उत्तराखंड में फंसे मजदूरों के परिजन 13 दिनों से नहीं सो पाये हैं ठीक से, हर दिन ऐसे कट रही है उनकी जिंदगी

मजदूर राजेंद्र बेदिया की मां फूलकुमारी देवी के अनुसार, उनके पति दिव्यांग हैं. राजेंद्र ही घर का इकलौता कमाऊ सदस्य है. वह पूरे परिवार का सहारा है. फूलकुमारी की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे.
रांची : उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे मजदूरों के परिजनों में एक नयी आस जगी है. गुरुवार को खीराबेड़ा निवासी मजदूर अनिल बेदिया, राजेंद्र बेदिया और सुकराम बेदिया के परिजनों को जानकारी मिली कि किसी भी वक्त सुरंग में फंसे मजदूरों को निकाला जा सकता है. इसके बाद से ही सभी लोग दिन भर टीवी के सामने चिपके रहे. हालांकि, शाम तक जब मजदूरों को नहीं निकाला जा सका, तो वे निराशा हो गये. शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की ओर से सभी मजदूरों के सुरक्षित होने की घोषणा सुन परिजनों में एक नयी उम्मीद जग गयी. परिजनों ने कहा कि पिछले 13 दिन से वे ठीक से सो नहीं पाये हैं. तीनों मजदूरों के परिवार के लोग देवी-देवताओं की पूजा कर रहे हैं और मन्नतें मांग रहे हैं. इस बीच शुक्रवार को भी उनके घरों पर ग्रामीणों और रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहा.
मजदूर राजेंद्र बेदिया की मां फूलकुमारी देवी के अनुसार, उनके पति दिव्यांग हैं. राजेंद्र ही घर का इकलौता कमाऊ सदस्य है. वह पूरे परिवार का सहारा है. फूलकुमारी की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे. इसी तरह अनिल बेदिया की मां संजू देवी का भी रो-रोकर हाल बुरा है. सुकराम बेदिया की मां पार्वती देवी का कहना था कि वह हमेशा टीवी देखती रहती है, ताकि किसी तरह सूचना मिले की उनका बेटा सुरक्षित है. गौरतलब है कि खीराबेड़ा गांव से अनिल बेदिया, राजेंद्र बेदिया, सुकराम बेदिया के अलावा शंकर बेदिया, राजू बेदिया, नरेश बेदिया, ब्रजकिशोर बेदिया, रवि बेदिया आदि वहां मजदूरी करने गये हुए हैं. इनमें पांच लोग सुरक्षित बाहर हैं, जो साथियों के सुरक्षित निकलने के इंतजार में हैं.
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कर्रा. उत्तरकाशी के सुरंग में फंसे 41 मजदूरों में कर्रा प्रखंड के भी तीन मजदूर शामिल हैं. इनमें गुमड़ू गांव निवासी विजय होरो (22), डुमारी निवासी चमरा उरांव (35) व मदुगामा निवासी गनपाइत होरो (25) शामिल हैं. उनके परिजन उनके सकुशल वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. गनपाइत होरो की मां पंडरी मुंडारी की आंखों में आंसू हैं. उनके अनुसार, किसी अनहोनी की आशंका को लेकर वह पिछले कई दिनों से सो नहीं पायी हैं. परिजनों के अनुसार, गनपाइत के साथ उसका बड़ा भाई विलकन होरो भी मजदूरी के लिए गया है, लेकिन वह वहां सुरक्षित है. गनपाइत की भाभी व बिल्कन की पत्नी देवनेशिया केरकेट्टा ने बताया कि सुबह 9:00 बजे बिल्कन होरो से फोन पर बात हुई थी. मजदूर के परिजनों के अनुसार, सभी लोग विगत 16 अगस्त को वहां मजदूरी करने गये हैं.
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By Prabhat Khabar News Desk
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