खुले में काटे जा रहे 2400 जानवर : 18 करोड़ खर्च तो हो गए, लेकिन स्लॉटर हाउसेज में लटक रहा है ताला

स्लॉटर हाउस
रांचीवासी आज भी सड़क किनारे बिना लाइसेंस के चल रही दुकानों से खस्सी और बकरे का मांस खरीदने को विवश हैं. इन दुकानों में न तो हाइजीन मेंटेन किया जाता है और न ही जानवरों को काटने से पहले उनकी मेडिकल जांच की जाती है. उधर, रांची नगर निगम की ओर से 18 करोड़ रुपये की लागत से कांके में स्थापित किये गये स्लॉटर हाउस (वधशाला) पर छह साल से ताला लटका हुआ है. वहीं, इसके अंदर जानवरों को काटने और मीट को प्रोसेस करने के लिए लगायी गयीं अत्याधुनिक मशीनें जंग खा रही हैं.
उत्तम महतो की रिपोर्ट
Ranchi Slaughter House News: कांके में पांच एकड़ जमीन पर रांची नगर निगम ने अत्याधुनिक स्लॉटर हाउस का निर्माण कार्य वर्ष 2012-13 में शुरू हुआ था. लंबे इंतजार के बाद मई 2018 में इसका उद्घाटन किया गया और संचालन का जिम्मा दिल्ली की कंपनी माइक्रो सिस्टम को सौंपा गया. उस वक्त बताया गया कि प्रतिदिन यहां 2000 खस्सी/भेड़ काटने की क्षमता है. इस वधशाला में जानवरों को काटने, मांस को साफ और हाइजीन मेंटेन रखने के लिए जर्मनी से मंगाये गये उपकरण लगाये गये थे. यहां एक पशु चिकित्सक की पदस्थापना की भी योजना थी, जिन्हें जानवरों के कटने से पहले उसकी मेडिकल जांच करनी थी. इस वधशाला से शहर की दुकानों तक मांस की सप्लाई के लिए दो डीप फ्रीजर युक्त वैन की व्यवस्था की गयी थी. यहां काटे गये पशुओं का मांस इसी वैन से शहर की दुकानों तक पहुंचाया जाना था. लोगों सहूलियत के लिए नगर निगम ने राजधानी में पांच केंद्र भी बनाये थे. इसके अलावा यहां आमलोग भी अपने पशु को लाकर हलाल और झटका दोनों विधि से कटवा सकते थे, जिसके लिए उनसे शुल्क वसूलने की व्यवस्था की गयी थी.
गली-मोहल्ले की दुकानें चलती रही, बंद हो गया स्लॉटर हाउस
रांची नगर निगम के ढुलमुल रवैये की वजह से करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया स्लॉटर हाउस कुछ दिनों बाद ही बंद हो गया. बीच में एक-दो बार इसे शुरू करने की कोशिश की गयी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली. दरअसल, शहर के गली-मोहल्लों में बिना लाइसेंस के चल रहे मीट शॉप को नगर निगम ने बंद नहीं कराया. नियमानुसार, गली-मुहल्ले की मीट शॉप को भी नगर निगम से लाइसेंस लेना था. इन दुकानदारों को भी अपने जानवर स्लॉटर हाउस में ही कटवाने थे या फिर वहां से पैकेज्ड मीट लाकर अपनी दुकानों में बेचना था, लेकिन नगर निगम इस नियम का पालन कराने में फेल हो गया. नतीजतन, 2000 जानवर रोजाना काटने की क्षमता रखनेवाले स्लॉटर हाउस में दिनभर में महज 10 से 12 जानवर ही काटे जा रहे थे, जिससे नगर निगम को मुनाफा नहीं हो रहा था.
राजधानी में हैं 800 से अधिक मीट शॉप, किसी के पास लाइसेंस नहीं
राजधानी के विभिन्न हिस्सों में 800 से अधिक मीट शॉप हैं. एक अनुमान के मुताबिक, हर दुकान में अगर एक दिन में तीन खस्सी ही काटे जाते हों, तो रोजाना शहर भर में 2400 बकरे-खस्सी को खुलेआम काटे जा रहे हैं. सबसे चिंताजनक यह है कि इन दुकानों में न तो साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था है और न ही कोल्ड स्टोरेज की सुविधा. कई जगहों पर मीट खुले में टांगा जाता है, जिस पर दिन भर मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं. खुले में काटे जाने के कारण इसके रक्त और अन्य अवशेषों को खुली नाली में ही डाल दिये जाते हैं. ऐसे में लोगों को नाली जाम के साथ दुर्गंध से भी जूझना पड़ रहा है. नगर निगम या जिला प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं किये जाने की वजह से इन दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं.
नहीं बनी नियमावली, हाइकोर्ट ने दिया था दो माह का समय
29 अप्रैल को झारखंड हाइकोर्ट ने राजधानी सहित पूरे राज्य के दुकानों में खुलेआम काट कर बकरे व मुर्गे की बिक्री के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बीते सुनवाई की थी. चीफ जस्टिस एमएस सोनक व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के जवाब को देखा. खंडपीठ ने इस बात पर नाराजगी जतायी कि मामले में अब तक सिर्फ पत्र लिख कर एक-दूसरे पर फेंकाफेंकी की जा रही है. नियमावली बनाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया है. खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को मामले को देखने का निर्देश दिया और दो माह में मॉडल नियमावली बना कर पेश करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने पूछा कि फूड सेफ्टी रेगुलेशन-2011 का पालन करने के लिए क्या कदम उठाया गया है? मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होनी है.
स्वास्थ्य विभाग के एसीएस ने क्या कहा?
स्वास्थ्य विभाग के एसीएस अजय कुमार सिंह ने कहा कि यह विषय व्यापक जनहित और कई महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़ा हुआ है. इसलिए नियमावली के प्रत्येक बिंदु पर गहन अध्ययन और विचार-विमर्श के बाद ही प्रारूप तैयार किया जा रहा है. विभाग विभिन्न तकनीकी और कानूनी पहलुओं की भी समीक्षा कर रहा है. प्रारूप तैयार होने के बाद इसे जल्द सार्वजनिक किया जायेगा.
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फिजीशियन ने क्या कहा?
डॉ हरीश कुमार, फिजीशियन, रांची सदर अस्पताल ने कहा कि खुले में रखे मांस में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं. इससे फूड प्वाइजनिंग, डायरिया, टाइफाइड और अन्य संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है. बिना मेडिकल जांच वाले जानवरों का मांस स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. गर्मी और बरसात के मौसम में खुले मीट में संक्रमण तेजी से फैलता है.
मेयर ने क्या कहा?
रोशनी खलखो, मेयर, रांची नगर निगम ने कहा कि स्लॉटर हाउस शहर का एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है. इसे जल्द से जल्द दोबारा शुरू कराने को लेकर बहुत जल्द अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की जायेगी. इसके संचालन में जो भी बाधाएं आ रही हैं, उन्हें दूर कर इसे नये सिरे से शुरू कराया जायेगा.
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By श्वेता वैद्य
श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में श्वेता झारखंड बीट को कवर कर रही हैं, जहां वह राज्य की ताजा खबरें, लोगों की भलाई से जुड़े मुद्दे, सरकारी योजनाओं, स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विषयों पर आधारित स्टोरीज तैयार करती हैं. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो.
झारखंड बीट से पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर आर्टिकल लिखे.
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