JPSC Student Protest: सरकार और छात्रों के बीच चौथे दौर की वार्ता, कांग्रेस ने की भरोसा रखने की अपील

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रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस, जहां सरकार और छात्रों के बीच हो रही बातचीत. फोटो: प्रभात खबर

रांची में JPSC/JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और झारखंड सरकार के बीच चौथे दौर की वार्ता जारी है. कांग्रेस ने छात्रों से सरकार पर भरोसा रखने की अपील की है. देखें आगे क्या होता है.

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रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट

JPSC Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और झारखंड सरकार के बीच चौथे दौर की वार्ता शुरू होने वाली है. मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में लगातार तीन दौर की बातचीत के बाद एक बार फिर सरकार और छात्र प्रतिनिधि से बातचीत करने के लिए तैयार हो गई है. इस बीच कांग्रेस की ओर से छात्रों से सरकार पर भरोसा रखने की अपील की गई है. कांग्रेस नेता ने कहा कि अतीत में गलतियां हुई हैं, लेकिन अब सरकार छात्रों के साथ गलत नहीं होने देगी. जाहिर है, भरोसे की बहाली का काम आसान नहीं है, क्योंकि छात्रों का आंदोलन केवल आश्वासनों से शांत होने वाला मामला नहीं रह गया है.

पहले दौर में छात्रों ने रखीं अपनी प्रमुख मांगें

सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत की शुरुआत छात्रों की प्रमुख मांगों को लेकर हुई थी. छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे. सरकार की ओर से भी छात्रों की बात सुनने और समाधान निकालने का भरोसा दिया गया.

हालांकि पहले दौर की बातचीत में तत्काल सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी. छात्रों ने साफ किया कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है और वे अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं. इसी वजह से आगे की वार्ता का रास्ता खुला रखा गया.

दूसरे दौर में समाधान और जांच के मुद्दों पर हुई चर्चा

दूसरे दौर की बातचीत में सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का संकेत दिया गया. परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य में भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. सरकार और छात्रों के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति बनने के संकेत जरूर मिले, लेकिन सभी मांगों पर अंतिम फैसला नहीं हो सका. इसके बाद दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने का निर्णय लिया. आंदोलनकारी छात्रों ने भी स्पष्ट किया कि वे वार्ता के पक्ष में हैं, लेकिन उनके लिए निष्कर्ष और कार्रवाई ज्यादा महत्वपूर्ण है.

तीसरे दौर से पहले प्रतिनिधिमंडल पर फंसा था पेंच

तीसरे दौर की वार्ता में छात्र प्रतिनिधिमंडल को लेकर कुछ समय तक गतिरोध बना रहा. छात्रों ने पहले 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार किया था, लेकिन सरकार ने इसमें शामिल तीन गैर-छात्र प्रतिनिधियों पर आपत्ति जताई. इसके बाद वार्ता के लिए 10 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल तय किया गया. प्रशासन के स्तर पर सदर एसडीओ कुमार रजत और एडीएम लॉ एंड ऑर्डर धनंजय कुमार ने आंदोलन स्थल पर छात्रों से बातचीत की और नए प्रतिनिधिमंडल को लेकर सहमति बनाने की कोशिश की. छात्रों के बीच भी प्रतिनिधिमंडल को लेकर मतभेद था. कुछ छात्र नेताओं ने अलग से बैठक कर प्रतिनिधियों के नाम तय किए. अंततः सरकार ने 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की. इसमें रवींद्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार शामिल रहे.

चौथे दौर की वार्ता पर टिकीं सबकी निगाहें

अब चौथे दौर की वार्ता में छात्रों की मांगों और सरकार के प्रस्तावों पर आगे की बातचीत हो रही है. कांग्रेस की ओर से भरोसा रखने की अपील करते हुए कहा गया है कि पहले गलतियां हुईं, लेकिन अब छात्रों के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा. चौथे दौर की वार्ता इसलिए अहम है क्योंकि 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के बाद अब तक की बैठकों में संवाद तो बढ़ा है, लेकिन छात्रों को ठोस और स्पष्ट समाधान का इंतजार है. सरकार के सामने चुनौती केवल वार्ता करने की नहीं, बल्कि भरोसे को ठोस फैसलों में बदलने की भी है. आखिर आंदोलन में बैठे छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बार बातचीत का नतीजा केवल अगली बैठक की तारीख बनेगा या कोई वास्तविक समाधान सामने आएगा.

बैठक में सरकार के मंत्री समूह के सदस्य

  • सुदिव्य कुमार सोनू
  • दीपिका पांडेय सिंह
  • संजय प्रसाद यादव
  • चमरा लिंडा

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10 सदस्यीय छात्र डेलिगेशन में कौन-कौन?

  • रविंद्र पासवान
  • पीयूष कुमार सिंह
  • रविंद्र कुमार रवि
  • कार्तिक सोरेन
  • राजेश प्रसाद
  • उमेश प्रसाद
  • शशांक कुमार
  • अंकित कुमार
  • आनंद कुमार
  • शालू कुमारी

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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