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Karma Puja: करम परब की पूर्व संध्या पर मोरहाबादी में दिखी आदिवासी संस्कृति

Updated at : 13 Sep 2024 10:50 PM (IST)
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करम परब की पूर्व संध्या पर युवतियों में था जबर्दस्त उत्साह. फोटो : राज कुमार शर्मा

Karma Puja: झारखंड में शुक्रवार को करम परब की पूर्व संध्या का आयोजन किया गया. रांची समेत राज्य के अलग-अलग जिलों में आदिवासी संस्कृति जीवंत हो उठी.

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Karma Puja: करम परब झारखंड के सबसे महत्वपूर्ण उत्सवों में एक है. भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है यह पर्व. भाई की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना के लिए बहनें करम पर्व मनाती हैं. व्रत रखतीं हैं.

पूरे झारखंड ही नहीं, बल्कि उन तमाम राज्यों में करम पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, जहां आदिवासी रहते हैं. करमा को कुड़मी समाज का त्योहार माना जाता है, लेकिन धीरे-धीरे अब अन्य आदिवासी समुदायों में भी यह लोकप्रिय हो गया है.

झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी में करम पूर्व संध्या की परंपरा है. इस बार भी मोरहाबादी के दीक्षांत मंडप में करम पूर्व संध्या का आयोजन किया गया. इसमें रांची विश्वविद्यालय की छात्राओं ने लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनकर जमकर नृत्य किया.

लाल बॉर्डर की सफेद साड़ी और लाल ब्लाउज पहनी युवतियों ने सिर सिर पर कास के फूल भी लगा रखे थे. इन युवतियों ने मोरहाबादी दीक्षांत मंडप में आदिवासी संस्कृति को जीवंत कर दिया. मांदर की थाप पर घंटों नृत्य का दौर चला. रांची के अलावा झारखंड के अन्य जिलों में भी करम पूर्व संध्या का आयोजन हुआ.

केंद्रीय सरना समिति शनिवार को धनबाद के झारखंड मैदान में करम महोत्सव का आयोजन करेगा. शाम में परवैतीन व अन्य लोगों का जुटान होगा. भाई नियम से करम डाल लाकर बहनों को देंगे. बहनें उसे स्थापित कर उसकी पूजा करेंगी. उसके बाद जवैती दल पारंपरिक नृत्य करेंगे. कार्यक्रम के बाद प्रसाद वितरण किया जायेगा.

लातेहार जिले में लोगों ने पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों से करमा के दौरान प्रबुद्ध लोगों व पंचायत प्रतिनिधियों से टोले-मोहल्ले में निगरानी रखने की अपील की है. पूजा के दूसरे दिन करमा डाली का विसर्जन होता है. इसमें कोई डूबे नहीं, इसके मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए.

गुमला के सिसई बाजारटांड़ स्थित केंद्रीय सरना स्थल पर करम पूर्व संध्या कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इसमें 25 गांवों के खोड़हा दल की टीमों ने भाग लिया और करमा गीत व नृत्य प्रस्तुत किए. गीत, संगीत व नृत्य आदिवासियों की सभ्यता व संस्कृति है, जो पूर्वजों से मिली है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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