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JPSC विवाद मामले में अध्यक्ष ने दिया जवाब- परीक्षा नहीं रूकेगी, अभ्यर्थियों के क्रमवार सफल होने की चल रही जांच

जेपीएससी अध्यक्ष ने कहा है कि अभ्यर्थियों के क्रमवार सफल होने की जांच अभी चल रही है, लेकिन किसी भी कीमत पर परीक्षा नहीं रूकेगी. इसके अलावा अन्य मामलों पर जवाब दिया गया है.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
झारखंड लोक सेवा आयोग
झारखंड लोक सेवा आयोग
सोशल मीडिया.

JPSC PT Result 2021 रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने सातवीं, आठवीं, नौवीं व 10वीं सिविल सेवा पीटी में अभ्यर्थियों द्वारा लगाये गये आरोप का जवाब दिया है. कुल 20 आरोपों का जवाब आयोग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए दिया है. तीन जिलों यथा लोहरदगा, साहिबगंज अौर लातेहार में एक-एक परीक्षा केंद्र से क्रमवार परीक्षार्थियों के उत्तीर्ण होने को आयोग ने अपरिहार्य माना है.

साथ ही कहा है कि इसके लिए अभ्यर्थी को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है. आयोग ने यह भी कहा है कि ऐेसे अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है कि उन्हें अौपबंधिक रूप से क्वालीफाई घोषित किया जायेगा. इसके बाद भी जांच जारी रहेगी. एक छोटी संख्या के मामले को लेकर संपूर्ण परीक्षा परिणाम को रोक कर नहीं रखा जा सकता है.

नि:शक्त कोटा का कट ऑफ मार्क्स निर्धारित

अभ्यर्थियों द्वारा कहा गया कि पूरे भारत में जेपीएससी ही एकमात्र एेसा आयोग है, जहां एक ही सेंटर के एक ही कमरे से सभी छात्र पास कर जाते हैं. इस पर आयोग ने कहा है कि यह दावा तथ्यों से परे है. आयोग ने अभ्यर्थियों के इस आरोप का जवाब भी दिया है, जिसमें कहा गया है कि कुछ होनहार अभ्यर्थी अधिक अंक लाकर भी पीटी में अनुत्तीर्ण हो गये. आयोग ने कहा है कि वास्तविकता यह है कि बिना कट अॉफ की जानकारी हुए यह तर्क आधारहीन है. जिस अभ्यर्थी की बात की जा रही है, उसे अपने कोटि अनारक्षित के कट अॉफ 260 से कम 240 अंक ही प्राप्त हुए हैं.

आयोग ने अभ्यर्थियों की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें फेल व पास सभी अभ्यर्थी के मार्क्सशीट जारी करने को कहा गया है. अभ्यर्थी द्वारा पूछे गये सवाल कि चार जिलों रांची, बोकारो, जमशेदपुर अौर धनबाद के अपेक्षाकृत पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, के जवाब में अायोग ने कहा है कि यह प्रश्नकर्ता के मस्तिष्क में पूर्वाग्रह को दर्शाता है.

Posted By : Sameer Oraon

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Published Date

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