झारखंड के एलोवेरा विलेज को जानिए, इसकी खेती से ग्रामीण महिलाएं बन रही स्वावलंबी

Updated at : 16 Feb 2021 6:24 PM (IST)
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झारखंड के एलोवेरा विलेज को जानिए, इसकी खेती से ग्रामीण महिलाएं बन रही स्वावलंबी

Jharkhand News, Ranchi News, रांची : रांची जिला अंतर्गत नगड़ी प्रखंड स्थित देवरी गांव को आज लोग एलोवेरा विलेज के रूप में जानते हैं. इस एलोवेरा की खेती गांव के हर आंगन और खेत में बखूबी हो रही है. ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के वाहक बन रहे हैं एलोवेरा की खेती.

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Jharkhand News, Ranchi News, रांची : झारखंड की राजधानी रांची जिले का एक गांव इन दिनों एलोवेरा विलेज के नाम से जाना जा रहा है. इस गांव के हर आंगन और खेत में एलोवेरा उगाये जा रहे हैं. इससे ना सिर्फ ग्रामीण महिलाएं स्वावलंबी बन रही है, बल्कि ऐलोवेरा की खेती से जीवन बेहतर बना रही है.

रांची जिला अंतर्गत नगड़ी प्रखंड स्थित देवरी गांव को आज लोग एलोवेरा विलेज के रूप में जानते हैं. इस एलोवेरा की खेती गांव के हर आंगन और खेत में बखूबी हो रही है. ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के वाहक बन रहे हैं एलोवेरा की खेती.

मंजू कच्छप, मुन्नी दीदी, रेणु समेत दर्जनों महिलाएं एलोवेरा के नन्हें पौधों को सींच कर खुद के स्वावलंबन की वाहक बन रही है. मंजू कहती हैं कि एलोवेरा ने पूरे राज्य में हमारे गांव का मान बढ़ाया है. अब इस गांव को लोग एलोवेरा विलेज के नाम से जानते हैं जो हमें गौरवान्वित करता है. हम पूरी मेहनत से राष्ट्रीय स्तर पर अपने गांव का नाम रोशन करेंगे.

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बिक रहे एलोवेरा के पत्ते, एलोवेरा जेल बनाने में जुटीं महिलाएं

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से एलोवेरा विलेज में उगाये जा रहे एलोवेरा की मांग पूरे राज्य में है. ग्रामीण महिलाएं 35 रुपये प्रति किलो के हिसाब से इसके पत्ते बेच रही है. मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही. यही वजह है कि अन्य खेतिहर परिवार भी एलोवेरा की खेती में आगे आ रहे हैं. मंजू कहती हैं कि एलोवेरा जेल की मांग इन दिनों काफी बढ़ी है. हमें जेल निकालने की मशीन सरकार जल्द उपलब्ध करा रही है. इसके बाद पत्तों के साथ- साथ हम जेल भी तैयार करेंगे. इसके लिए उत्पादक समूह बनाने की कार्य योजना है.

ना सिंचाई का झंझट और ना ही लागत

ग्रामीण महिलाओं के मुताबिक, अधिक धूप की वजह से सिंचाई की जरूरत पड़ती है. इसके पौधरोपण में भी किसी प्रकार का खर्च नहीं होता. एक पौधा से दूसरा पौधा तैयार होता है, जिसमें किसी प्रकार का निवेश नहीं होता और बाजार भी उपलब्ध है. इन्हीं पौधों से अन्य खेतों में भी रोपण कार्य हुआ है, जिसका सुखद परिणाम कुछ माह बाद देखने को मिलेगा. राज्य सरकार का साथ यूं ही मिलता रहा, तो वृहत पैमाने पर खेती करने से महिलाएं पीछे नहीं हटेंगी.

Posted By : Samir Ranjan.

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