जोन्हा की श्रीराम की बाल लीलाओं को सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु, राम कथा का छठा दिन

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रांची के जोन्हा स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में रामकथा करते आचार्य धर्मराज शास्त्री. फोटो: प्रभात खबर

Jonha Ram Katha: रांची के जोन्हा में आयोजित श्रीराम कथा के छठे दिन भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया. कथा व्यास के प्रवचन और भक्ति गीतों से श्रद्धालु भावविभोर हो गए. पूरे क्षेत्र में भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक माहौल का अद्भुत संगम देखने को मिला. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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अनगड़ा से जितेंद्र कुमार की रिपोर्ट

Jonha Ram Katha: झारखंड में रांची जिले के जोन्हा स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के छठे दिन भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला. कथा व्यास आचार्य धर्मराज शास्त्री ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का ऐसा सजीव वर्णन किया कि पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा. श्रद्धालु भाव-विभोर होकर प्रभु की बाल लीलाओं में डूबते नजर आए.

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बाल रूप की झांकी ने मोह लिया मन

कथा के दौरान भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई. इस झांकी को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा कथा स्थल अयोध्या के राजमहल में परिवर्तित हो गया हो. श्रद्धालुओं ने प्रभु के बाल रूप के दर्शन कर गहरी आस्था और प्रेम का अनुभव किया. वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया.

भक्ति गीतों में डूबे श्रद्धालु

आचार्य धर्मराज शास्त्री ने ‘ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैजनियां…’ भजन का भावपूर्ण गान करते हुए बाल लीलाओं का वर्णन किया. इस दौरान महिलाएं और अन्य श्रद्धालु वात्सल्य रस में डूबकर झूमने लगे. भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से पूरा जोन्हा क्षेत्र राममय हो गया. हर ओर भक्ति और प्रेम का अद्भुत माहौल नजर आया.

बाल लीलाओं में छिपा संस्कारों का संदेश

व्यासपीठ से आचार्य ने बताया कि भगवान श्रीराम की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण संस्कारों का संदेश भी देती हैं. माता कौशल्या और राजा दशरथ के साथ प्रभु के बाल रूप की लीलाएं वात्सल्य प्रेम और आदर्श पारिवारिक जीवन का प्रतीक हैं. बाल रूप में प्रभु की सरलता और मधुर चेष्टाएं हर किसी का मन मोह लेती हैं.

धर्म रक्षा के प्रसंगों का भी वर्णन

कथा के दौरान आचार्य ने महर्षि विश्वामित्र के ब्रह्मऋषि बनने की कथा का भी वर्णन किया. साथ ही उन्होंने बताया कि किस प्रकार धर्म की रक्षा के लिए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को राजा दशरथ से मांगा गया. राक्षसों के वध और धर्म की स्थापना के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया.

महाआरती और भंडारे का आयोजन

कथा के विश्राम के बाद भगवान श्रीराम की भव्य महाआरती की गई. आरती के बाद आयोजित भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. इस दौरान भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का विशेष माहौल देखने को मिला.

आयोजन में जनप्रतिनिधियों और समिति की भूमिका

इस धार्मिक आयोजन में कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए. भाजपा नेता रणधीर चौधरी और अजय महतो समेत आयोजन समिति के अध्यक्ष बलराम साहू, संयोजक संतोष साहू और अन्य सदस्य सक्रिय रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे रहे.

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आस्था और भक्ति का अनुपम संगम

कुल मिलाकर जोन्हा में श्रीराम कथा के छठे दिन भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला. भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं के वर्णन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध किया और पूरे क्षेत्र को राममय बना दिया.

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