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नामांकन से कम हुई छपाई, 46 लाख बच्चों को नहीं मिली किताबें

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
सीएजी की रिपोर्ट के हालिया रिपोर्ट में ये बात सामने आयी है कि झारखंड में छात्रों के नांमकन से कम किताबों की छपाई हुई है, जिसमें करीब 46 लाख बच्चों को किताबें नहीं मिली है
सीएजी की रिपोर्ट के हालिया रिपोर्ट में ये बात सामने आयी है कि झारखंड में छात्रों के नांमकन से कम किताबों की छपाई हुई है, जिसमें करीब 46 लाख बच्चों को किताबें नहीं मिली है
सांकेतिक तस्वीर

रांची : राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में नामांकित बच्चों की संख्या के हिसाब से किताब की छपाई नहीं होने की वजह से सभी बच्चों को किताबें नहीं मिल पाती हैं. इसका खुलासा भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2010 से 2016 के बीच सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में 3.25 करोड़ बच्चों के लिए 2.79 करोड़ सेट किताबों की छपाई की गयी.

इस कारण राज्य के 46 लाख बच्चे किताब से वंचित रह गये. रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के चार जिलों- देवघर, गिरिडीह, पाकुड़ और सिमडेगा के 16.83 लाख बच्चों के बीच किताबें नहीं बांटी जा सकीं.

गिरिडीह और पाकुड़ के 42 विद्यालयों में की गयी जांच में पाया गया कि पहली से आठवीं कक्षा तक के 35225 बच्चों में से 12576 बच्चों को इस दौरान किताबें नहीं मिलीं. झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा रखे गये अपने पक्ष में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा नामांकन नहीं, बल्कि उपस्थिति के आधार पर किताब की छपाई की गयी है. बच्चों को बुक बैंक से किताबें उपलब्ध करायी गयीं. सीएजी ने झारखंड शिक्षा परियोजना के पक्ष को तर्कसंगत नहीं माना.

42 लाख बच्चे नामांकित, 27 लाख छपी किताबें

राज्य में अब भी मुख्य रूप से किताब की प्रिटिंग स्कूलों में मध्याह्न भोजन खाने वाले (औसत उपस्थित) बच्चों की संख्या के आधार पर की जाती है. वर्ष 2020-21 में राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में लगभग 42 लाख बच्चे नामांकित हैं, जबकि 27 लाख बच्चों के लिए ही किताबों की छपाई करायी गयी. स्कूलों में नामांकित लगभग 15 लाख बच्चों के लिए किताबें नहीं छापी गयीं.

बुक बैंक से दी जाती हैं पुरानी किताबें

शिक्षा विभाग के अनुसार, राज्य में बुक बैंक से पुरानी किताबों का वितरण किया जाता है. स्कूलों में पुरानी किताबों के वितरण को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं है. शिक्षकों का कहना है कि पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों से पुरानी किताब लेने में काफी परेशानी होती है.

कक्षा पांच तक के अधिकतर बच्चों की किताबें या तो उपयोग लायक नहीं रहती या फिर वे लौटाते नहीं हैं. ऐसे में बच्चों को पूरी सेट किताबें नहीं मिल पाती हैं. बच्चों के किताब वितरण के लिए भारत सरकार द्वारा 60 फीसदी राशि दी जाती है, जबकि 40 फीसदी राशि राज्य सरकार देती है. भारत सरकार द्वारा भी पुरानी किताब वितरण को लेकर को कोई दिशा-निर्देश नहीं दिया गया है.

जेसीइआरटी के िनदेशक ने कहा

ऐसा नहीं है कि केवल बच्चों की उपस्थिति व मध्याह्न भोजन के आधार पर ही किताब का वितरण किया जाता है. किताब वितरण की प्रक्रिया शुरू होने के पूर्व जिलों से बच्चों की संख्या ली जाती है. उनके किताब की जानकारी ली जाती है. इसके बाद यह तय किया जाता है कि कितनी किताब छापी जाये. फिर किताब दी जाती है.

- शैलेश चौरसिया, निदेशक, जेसीइआरटी

posted by : sameer oraon

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