झारखंड हाइकोर्ट का पूर्व राजद नेता प्रभुनाथ सिंह को राहत देने से इनकार, विधायक हत्याकांड में उम्रकैद की सजा बरकरार

Updated at : 28 Aug 2020 4:07 PM (IST)
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झारखंड हाइकोर्ट का पूर्व राजद नेता प्रभुनाथ सिंह को राहत देने से इनकार, विधायक हत्याकांड में उम्रकैद की सजा बरकरार

Jharkhand News, Ranchi News, Jharkhand High Court, Former RJD Leader Prabhunath Singh, MLA Ashok Singh Murder Case, Hazaribagh Session Court, Saran News, Masrakh Assembly Seat, Bihar News: झारखंड हाइकोर्ट से बिहार के बाहुबली सांसद व राजद नेता रहे प्रभुनाथ सिंह को शुक्रवार (28 अगस्त, 2020) को तगड़ा झटका लगा. जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता और जस्टिस राजेश कुमार ने प्रभुनाथ सिंह और उनके भाई दीनानाथ सिंह को निचली अदालत से मिली उम्रकैद की सजा में रियायत देने से इन्कार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी. हालांकि, प्रभुनाथ के भतीजे रितेश सिंह को साक्ष्य के अभाव में आरोपों से बरी कर दिया.

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट से बिहार के बाहुबली सांसद व राजद नेता रहे प्रभुनाथ सिंह को शुक्रवार (28 अगस्त, 2020) को तगड़ा झटका लगा. जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता और जस्टिस राजेश कुमार ने प्रभुनाथ सिंह और उनके भाई दीनानाथ सिंह को निचली अदालत से मिली उम्रकैद की सजा में रियायत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी. हालांकि, प्रभुनाथ के भतीजे रितेश सिंह को साक्ष्य के अभाव में आरोपों से बरी कर दिया.

मामला 25 साल पुराना है. 3 जुलाई, 1995 को पटना के सरकारी आवास में जनता दल के नेता और सारण जिला के मसरख विधानसभा क्षेत्र के विधायक अशोक सिंह की दिनदहाड़े बम मारकर हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह और रीतेश सिंह को आरोपी बनाया गया. 18 मई, 2017 को हजारीबाग सेशन कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों को आइपीसी की धारा 302, 307, 324, 120बी और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी करार दिया.

न्यायाधीश सुरेंद्र शर्मा ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 40-40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया था. हजारीबाग की अदालत को प्रभुनाथ सिंह और उनके भाई की ओर से झारखंड हाइकोर्ट में चुनौती दी गयी थी. इसी मामले में सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने यह फैसला सुनाया है. हाइकोर्ट ने शुक्रवार (28 अगस्त, 2020) को निचली अदालत के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें पूर्व सांसद और उनके भाई को उम्रकैद की सजा सुनायी गयी थी.

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यहां बताना प्रासंगिक होगा कि वर्ष 1995 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में जनता दल के नेता अशोक सिंह ने तब के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार प्रभुनाथ सिंह को मसरख विधानसभा क्षेत्र से चुनाव में पराजित कर दिया था. बाहुबली नेता प्रभुनाथ सिंह हार को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे और कथित तौर पर डेडलाइन तय कर दी थी कि तीन महीने के अंदर अशोक सिंह को अंजाम भुगतना होगा.

विधायक बनने के ठीक 90वें दिन जब तत्कालीन विधायक अशोक सिंह राजधानी पटना स्थित अपने आवास पर आने वाले लोगों से मुलाकात कर रहे थे, बम मारकर दिनदहाड़े उनकी हत्या कर दी गयी थी. अशोक सिंह की पत्नी चांदनी देवी ने पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह, उनके भाई दीनानाथ सिंह और रितेश सिंह पर गर्दनीबाग थाना में नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी. हालांकि, प्रभुनाथ सिंह ने हमेशा इस हत्या में अपना हाथ होने से इन्कार किया.

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Posted By : Mithilesh Jha

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