Jharkhand HC: कंपोजिट यूजर शुल्क मामले में हाईकोर्ट के फैसले से प्रार्थियों को बड़ी राहत, इस दिन होगी अगली सुनवाई

Author Rupali das
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झारखंड हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

Jharkhand HC: झारखंड हाइकोर्ट में कंपोजिट यूजर शुल्क मामले से संबंधित 100 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई हुई. इस मामले में चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने फैसला लिया. हाइकोर्ट ने प्रार्थियों को अस्थायी राहत देने का निर्णय लिया है.

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Jharkhand HC | रांची, राणा प्रताप: झारखंड हाइकोर्ट में कंपोजिट यूजर शुल्क मामले में दायर 100 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई की गयी. अदालत ने प्रार्थियों को अस्थायी राहत दी है. जानकारी के अनुसार, मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने की. इसमें सुनवाई की अगली तारीख 6 अगस्त की है.

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प्रार्थियों को अस्थायी राहत

खंडपीठ ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता के जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि प्रार्थियों को अस्थायी राहत दी जा रही है. इस शुल्क के बिना ही उन्हें परमिट मिलते रहेंगे. खंडपीठ ने सभी याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करते हुए अगली सुनवाई की तारीख छह अगस्त तय की है. इससे पहले राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन व अधिवक्ता पीयूष चित्रेश ने पक्ष रखा.

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शुल्क देने की जरूरत नहीं

इन्होंने खंडपीठ को बताया कि अभी इस शुल्क की वसूली नहीं की जायेगी. स्पष्ट किया कि भले ही यह शुल्क जिम्मस पोर्टल पर दिख रहा हो. लेकिन प्रार्थियों को वर्तमान में इसे चुकाने की कोई आवश्यकता नहीं है. महाधिवक्ता राजीव रंजन व अधिवक्ता पीयूष चित्रेश ने कहा, हालांकि यह शुल्क प्रार्थियों द्वारा देय दिखाया जा रहा है. लेकिन उन्हें वर्तमान में इसका भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है. उनके द्वारा भुगतान किये बिना भी अपेक्षित परमिट जिम्मस पोर्टल के माध्यम से ���ारी किये जायेंगे.

खंडपीठ ने रिकॉर्ड किया स्टेटमेंट

वहीं, रिट याचिकाओं पर निर्णय होने के बाद, जिसके लिए सुनवाई की जल्द तारीख मांगी गयी है. अगर फैसला प्रतिवादियों के पक्ष में होता है, तो उक्त राशि का संग्रह किया जायेगा. महाधिवक्ता की बातों को खंडपीठ ने कोर्ट के रिकॉर्ड पर लिया. वहीं, प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता सुमित गाडोदिया और अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने बहस की.

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प्रार्थी पक्ष ने क्या बताया

इन्होंने खंडपीठ को बताया कि राज्य सरकार खनन कार्यों से संबंधित परमिट जारी करने के लिए 1200 रुपये का कंपोजिट यूजर शुल्क ले रही है. यह राशि झारखंड माइंस एंड मिनरल्स पोर्टल (जिम्मस पोर्टल)) पर जोड़ दी जाती है, जो कि पूरी तरह से गैरकानूनी है. अधिवक्ता गाडोदिया ने कहा कि यह शुल्क बिना किसी वैध अधिसूचना के लगाया जा रहा है. राज्य सरकार का ऐसा कोई अधिकार नहीं बनता कि वह एकतरफा तरीके से इस तरह का शुल्क तय करे. खनन विभाग द्वारा लगाया जा रहा शुल्क अवैध व उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है.

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पोर्टल पर दिख रहा कंपोजिट यूजर शुल्क

उल्लेखनीय है कि प्रार्थी त्रिवेणी इंजीकॉन प्रालि व अन्य की ओर से अलग-अलग याचिका दायर की गयी है. प्रार्थियों के अनुसार, 30 मार्च 2022 को पहले भी झारखंड हाइकोर्ट ने इसी मामले में सरकार को निर्देश दिया था कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती है, तब तक प्रार्थियों पर कोई दबाव न डाला जाये. इसके बाद 15 अप्रैल 2025 को भी यही बात दोहरायी गयी. इसके बावजूद खनन निदेशालय ने 24 जून 2025 को एक नया नोटिस जारी करते हुए कंपोजिट यूजर शुल्क को पोर्टल पर दर्शाना शुरू कर दिया.

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