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Jharkhand News : रिम्स में एमबीबीएस की सीटें बढ़ेंगी या 150 सीटों पर भी है संकट, नेशनल मेडिकल कमीशन करेगा निरीक्षण

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
Jharkhand News : रिम्स का नेशनल मेडिकल कमीशन करेगा निरीक्षण, तय होंगी सीटें
Jharkhand News : रिम्स का नेशनल मेडिकल कमीशन करेगा निरीक्षण, तय होंगी सीटें
फाइल फोटो

Jharkhand News, Ranchi News, रांची न्यूज : रिम्स में एमबीबीएस की सीटें 150 से बढ़ा कर 250 सीटें करने को लेकर अप्रैल के अंतिम सप्ताह या मई की शुरुआत में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) का निरीक्षण होना है. इस दौरान सबकुछ सही पाये जाने पर ही एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने पर एनएमसी अंतिम निर्णय लेगा. हालांकि, जानकार बताते हैं कि रिम्स में सीटी स्कैन सहित कई महत्वपूर्ण मशीनें खराब हैं. कई सुविधाओं का भी अभाव है. इस कारण कहीं 150 सीटों पर भी संकट न हो जाये.

दूसरी ओर, रिम्स प्रबंधन का कहना है कि एमबीबीएस की 250 सीटों के लिए सभी आधारभूत संरचनाएं तैयार हैं. फैकल्टी की कमी को दूर किया जा रहा है. सीनियर से लेकर जूनियर डॉक्टर के रिक्त पद पर बहाली की जा रही है. जहां तक रिम्स में महत्वपूर्ण उपकरणों की खरीदारी की बात है, तो उसकी प्रक्रिया चल रही है. एनएमसी के निरीक्षण से पहले सीटी स्कैन सहित सभी उपकरण की खरीदारी हो जायेगी. रिम्स सूत्रों का कहना है कि सीटी स्कैन मशीन की खरीदारी रिम्स द्वारा दो साल से की जा रही है, लेकिन प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो रही है.

इधर, रिम्स का कैंसर विंग सिमटता जा रहा है. 100 बेड के तैयार कैंसर इंस्टीट्यूट में 68 बेड का दावा करते हुए इसकी शुरुआत की गयी. पर 38 बेड ही आरक्षित किया गया. इधर कैंसर के मरीज बढ़ते गये, लेकिन बेड की संख्या नहीं बढ़ायी गयी. वहीं गंभीर कैंसर रोगियों के इलाज व सर्जरी के बाद उनकी देखरेख के लिए 14 बेड का आइसीयू तैयार किया गया, लेकिन अब आइसीयू पर संकट गहरा गया है. आइसीयू के गंभीर मरीजों को उसी 24 बेड में रखकर इलाज करने का निर्देश दिया गया है.

सूत्रों के अनुसार रिम्स में न्यूरोलॉजी विभाग का वार्ड स्थापित करना है, इसलिए कैंसर आइसीयू फिलहाल बंद किया जा रहा है. जरूरत पड़ने पर सर्जरी विभाग के आइसीयू में ऐसे मरीजों को शिफ्ट किया जायेगा. वहीं नेत्र विभाग जब क्षेत्रीय नेत्र संस्थान की बिल्डिंग में शिफ्ट होगा तो यूरोलॉजी विभाग, नेत्र विभाग में शिफ्ट हो जायेगा. इसके बाद कैंसर विंग में जगह खाली होने पर दोबारा कैंसर आइसीयू को संचालित किया जायेगा.

रिम्स के पीआरओ डॉ डीके सिन्हा ने कहा कि राज्य में मस्तिष्क की समस्या वाले मरीजों की संख्या बढ़ गयी है, इसलिए यहां वार्ड तैयार करना जरूरी हो गया है. न्यूरोलॉजी का अपना वार्ड नहीं होने से वर्तमान में मरीजों को क्रिटिकल केयर, मेडिसिन या न्यूरो सर्जरी के वार्ड में रखना पड़ रहा है. वहीं न्यूरोलॉजी में डीएम की पढ़ाई भी शुरू करनी है, इसके लिए भी वार्ड जरूरी है. कैंसर विंग के आइसीयू को बंद करने की कोई तैयारी नहीं है. कैंसर आइसीयू को शिफ्ट किया जा सकता है, लेकिन इसपर निर्णय उच्चतर पदाधिकारियों को लेना है.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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