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कांटा घर बंद रहने से कंपनी को रोज करोड़ों का नुकसान

Updated at : 15 Jan 2025 6:08 PM (IST)
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कांटा घर बंद रहने से कंपनी को रोज करोड़ों का नुकसान

केडीएच और चूरी कांटा घर के डिजिटाइजर में चिप सेट करने का मामला सामने आने के बाद पिछले 21 दिनों से डकरा को छोड़कर क्षेत्र के सभी कांटा घर बंद हैं.

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कछुए की चाल से चल रही जांच-पड़ताल

सीसीएल पदाधिकारी कुछ भी बताने से कर रहे इंकार

प्रतिनिधि, डकरा

केडीएच और चूरी कांटा घर के डिजिटाइजर में चिप सेट करने का मामला सामने आने के बाद पिछले 21 दिनों से डकरा को छोड़कर क्षेत्र के सभी कांटा घर बंद हैं. अब चूरी परियोजना में कोयला उत्पादन बंद कर दिया गया है, क्योंकि यहां जिस बंकर में कनवेयर बेल्ट से कोयला गिरता है वहां बंकर से ऊपर कोयले का स्टाॅक जमा हो गया है. कोयला रखने की जगह नहीं बची है. कोयला डिस्पैच के नाम पर सिर्फ डकरा का रोड सेल चल रहा है, जिससे रोजाना औसतन 250 टन कोयला की ढुलाई हो रही है. कुछ लोगों ने बताया कि एरिया से प्रतिदिन 3200 टन कोयला डिस्पैच होता था और घटना के बाद से 250-300 टन हो पा रहा है. केडीएच और चूरी में कोयला के स्टाॅक में अब आग लगने की संभावना को लेकर अधिकारियों की बेचैनी बढ़ी हुई है. उत्पादित कोयला डिस्पैच नहीं होने से सीसीएल को सीधे तौर पर और राज्य सरकार को राजस्व के रूप में बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है. कोयला रेलवे साइडिंग से बाहर जाता है वह साइडिंग नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे रेलवे को भी नुकसान हो रहा है. चूरी में कई ट्रकों में कोयला लोड है जो उसी हालत में फंसा है और ऐसे ट्रक मालिकों को प्रतिदिन के हिसाब से आर्थिक नुकसान हो रहा है. ऑक्शन का लगभग 32000 टन कोयला का उठाव पूरी तरह से रुका हुआ है. कारोबारियों ने 16 करोड़ रुपये लगाकर 32000 टन कोयला खरीदा है. तय समय पर इस कोयले का उठाव नहीं हुआ तो नियम के मुताबिक प्रति टन 250 रुपये की कटौती के साथ कोयला लैंप्स होने पर कोयला कारोबारियों को लगभग 80 लाख रुपये का नुकसान होगा. कांटाघर के आसपास छोटे-छोटे होटल और दुकान वाले बेरोजगार हो गए हैं और उनके पास भी काम नहीं है.

डैमेज कंट्रोल करने को लेकर बनी है फेज वाइज सहमति

सीसीएल प्रबंधन में बैठे संबंधित विभाग के अधिकारियों और राज्य सरकार के माप-तौल विभाग के पदाधिकारियों के बीच शुरुआती बयानबाजी से डैमेज हुई व्यवस्था को कंट्रोल करने के लिए फेज वाइज सहमति बनी है. यही वजह है कि कांटा घर की स्टंपिंग का काम फिलहाल रोक दिया गया है. 28 दिसंबर के बाद सीसीएल ने एनके एरिया की अन्य नौ कांटा घर की जांच नहीं की क्योंकि उस दिन केडीएच और चूरी कांटा घर में चिप मिलने के बाद सीसीएल अधिकारियों ने माप-तौल विभाग और एएमसी कंपनी को सीधे तौर पर जिम्मेदार बताया था. एएमसी कंपनी पर तो दिखावे के लिए कार्रवाई कर दी गई, लेकिन माप-तौल विभाग से भिड़ने के मामले में सीसीएल ने शांत रहने में भलाई समझी और इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया. वहीं, माप-तौल विभाग की इंस्पेक्टर संगीता बाड़ा ने 31 दिसंबर को जांच के बाद सीसीएल पर बड़ी कार्रवाई करने की बात मीडिया से की थी, लेकिन वह भी रहस्यमय तरीके से चुप हो गयी. सूत्र बता रहे हैं कि हाइलेवल पर इस मामले को दबाने की कार्ययोजना तैयार की गयी है, जिसके तहत पहले फेज में कोई भी एक दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर बात नहीं करने की सहमति बनायी है. दूसरे फेज में मामला पर कुछ दिनों तक कुछ नहीं करने की सहमति बनी है, लेकिन दूसरे फेज की सहमति अब कोलियरी क्षेत्र में भारी पड़ने लगा है और जल्द कोई पहल नहीं हुई तो यह मामला बड़ा बवाल की तरफ बढ़ सकता है.

मामला पेचीदा है इसलिए लग रहा समय : सेल्स ऑफिसर

एनके एरिया के सेल्स ऑफिसर मोहन शर्मा ने कहा कि हमलोग खुद बेचैन हैं, लेकिन मामला पेचीदा है इसलिए समय लग रहा है. चिप मिला है वहां बगैर पुलिस की जांच के पहले कुछ नहीं हो सकता है. चूरी में दूसरा कांटा घर चालू करने के पहले कुछ जरूरी काम करना है जो तकनीकी कारणों से फंसा हुआ है.

मजिस्ट्रेट नियुक्त होने का इंतजार : सुरक्षा अधिकारी

मुख्य सुरक्षा अधिकारी नीतीश कुमार झा ने बताया कि कांटा घर की जांच पुलिस को दी गयी है और अभी तक न्यायालय की ओर से मजिस्ट्रेट नियुक्त नहीं किया गया है. इसके कारण जांच शुरू नहीं हो सकी है. जांच के बाद आगे का काम हो सकता है.

समय के साथ असली लाभार्थी का चेहरा बेनकाब हो रहा है : कमलेश

कांटा घर का वजन रिमोट से कंट्रोल करने के मामले में जांच में जितना विलंब हो रहा है, उससे मिलीभगत और असली लाभार्थी का चेहरा बेनकाब हो रहा है. सीसीएल सलाहकार समिति सदस्य कमलेश कुमार सिंह ने कहा कि शुरुआत में यह स्क्रैप उठाने वालों का कारनामा लग रहा था, लेकिन मामला प्रकाश में आने के बाद जिस तरह सीसीएल में बैठे अधिकारी और माप-तौल विभाग के लोग काम कर रहे उससे असली लाभार्थी का चेहरा स्वत: बेनकाब हो रहा है. कहा कि सीएमडी के समक्ष सबसे बड़ी समिति में इसे उठाया गया है. अब उचित प्लेटफाॅर्म पर सीसीएल से पूछा जायेगा कि माप-तौल विभाग से क्या पत्राचार हुआ है? और माप-तौल ने सीसीएल को लेकर क्या किया है? बताया कि हमलोग वेट एंड वाच की रणनीति पर काम कर रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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