झारखंड हाईकोर्ट का चला ‘हंटर’: मुख्य सचिव को होना पड़ा पेश, अब एक महीने में शुरू होगा सूचना आयोग का काम!

Updated:
विज्ञापन

झारखंड हाइकोर्ट फाइल फोटो

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के लंबे समय से निष्क्रिय रहने पर सख्त रुख अपनाया है. सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव को कोर्ट में पेश होना पड़ा. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि एक महीने के भीतर सूचना आयोग को कार्यशील कर दिया जाएगा. मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी.

विज्ञापन

Jharkhand High Court, रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने एक अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयोग के लंबे समय से गैर-कार्यशील रहने के मामले में सुनवाई की. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ में मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव व कार्मिक सचिव सशरीर उपस्थित हुए. खंडपीठ ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि राज्य सूचना आयोग को कब तक कार्यशील किया जायेगा, ताकि वहां मामलों की सुनवाई शुरू हो सके. इस पर महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि राज्य सूचना आयोग को राज्य सरकार चार सप्ताह (एक माह) में कार्यशील बनायेगी. उन्होंने खंडपीठ से समय देने का आग्रह किया, जिसे खंडपीठ ने स्वीकार कर लिया.

आपके शहर में

विज्ञापन

27 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 27 फरवरी की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी बीरेंद्र सिंह ने अपील याचिका दायर की है. पिछली सुनवाई के दाैरान कोर्ट ने मुख्य सचिव व कार्मिक सचिव को सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि सूचना का अधिकार केवल वैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है. यह भी कहा कि आयोग के निष्क्रिय रहने के कारण नागरिकों को वैधानिक मंच नहीं मिल पा रहा है और इससे हाइकोर्ट पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है.

Also Read: रेडियंट झारखंड 2.0 का शुभारंभ, एक ही मंच पर शिक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक की झलक

क्या है मामला

प्रार्थी बिरेंद्र सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत जानकारी मांगी थी. निर्धारित 30 दिनों की अवधि में सूचना नहीं मिलने पर उन्होंने प्रथम अपील दायर की, लेकिन इसके बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं करायी गयी. दूसरी अपील राज्य सूचना आयोग के समक्ष दायर की गयी, लेकिन आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त व सूचना आयुक्तों की नियुक्ति न होने के कारण वह लंबे समय से निष्क्रिय है. इस कारण प्रार्थी ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. एकल पीठ ने याचिका खारिज करते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत वैकल्पिक उपाय अपनाने की छूट दी थी, जिसके खिलाफ यह अपील दायर की गयी.

Also Read: बाबा ग्रुप से जुड़े 45 ठिकानों पर IT रेड, करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज जब्त

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola