अव्यवस्था ने ली डॉ गौंझू की जान, 8 घंटे में लगाये 9 अस्पतालों के चक्कर लेकिन नहीं मिला बेड

Updated at : 16 Apr 2021 6:30 AM (IST)
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अव्यवस्था ने ली डॉ गौंझू की जान, 8 घंटे में लगाये 9 अस्पतालों  के चक्कर लेकिन नहीं मिला बेड

शाम चार बजे रिम्स के इमरजेंसी वार्ड ले गये. वहां जांच के क्रम में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिजनों ने जब डेथ सर्टिफिकेट मांगा तो चिकित्सकों ने कहा कि रास्ते में उनकी मौत हो गयी थी. इसलिए डेथ सर्टिफिकेट नहीं दे सकता. पोस्टमार्टम होने के बाद ही मृत्यु प्रमाण पत्र देने की बात कही. दो-तीन घंटे इसी प्रक्रिया में बीत गये.

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  • सेवा सदन, राज, आर्किड, सेवेन डे, गुुरुनानक, मेडिका, सैमफोर्ड, सेंटेविटा, हरमू अस्पताल में नहीं मिला बेड

  • महज एक बेड के कारण पिताजी की जान चली जायेगी कभी सोचा न था : ज्ञानोत्तम

  • झारखंडी साहित्य और संस्कृति के बड़े हस्ताक्षर थे डॉ गिरधारी राम गौंझू

Jharkhand News, Ranchi News, Girdhari Ram Ganjhu Death रांची : राजधानी रांची के अस्पतालों में बेड नहीं होने के कारण इलाज के अभाव में मरीजों की जान जा रही है. गुरुवार को झारखंड के प्रख्यात शिक्षाविद, साहित्यकार व संस्कृतिकर्मी गिरिधारी राम गौंझू (72 वर्ष) ( Girdhari Ram Ganjhu )को सुबह में सांस लेने में तकलीफ हुई. इसके बाद उन्हें लेकर उनके परिजन सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक राजधानी के नौ अस्पतालों के चक्कर काटते रहे, लेकिन बेड नहीं मिला.

शाम चार बजे रिम्स के इमरजेंसी वार्ड ले गये. वहां जांच के क्रम में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिजनों ने जब डेथ सर्टिफिकेट मांगा तो चिकित्सकों ने कहा कि रास्ते में उनकी मौत हो गयी थी. इसलिए डेथ सर्टिफिकेट नहीं दे सकता. पोस्टमार्टम होने के बाद ही मृत्यु प्रमाण पत्र देने की बात कही. दो-तीन घंटे इसी प्रक्रिया में बीत गये.

व्यवस्था से आहत परिजन बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के दिवंगत गौंझू का पार्थिव शरीर हरमू स्थित आवास ले आये. शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार खूंटी स्थित पैतृक गांव बेलवादाग में होगा. दिवंगत गिरिधारी राम गौंझू के पुत्र ज्ञानोत्तम ने कहा कि : उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि बाबूजी का निधन महज एक बेड नहीं मिलने के कारण हो जायेगा.

गिड़गिड़ाते रहे लेकिन पिता को नहीं किया भर्ती

ज्ञानोत्तम बताते हैं कि पिताजी गठिया रोग से ग्रसित थे. लंग्स में भी थोड़ी परेशानी थी. इलाज चल रहा था. गुरुवार की सुबह करीब नौ बजे पिताजी को सांस लेने में तकलीफ हुई. इसके बाद हमलोग उन्हें इलाज के लिए सेवा सदन ले गये. वहां बेड खाली नहीं होने की बात कह एडमिट करने से इनकार कर दिया. इसके बाद पिताजी को लेकर राज अस्पताल, आर्किड, सेवेन डे, गुरुनानक अस्पताल, मेडिका, सैमफोर्ड, सेंटेविटा और हरमू अस्पताल गये.

हर जगह बेड फुल होने की बात कह भर्ती करने से इनकार कर दिया. सभी अस्पताल के कर्मचारियों व पदाधिकारियों के पास गिड़गिड़ाया कि पिताजी को भर्ती कर लें, लेकिन उनका कलेजा नहीं पसीजा. इसके बाद बेबस हो हमलोगों ने उन्हें रिम्स या सदर अस्पताल में भर्ती कराने की बात सोची. उन दोनों अस्पतालों के चिकित्सकों से बात करने पर उन लोगों ने कहा कि एंबुलेंस से लेकर आयेंगे मरीज को तभी देखेंगे.

इसके बाद एंबुलेंस के लिए फोन किया तो उसके चालक ने कहा कि पहले कोरोना टेस्ट करायेंगे, इसके बाद मरीज को ले जायेंगे. वे लोग बीमार पिता को लेकर किसी तरह अरगोड़ा चौक कोविड टेस्ट कराने पहुंचे. वहां पिताजी का रैपिड टेस्ट हुआ जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आयी. इस बीच पिताजी की हालत काफी खराब हो रही थी. समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें. रिपोर्ट मिलने के बाद एंबुलेंस को बुलाया गया. एंबुलेंस से रिम्स ले गये. वहां इमरजेंसी में भर्ती कराया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

झारखंडी साहित्य और संस्कृति के बड़े हस्ताक्षर थे डॉ गिरधारी राम गौंझू

प्रख्यात शिक्षाविद, नागपुरी साहित्यकार व संस्कृतिकर्मी गिरिधारी राम गौंझू रांची विवि जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा विभाग के पूर्व अध्यक्ष थे. सरल व मिलनसार स्वभाववाले डॉ गौंझू प्रभात खबर द्वारा प्रकाशित माय माटी के नियमित लेखक भी रहे.

इनका जन्म पांच दिसंबर 1949 को खूंटी के बेलवादाग गांव में हुआ था. इनके पिता का नाम इंद्रनाथ गौंझू व मां का नाम लालमणि देवी था. ये रांची के हरमू कॉलोनी में रहते थे. डॉ गौंझू रांची विवि स्नातकोत्तर जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा विभाग में दिसंबर 2011 में बतौर अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त हुए. डॉ गौंझू एक मंझे हुए लेखक रहे. इनकी अब तक 25 से भी पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. इसके अलावा कई नाटकें भी लिखी हैं.

पापा ने कहा, रिम्स मत लेकर जाओ, नहीं मिलेगा बेड

प्राइवेट अस्पतालों ने जब भर्ती करने से इनकार कर दिया, तो एंबुलेंस से लेकर पिताजी को रिम्स ले जाने लगे . इस दौरान पिताजी खुद ही एंबुलेंस में चढ़ गये और कहा कि रिम्स मत ले जाओ बाबू, वहां जब बड़े-बड़े आदमी का एडमिशन नहीं हो पाया तो तुम मुझे कैसे भर्ती करा पाओगे.

डॉ गौंझू ने विरासत को सहेजा

डॉ गिरिधारी राम गौंझू के निधन से आहत हूं. उन्होंने राज्य की नागपुरिया संस्कृति, नृत्य, गीतों पर किताब लिखकर स्थानीय विरासत और पहचान को सहेजने का काम किया था. झारखंड उनके योगदान को सदैव याद रखेगा. परमात्मा उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें.

हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखंड

राज्यपाल ने शोक जताया, अस्पतालों के रवैये से असंतुष्ट

राज्यपाल सह कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने डॉ गिरिधारी राम गौंझू के निधन पर गहरा दु:ख व शोक व्यक्त किया है. साथ ही डॉ गौंझू के साथ अस्पताल प्रबंधन द्वारा बरती गयी लापरवाही पर रोष व्यक्त किया. उन्होंने कहा है कि हमने कोरोना महामारी के बीच डॉ गौंझू जैसे विद्वान को खो दिया है. उनका निधन शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. राज्यपाल ने कोरोना से लड़ने के लिए वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग की टीम को सक्रियता से कार्य करने को कहा.

कैसे इस महामारी से हम बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं, इस पर सरकारी अस्पताल व निजी अस्पताल को संकल्प के साथ आगे आना होगा. राज्यपाल ने कहा है कि कोरोना जांच की गति में तेजी लानी होगी. कोरोना जांच रिपोर्ट का लंबित रहना भी खराब कार्यशैली को दिखाता है. हमें टेस्टिंग, टेस्टिंग रिपोर्ट और उपचार इन तीनों बिंदुओं पर ध्यान देना होगा.

Posted By : Sameer Oraon

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