खेलो झारखंड: आयोजन पर 1 करोड़ से ज्यादा खर्च, लेकिन बच्चों के पास खेलने के लिए जूते नहीं, जिम्मेदार कौन?

Updated at : 16 Dec 2022 10:00 AM (IST)
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खेलो झारखंड: आयोजन पर 1 करोड़ से ज्यादा खर्च, लेकिन बच्चों के पास खेलने के लिए जूते नहीं, जिम्मेदार कौन?

बच्चे पहले तो बिना जूते-मोजा के मार्च पास्ट में शामिल हुए. जब खेलकूद शुरू हुआ, तो कुछ बच्चे एक-दूसरे से जूते लेकर प्रतियोगिता में भाग ले रहे थे. लांग जंप के प्रतिभागियों ने भी बिना जूतों के ही लंबी छलांग लगायी

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राज्यस्तरीय खेलो झारखंड प्रतियोगिता गुरुवार को राजधानी रांची में शुरू हुआ. शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने इसका उद्घाटन किया. प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए राज्य भर के प्रतिभागी रांची पहुंचे हैं. विद्यालय और जिला स्तर पर प्रतिभा दिखाने के बाद राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में पहुंचे इन बच्चों के पास जूते तक नहीं थे. आयोजन पर एक करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हो रहा है, तब यह आलम है.

बच्चे पहले तो बिना जूते-मोजा के मार्च पास्ट में शामिल हुए. जब खेलकूद शुरू हुआ, तो कुछ बच्चे एक-दूसरे से जूते लेकर प्रतियोगिता में भाग ले रहे थे. लांग जंप के प्रतिभागियों ने भी बिना जूतों के ही लंबी छलांग लगायी. 800 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में कई प्रतिभागी बिना जूतों के ट्रैक पर दिखे. बाद में तकनीकी पदाधिकारियों के कहने पर बच्चे दूसरों से जूते मांग कर दौड़े.

बच्चों के लिए कोई राशि नहीं :

खेलो झारखंड प्रतियोगिता में हॉकी, फुटबॉल, वाॅलीबॉल, कबड्डी, तीरंदाजी, कराटे, एथलेटिक्स का आयोजन किया जा रहा है. राज्य के सभी जिलों के बच्चे इसमें भाग ले रहे हैं. खेलों का आयोजन तो किया जा रहा है, पर इसमें भाग लेनेवाले प्रतिभागियों को ड्रेस, जूते-मोजे से लेकर अन्य आवश्यक सामग्री के लिए कोई राशि उपलब्ध नहीं करायी गयी है.

राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए रांची जिले को 20 हजार रुपये व अन्य िजले को इससे अधिक पैसे िदये गये. यह राशि बच्चों को लाने और ले जाने के लिए दी गयी है. एक जिले से लगभग सौ बच्चे प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं. समग्र शिक्षा अभियान के तहत बच्चों को पोशाक व जूते-मोजे के लिए प्रति वर्ष राशि दी जाती है.

क्या कहते हैं शिक्षा मंत्री

शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए खेलो झारखंड प्रतियोगिता शुरू की गयी है. राज्यस्तर पर प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों के पास जूते-मोजे भी थे. ऐसा हो सकता है कि कुछ बच्चों ने उस समय जूते नहीं पहने हों.

जगरनाथ महतो, शिक्षा मंत्री

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