स्टाॅक करके भी रखा गया है. शिव मंदिर के पीछे स्थाई रूप से टेंट लगाकर बाहर से लाकर मजदूरों को रखा गया है. मजदूर दिन-रात पेट के खातिर अपनी जान की परवाह किये बगैर असुरक्षित तरीके से कोयला खनन का काम कर रहे हैं.वन विभाग ने छोड़ रखा है रास्ता :
जिस जगह से अवैध उत्खनन हो रहा है, उसके आसपास वन विभाग ने तार से जंगलों की घेराबंदी की है. आश्चर्यजनक रूप से कुछ जगहों पर घेराबंदी छोड़ दी गयी है. ठीक उसी जगह जंगल काटकर सड़क बना दी गयी है. इस सड़क का इस्तेमाल कोयला ढोनेवाले वाहन करते हैं.खदान की भेंट चढ़ गया सरकारी डोभा :
तुमांग पंचायत अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 4.70 लाख की लागत से डोभा बनाया गया था. यह डोभा भी अवैध कोयला खनन की भेंट चढ़ गया है. राजीव कुमार सिन्हा की जमीन पर डोभा निर्माण कार्य का बोर्ड भी लगाया गया है. राजीव कुमार सिन्हा क्यों चुप हैं, इसके बारे में जब खोजबीन की गयी तो राजीव की कोई जानकारी नहीं मिल सकी. मामले में जानकार लोगों ने बताया कि इसका पता लगाने पर जमीन की अवैध जमाबंदी और सरकारी योजना के माध्यम से उसे पक्का करने और सरकारी राशि की बंदरबांट की योजना बनायी गयी है.जंगल कटने के कारण प्रदूषण से त्रस्त हैं आम लोग
ग्रामीणों ने लगाया प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप
24 डकरा 04 डोभा जिसके आसपास बने हैं
खदान.B
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

