Jharkhand Weather: ओडिशा से आया डिप्रेशन का होगा असर, झारखंड में अगले 2 दिन इन इलाकों में भारी बारिश का अनुमान
Published by : Sameer Oraon Updated At : 21 Jul 2024 8:06 AM
Jharkhand Weather Forecast
रांची में शनिवार को कई स्थानों पर छिटपुट बारिश हुई. सबसे अधिक 24 मिमी बारिश धनबाद के बाघमारा में हुई. वहीं, गोविंदपुर में 17 मिमी के आसपास बारिश हुई.
रांची : झारखंड में मॉनसून कमजोर है. अगले कुछ दिनों में इसके मजबूत होने का अनुमान है. एक डिप्रेशन ओडिशा में आया हुआ है. इसका असर झारखंड के कई जिलों में रहेगा. 22 जुलाई से इसका असर झारखंड में दिखने लगेगा. 22 और 23 जुलाई को कोल्हान और मध्य हिस्से (राजधानी और आसपास) में कई स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी है. इसको लेकर मौसम केंद्र ने येलो अलर्ट जारी किया है.
22 जुलाई को रांची, रामगढ़ में भारी बारिश के आसार
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 22 जुलाई को चाईबासा, जमशेदपुर, सरायकेला-खरसावां, खूंटी और रांची के साथ-साथ रामगढ़ के कुछ हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है. वहीं, 23 जुलाई को इन जिलों के साथ-साथ लातेहार, गुमला और लोहरदगा में भी कई स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी है. 23 जुलाई के बाद मॉनसून फिर कमजोर हो जायेगा.
राजधानी में हुई छिटपुट बारिश
राजधानी रांची में शनिवार को कई स्थानों पर छिटपुट बारिश हुई. सबसे अधिक 24 मिमी बारिश धनबाद के बाघमारा में हुई. वहीं, गोविंदपुर में 17 तथा बोकारो में 13 मिमी के आसपास बारिश हुई. राजधानी का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेसि से नीचे रहा. अन्य जिलों का अधिकतम तापमान भी 30 से 35 डिग्री सेसि के बीच ही है.
बारिश के अभाव में मात्र 10 फीसदी हुई धनरोपनी
बारिश के अभाव में 20 जुलाई तक जिले में धनरोपनी मात्र 10.56 प्रतिशत हो सकी है. आषाढ़ माह में खेतों में धूल उड़ रही है. 20 जुलाई तक जिले में 305 मिलीमीटर बारिश के विरुद्ध 73.8 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो औसत से बहुत कम है. इतनी कम बारिश में कृषि कार्य हो पाना संभव नहीं है. हालांकि लोहरदगा जिले में अधिकांश खेत दो और तीन नंबर का है. एक नंबर के खेतों में भी रोपनी का काम नहीं हो सका है. पानी के अभाव में दो और तीन नंबर के खेतों में भी किसानों द्वारा रोपनी नहीं की जा सकी है. दो और तीन नंबर के खेतों में प्रायः मोटे अनाज जैसे मकई, मड़वा, गोंदली, उरद, अरहर, सूरजमुखी, सरगुजा व बादाम लगाया जाता है. लेकिन इस वर्ष बारिश के अभाव में इन खेतों में भी रोपनी नहीं हो सकी है. जिन खेतों के समीप नदी, नाला या तालाब है, वहां किसी तरह पटवन कर किसानों ने रोपनी की है. उसमें भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलने के कारण रोपा गया धान पीला होने लगा है. दो नंबर के खेतों में जहां किसानों द्वारा बिचड़ा लगाया गया है.
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By Sameer Oraon
समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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