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रांची संसदीय सीट का रहा है दिलचस्प इतिहास, केरल के राजा और मुंबई के मेयर भी रहे चुके हैं सांसद

Updated at : 22 May 2024 10:04 PM (IST)
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रांची संसदीय सीट का रहा है दिलचस्प इतिहास, केरल के राजा और मुंबई के मेयर भी रहे चुके हैं सांसद

1967 में रांची संसदीय सीट के लिए एक ही चुनाव होने लगा था. इसके बाद इस सीट पर ज्यादतर बार कांग्रेस और भाजपा का ही कब्जा रहा है.

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रांची : देश में पहला आम चुनाव 1951-52 में हुआ था. चुनावी प्रक्रिया 25 अक्तूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक चली थी. बिहार में चुनाव में 1951 में हुआ था. संयुक्त बिहार के समय झारखंड वाला जो हिस्सा था, वहां नौ लोकसभा सीटों के लिए चुनाव हुआ था. नौ सीटों में 13 प्रत्याशी चुनाव जीतकर आये थे. चार सीटों पर दो-दो प्रत्याशी चुनाव जीतकर आये थे. रांची संसदीय सीट का अपना इतिहास रहा है. आजादी के बाद से रांची संसदीय सीट पर दो-दो सांसद चुने जाते थे. एक सीट आदिवासी बहुल इलाकों के लिए होता था, दूसरा शहरी इलाकों का था. वर्तमान में खूंटी संसदीय क्षेत्र वाला इलाका भी रांची संसदीय सीट के ही हिस्से थे. इसे रांची वेस्ट के नाम से जाना जाता था. यह सीट एसटी प्रत्याशियों के लिए आरक्षित था.

जयपाल सिंह मुंडा इस सीट से चुनाव जीतते थे. 1967 में रांची संसदीय सीट के लिए एक ही चुनाव होने लगा था. इसके बाद इस सीट पर ज्यादतर बार कांग्रेस और भाजपा का ही कब्जा रहा है. एक बार बीएलडी और एक बार जनता दल ने यह सीट जीता है. बीएलडी से रवींद्र वर्मा चुनाव जीते थे. वे मोरारजी भाई देसाई के मंत्रिमंडल में केंद्रीय मंत्री भी रहे. वे मूल रूप से केरल के मावेलिककारा राजपरिवार से आते थे. दूसरी बार वह यहां से चुनाव भी नहीं लड़े. जनता दल की टिकट से सुबोधकांत सहाय जीते थे. बाद में श्री सहाय कांग्रेस की टिकट से चुनाव जीते थे. इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस का छह-छह बार कब्जा रहा है. भाजपा से रामटहल चौधरी चार बार चुनाव जीते हैं. एक बार संजय सेठ चुनाव जीते हैं. श्री सेठ दूसरी बार मैदान में हैं. श्री चौधरी को पिछली बार भाजपा ने टिकट नहीं दिया था. वह निर्दलीय मैदान में थे. वहीं कांग्रेस से इस सीट पर दो बार शिव प्रसाद साहु और दो बार सुबोधकांत सहाय जीते हैं. इससे पूर्व 1962, 1967 और 1971 में इस सीट से पीके घोष चुनाव जीते थे. सुबोधकांत सहाय एक बार जनता दल की टिकट से भी चुनाव जीत चुके हैं. इस बार सुबोधकांत की बेटी यशस्वनी सहाय चुनाव मैदान में है. उनका टक्कर संजय सेठ से है. इस सीट से बीएलडी से 1977 में रवींद्र वर्मा चुनाव जीते थे. 1967 से पूर्व रांची सीट दो भागों में बंटा हुआ था.

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मीनू मसानी भी जीते थे रांची से

रांची संसदीय सीट से मीनू मसानी भी जीते थे. मीनू मसानी मुंबई के मेयर रहे थे. वह व्यापारी थे. कहा जाता है कि जयपाल सिंह मुंडा के मित्र थे. मुंडा ही उनको लेकर रांची आये थे. रांची से 1957 से सांसद बने थे. इसके बाद वह दुबारा रांची नहीं आये.

वर्ष विजेता दल

1962 पीके घोष कांग्रेस
1967 पीके घोष कांग्रेस
1971 पीके घोष कांग्रेस
1977 रवींद्र वर्मा बीएलडी
1980 शिव प्रसाद साहु कांग्रेस
1984 शिव प्रसाद साहु कांग्रेस
1989 सुबोधकांत सहाय जद
1991 रामटहल चौधरी भाजपा
1996 रामटहल चौधरी भाजपा
1988 रामटहल चौधरी भाजपा
1999 रामटहल चौधरी भाजपा
2004 सुबोधकांत सहाय कांग्रेस
2009 सुबोधकांत सहाय कांग्रेस
2014 रामटहल चौधरी भाजपा
2019 संजय सेठ भाजपा

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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